Main aur chai

मैं और चाय | Main aur chai

” मैं और चाय “

( Main aur chai )

 

ले चाय की चुस्की लगाते थे,
दोस्तों के साथ महफिल हम जमाते थे।

लंबी-लंबी छोड़ कर गप्पे हम लड़ाते थे,
चाय की टपरी पे आधी ज़िंदगी बिताते थे।

टांग खींच कर दोस्तों की खूब मस्ती करते थे ,
पता ही नहीं चलता कब घंटों बीत जाते थे।

दोस्तों की भी सुन कर खुद की सुनाते थे,
मजाक से ही अपना मन हल्का करते थे।

यारों के साथ इतने मशरूफ हो जाते थे,
खुशी बाँट कर औरों का गम भुलाते थे।

इसी तरह बस अपना मन हल्का करते थे,
यारों को कसकर बस गले हम लगाते थे।

फिर मिलेंगे सुमित इतना ही कह पाते थे,
सभी अपने अपने घर को चले जाते थे।

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/nari-ek-roop-anek/

Similar Posts

  • मिलाते तो सही | Milate to sahi poem

    मिलाते तो सही ( Milate to sahi poem )   आवाज़ से आवाज़ मिलाते तो सही….! दिल से दिल मिलाते तो सही…..! मन से मन मिलाते तो सही…..! हाँ में हाँ मिलाते तो सही…….! सुर से सुर मिलाते तो सही…..! हाथ से हाथ मिलाते तो सही…..! नज़र से नज़र मिलाते तो सही……! क़दम से कदम…

  • लेखक संविधान के

    लेखक संविधान के हमारा संविधान हमें जीने का स्वतंत्र अधिकार देता हैहमारा संविधान हम सबको हमारा स्वाभिमान देता है।सबसे ज्यादा योगदान डॉ भीमराव अंबेडकर जी का रहा,जिसको पूरा देश संविधान का गौरव मान देता है।। प्रेम बिहारी नारायण रायजादा संविधान के सुलेखक है,नंदलाल बोस,राम मनोहर सिन्हा मूल संस्करण वेदक है।शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा सुशोभित किया…

  • गीत वतन के गाएंगे | Geet Watan ke Gayenge

    गीत वतन के गाएंगे ( Geet watan ke gayenge )   गीत वतन के गाएंगे, घट घट अलख जगाएंगे। प्रेम का दीप जलाएंगे, जग रोशन कर जाएंगे। गीत वतन के गाएंगे देशभक्ति रंग बिखरा कर, राष्ट्र प्रेम तराने गाकर। आजादी के दीवानों को, भावों के पुष्प चढ़ाकर। अमर शहीदों की गाथा, यशगान वीरों के गाएंगे।…

  • तुम साधना हो

    तुम साधना हो तुम ईश्वर की अनुपम संचेतना होरचित ह्दय प्रेम की गूढ़ संवेदना होक्या कहा जाए अद्भुत सौन्दर्य वालीतुम सृष्टि की साकार हुई साधना हो । घुँघराले केश, मृगनयनी, तेज मस्तकअंग सब सुअंग लगें यौवन दे दस्तक।ठुड्डी और कनपटी बीच चमके कपोलकवि सहज अनुभूति की तुम पालना हो । तुझसे जुड़कर कान की बाली…

  • पगडंडी | Hindi kavita

    पगडंडी ( Pagdandi )   पगडंडी वो रस्ता है, जो मंजिल को ले जाती है। उबड़ खाबड़ हो भले, मन को सुकून दिलाती है।   शहरों की सड़कों से ज्यादा, प्यारी लगे पगडंडी। प्रदूषण का नाम नहीं है, बहती हवा ठंडी ठंडी।   पगडंडी पर प्रेम बरसता, सद्भावो की धारा भी। हरी भरी हरियाली से,…

  • उपहार | Uphar

    उपहार आता नववर्षसब होते मिलकर हर्षदेते उपहार प्यारा नववर्षघर आंगन देते दर्षमिलता उपहार अपने जीवनजीवन में बने श्रीमनउपहार संग नववर्ष वेलानववर्ष पर लगता मेलाईश्वर उपहार उपहार प्यारामिलता जब उसे प्याराखुशियों संग चहुंओर खुशीमिलती हैं जब ताजपोशीअनमोल उपहार सुनील कुमारनकुड़ सहारनपुरउत्तर प्रदेश भारत यह भी पढ़ें :-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *