राह तेरी ओर

राह तेरी ओर

राह तेरी ओर

ढूंढ रहा हूँ अब भी वो रास्ता,
जिससे तुम तक अपने शब्द पहुँचा सकूं।
दिल में जो दर्द दबा रखा है,
वो तुम्हारे सामने बता सकूं।

कोई एक आशा की किरण मिल जाए,
जिससे अपनी मोहब्बत तुम्हें जता सकूं।
तेरी यादों के अंधेरे में जो खो गया हूँ,
वहां से उजाले में फिर लौट आ सकूं।

लौट आओ दिकु, उसी प्यार के साथ,
कि बची हुई हर सांस तुम संग बिता सकूं।
तेरी बाहों में सुकून मिले ऐसा,
कि हर अधूरा ख्वाब पूरा कर तुम संग निभा सकूं।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • एक हो गये हम | Ek Ho Gaye Hum

    एक हो गये हम ( Ek Ho Gaye Hum ) सावन निकले जा रहा, दिल भी मचले जा रहा। कैसे समझाये दिलको, जो मचले जा रहा। लगता है अब उसको, याद आ रही उनकी। जिसका ये दिल अब, आदि सा हो चुका है।। हाल ही में हुई है शादी, फिर आ गया जो सावन। जिसके…

  • दिल को अब किसी की जरूरत नहीं | Dil ko Ab

    दिल को अब किसी की जरूरत नहीं ( Dil ko ab kisi ki jarurat nahi )   ढूंढ लेता खुशियां दिल कहीं ना कहीं। दिल को अब किसी की जरूरत नहीं। आ गया अब जीना दुनिया में दिल को। ठिकाना सुहाना प्रीत की सरिता बही। सिंधु लेता हिलोरें मोती बरसे प्यार के। मनमौजी मतवाला झूम…

  • तृष्णा | Kavita Trishna

    तृष्णा (Trishna ) तृष्णाएं सदा संतृप्त, नेह से संसर्ग कर पगडंडियां व्याकुल दिग्भ्रमित, उच्चवाचन मरीचि प्रभाव । सुख समृद्धि मंगलता दूर, निर्णयन क्षमता अभाव । अथक श्रम सफलता चाहना, विराम पल उत्सर्ग कर । तृष्णाएं सदा संतृप्त ,नेह से संसर्ग कर ।। नैतिक आचार विचार, नित विमल कामना स्पंदन । कपट रहित धवल छवि, हृदय…

  • कविता जीवन की परिभाषा है

    कविता जीवन की परिभाषा है दिल को छूकर कविता धड़कन बन जाती हैजुदाई में किसी रूह की तड़पन बन जाती हैबच्चा हंसता है तो कविता होठों पर मुस्काती हैहर किसी की आह में खुदा का खत बन जाती है। जब कोई बच्ची बस पानी पीकर सो जाती हैभूख की दारुण दशा देख कविता रो जाती…

  • न मनाओ अंग्रेजी नया वर्ष

    न मनाओ अंग्रेजी नया वर्ष अब तो अंग्रेजों का नया वर्ष सबको मुबारक हो,अंग्रेजियत जिसने अपनाया है उसे मुबारक हो।हम तो आर्यावर्त की धरती पर रहते हैं जनाब,हमारा नया वर्ष हमें तुम्हारा तुमको मुबारक हो।। नया वर्ष हम क्यों मनाते हैं समझ नहीं आता मुझे,न तो एक प्रकृति में कोई हलचल नजर आता मुझे।फिर भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *