देवों के देव महादेव | Mahadev par kavita

देवों के देव महादेव

( Devon ke dev mahadev )

 

 

दर्शन तो करके ही जाऐगे चाहे बाधाएँ हो कही,

टूटकर बिखरना तो हमने  कभी सीखा ही नही।

भोले को पाने के लिए  शोले का रास्ता ही सही,

प्रसाद भांग ही मिले बिना दर्शन जाऐगे ही नही।।

 

लक्ष्य नही मिलता है उनको जो निराश हो जाते,

कठिनाइयों एवं परेशानियों से ही हार मान लेते।

लक्ष्य पाने के लिए लड़ना पड़ता काली रातों से,

और वही लोग  तकलीफ़ पाकर मंजिल छू लेते।।

 

भगवान शंकर है  भोला उतना ही है वह शोला,

भोले की रहती जिस पर छाया उतनी ही माया।

बाबा को सारी दुनियां  कहती है भोले भण्डारी,

लेकिन लिलाएँ भी भोले की  बहुत ही  निराली।।

 

बाबा है देवों के ही देव ऐसे त्रिपुरारी वो महादेव,

ब्रह्मा विष्णु रटते महेश और दानव डरते गणेश।

जो अमरनाथ धाम जाते  मनवांछित फल पाते,

सारे काज उसके संवरते पशुपति यह कहलाते।।

 

ये तीनों लोक थर-थर कांपे जब भोलेनाथ नाचें,

आप है कालों के भी काल एवं आप महांकाल

सब कष्ट परेशानियाें का आपके पास समाधान,

आपसे ही होता शुरुआत एवं ‌आपसे अंतकाल।।

 

 

रचनाकार :गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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