पग बढ़ाते चलो

पग बढ़ाते चलो

पग बढ़ाते चलो

*****

कंकड़ी संकरी पथरीली,
या हों रास्ते मखमली।
हृदय में सदैव जली हो अग्नि,
स्वार्थ हमें सब होगी तजनी।
सेवाभाव की मंशा बड़ी,
रास्ते में मुश्किलें भी होंगी खड़ी।
पर जब करने की मंशा हो भली,
बाधाएं दूर हो जातीं बड़ी से बड़ी।
खुदा के वास्ते न देखो पीछे मुड़कर,
बस तू पग बढ़ाते चलो डटकर।
डाल हाथों में हाथ,
सबको लेकर चलो तू साथ;
काबू में रखें सभी अपने जज्बात।
आह्वान, उद्घोष करते चलो,
पग आगे ही आगे रखते चलो।
निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचे बिना,
झुके न तेरा ये शीष,सीना।
थके नहीं तेरे ये पांव,
भले लग जाएं उनमें दो घाव ।
घाव के उस टीस को ही बनाओ प्रेरणा,
मंजिल कैसे मिलती है ? यह देखना!
पथ से विचलित न होना,
ना कष्टों का रोना रोना।
साथ चल रहे लोगों से कहना,
रूको ना … रूको ना!
अब आने ही वाली है मंजिल-
चलकर वहीं ठहरो ना,
रास्ते में यूं रूको ना।
दूर निकल आए हैं-
धैर्य और साहस खोवो ना,
थोड़ी और हिम्मत रखो ना।
चल पड़े हैं-
निकल पड़े हैं मंजिल की ओर,
पहुंच ही जायेंगे अब होते-होते भोर।
मचाओ न अनर्गल सब शोर,
बस पग बढ़ाते चलो,
पग बढ़ाते चलो।
मंजिल आने ही वाली है,
समझो आ ही गई है-
अब तकदीर बदलने ही वाली है,
तस्वीर बदलने वाली है;
कष्ट अब दूर होने ही वाली है।
मंजिल पाकर जश्न मनाएंगे,
वहीं रूक थोड़ा सुस्तायेंगे ।
असीम शांति का अनुभव कर पायेंगे,
जो मानवता की सेवा में लग जायेंगे।

?

नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

बिहार में पुल बह रहे हैं | Kavita Bihar mein

Similar Posts

  • हमारे राम | Ram Ji par Kavita

    हमारे राम ( Hamare ram )   सुकून-ओ-चैन का पैगाम, देने हमें आते हैं राम। भाई से भाई का रिश्ता, निभाने आते हैं राम। दिखता यहाँ कोई मायावी रावण, वध उसका करने आते हैं राम। नफरत की दीवार खड़ा न करो, मोहब्बत का पाठ पढ़ाते हैं राम। हिन्दू-मुस्लिम वो क्या जाने, मेरी हर साँस में…

  • रेशम के धागे | Resham ke Dhaage

    रेशम के धागे ( Resham ke dhaage )   रेशम के इस धागे की ये बात ही बड़ी-निराली है, सजाकर लाती बहनें इसदिन प्यारी सी थाली है। लम्बी उम्र की कर कामना तिलक वह लगाती है, बिठाकर बाजोट भैय्या के हाथ राखी बाॅंधती है।। रोली-मोली और मिठाई नारियल लेकर आती है‌‌, ख़ुश रहना सदैव प्यारे…

  • कुछ जाने अनजाने रिश्ते | Kavita

    कुछ जाने अनजाने रिश्ते ( Kuch jaane anjaane rishte )   कुछ जाने अनजाने रिश्ते, कुछ दिल से पहचाने रिश्ते। कुछ कुदरत ने हमें दिया है, कुछ हमको निभाने रिश्ते।   रिश्तो की पावन डगर पर, संभल संभल कर चलना है। सदा लुटाना प्यार के मोती, संस्कारों में हमें ढलना है।   माता पिता गुरु…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) षष्ठ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) षष्ठ दिवस नवरात्रि पर्व में भुवाल माता का नाम लीजिये ।ज्ञानामृत का भरकर प्याला पीजिये ।आत्मा को शुद्ध बना लीजिये ।नवरात्रि पर्व में भुवाल माता का नाम लीजिये ।बढ़ रहा वैभव ज्यों तृष्णा बढ़ रही ।अब जरा संतोष दिल में कीजिये ।नवरात्रि पर्व में भुवाल माता का नाम लीजिये ।क्यों…

  • उम्मीद | Poem Ummeed

    उम्मीद ( Ummeed ) एक उम्मीद सी,दिल में रहती है । जो प्यार से, हमसे कहती है । चिंताएं सारी ,छोड़ भी दो । खुशियों से , नाता जोड़ ही लो । वो दिन भी, जल्दी आयेगा । मन ,आनंदित हो जायेगा । जब साथ, मिलेगा अपनों का । संग संग देखे , सब सपनों…

  • होलिया में गरवा लगवा | Holiya me

    होलिया में गरवा लगवा छुटि जाई दुनिया -जहान, होलिया में गरवा लगावा। जाई नहीं सथवाँ ई महल-अटरिया, दाग से बचावा तू अपनी चदरिया। अपनी चदरिया हो,अपनी चदरिया, अपनी चदरिया हो,अपनी चदरिया, नाहीं करा तनिको ग़ुमान, होलिया में गरवा लगावा, नाहीं करा तनिको ग़ुमान, होलिया में गरवा लगावा, छुटि जाई दुनिया -जहान, होलिया में गरवा लगावा।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *