Poem on Tabassum

तबस्सुम | Poem on Tabassum

तबस्सुम

( Tabassum ) 

 

तरोताजगी भर जाती तबस्सुम
महफिल को महकाती तबस्सुम
दिलों के दरमियां प्यारा तोहफा
चेहरों पे खुशियां लाती तबस्सुम

गैरों को अपना बनाती तबस्सुम
रिश्तो में मधुरता लाती तबस्सुम
खिल जाता दिलों का चमन सारा
भावों की सरिता बहाती तबस्सुम

घर को स्वर्ग सा सुंदर बनाती तबस्सुम
सुंदरता में चार चांद लगाती तबस्सुम
चेहरे खिल जाते हैं एक मुस्कान से
प्यार का एहसास कराती तबस्सुम

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

विधि के विधान का सम्मान करो | Geet Vidhi ke Vidhan

 

Similar Posts

  • रेशम के धागे | Resham ke Dhaage

    रेशम के धागे ( Resham ke dhaage )   रेशम के इस धागे की ये बात ही बड़ी-निराली है, सजाकर लाती बहनें इसदिन प्यारी सी थाली है। लम्बी उम्र की कर कामना तिलक वह लगाती है, बिठाकर बाजोट भैय्या के हाथ राखी बाॅंधती है।। रोली-मोली और मिठाई नारियल लेकर आती है‌‌, ख़ुश रहना सदैव प्यारे…

  • राह तेरी ओर

    राह तेरी ओर ढूंढ रहा हूँ अब भी वो रास्ता,जिससे तुम तक अपने शब्द पहुँचा सकूं।दिल में जो दर्द दबा रखा है,वो तुम्हारे सामने बता सकूं। कोई एक आशा की किरण मिल जाए,जिससे अपनी मोहब्बत तुम्हें जता सकूं।तेरी यादों के अंधेरे में जो खो गया हूँ,वहां से उजाले में फिर लौट आ सकूं। लौट आओ…

  • खत् | Khat par kavita

    खत् ( Khat )   हमारे “खत्” ही थे एक सहारे….||✉️|| 1.कलम उठा के कागज पर, अरमान दिलों के लिख डाले | मम्मी-पापा सब कैसे रहते हैं, सब हाल घरों के लिख डाले | मुहल्ले-पडोस की खट्टी-मीठी, सब चाहत-बातें-दिल काले | खत् लिख पोस्ट किया अब बैठे, जबाब की चाह मे दिल वाले | हमारे…

  • बारिश की बूंदें

    बारिश की बूंदें     ऐसी बरसी थीं मुझ पर कल बारिश की बूंदें बरसा था मुझ पर तुम्हारा प्यार जैसे   मिट गईं खलिश मिट गईं दूरियां एहसासों से मेरे कर गई साजिशें ऐसी बरसी थीं मुझ पर कल बारिश की बूंदें   भीगे भीगे से शिकवे भीगी भीगी शिकायत आंसुओं से मेरे कर…

  • परिवर्तन की अठखेलियों में | Parivartan ki Athkheliyon Mein

    परिवर्तन की अठखेलियों में ( Parivartan ki athkheliyon mein )    परिवर्तन की अठखेलियों में, खुशियों की रवानी है शाश्वतता अहम श्रृंगार, सृष्टि अलौकिक नियम । आशा उमंग उल्लास अथाह, समृद्धि चाहना अत्युत्तम । पटाक्षेप कर सघन तिमिर, आलोक पथ बखानी है । परिवर्तन की अठखेलियों में, खुशियों की रवानी है ।। लोभ मद लालच…

  • सत्य राम कहॉं से लाऊँ?

    सत्य राम कहॉं से लाऊँ? दशानन रावण का अहम् हुंकार ,विजय से पराजय जाता है हार,पर यह तो त्रेतायुग की कहानी,कलयुग रावणों का ही है संसार । दुष्कर्म,विवाद,द्वेष,दम्भ,दिखावट,ढूँढती कहाँ हैं राम, कहाँ है केवट?छल-कलह,दगेबाज,कपटी-व्यापार,अन्याय,अत्याचार,अनादर, बनावट। प्रत्येक साल विजयादशमी है आती,नई ऊर्जा जन-जनार्दन में है भरती,नौ दिन आदिशक्ति देवी नवरात्र पर्व,रामलीला प्रदर्शन हर्षोल्लासित करती। प्रशंसा से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *