Kamaal Karte ho

कमाल करते हो | Kamaal Karte ho

कमाल करते हो

( Kamaal karte ho ) 

 

लगाकर चाँद पर दाग कमाल करते हो,
बातें बड़ी आजकल बेमिसाल करते हो।

बेचैन हो जाता दिल मेरा बातें सुन तुम्हारी,
खुद से क्यों नहीं तुम ये सवाल करते हो?

यूँ उलझा नहीं करते हर बार ही किसी से,
बेवज़ह तुम हर बात पर बवाल करते हो!

करता हूँ कोशिश तुम्हें लाख समझाने की,
मेरी हिदायत पे तुम क्यूं मलाल करते हो।

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

मैं और चाय | Main aur chai

Similar Posts

  • ज़िंदा तो हैं मगर

    ज़िंदा तो हैं मगर ख़ुद की नज़र लगी है अपनी ही ज़िन्दगी कोज़िंदा तो हैं मगर हम तरसा किये ख़ुशी को महफूज़ ज़िन्दगानी घर में भी अब नहीं हैपायेगा भूल कैसे इंसान इस सदी को कैसी वबा जहाँ में आयी है दोस्तों अबहालात-ए-हाजरा में भूले हैं हम सभी को हमदर्द है न कोई ये कैसी…

  • दो बूँद पानी चाहिए | Do Boond Pani Chahiye

    दो बूँद पानी चाहिए ( Do boond pani chahiye )   बात तो अहल-ए-ख़िरद यह भी सिखानी चाहिए हर बशर को देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए ऐ मेरे मालिक ये तेरी मेहरबानी चाहिए काम आये सब के ऐसी ज़िंन्दगानी चाहिए दे गया मायूसियाँ फिर से समुंदर का जवाब जबकि मेरी प्यास को दो बूँद पानी…

  • जैसा मैं चाहती थी वैसा वो कर रहा है

    जैसा मैं चाहती थी वैसा वो कर रहा है जैसा मैं चाहती थी वैसा वो कर रहा हैदिल को मगर न जाने क्या फिर अखर रहा है। उसकी वो सर्द महरी पत्थर के जैसा लहज़ाअब ये बता रहा है सब कुछ बिखर रहा है। जो है खुशी मयस्सर उसमें नहीं बशर खुशजो ख़्वाहिशात बाकी बस…

  • अपने सजन पर रहे

    अपने सजन पर रहे बोझ बाक़ी न इतना भी मन पर रहेकुछ भरोसा तो अपने सजन पर रहे राहे- मंज़िल थी काँटो भरी इस कदरदाग़ कितने दिनों तक बदन पर रहे आज जी भर के साक़ी पिला दे हमेंमुद्दतों से ही हम आचमन पर रहे कह रहे हैं ग़ज़ल हम तो अपनी मगरवोही छाये हमारी…

  • क्या समझे | Kya Samjhe

    क्या समझे ( Kya Samjhe ) क्या किया उसने और क्या समझे।बेवफ़ाई को हम वफ़ा समझे। ज़ह्न को उसके कोई क्या समझे।सर निगूं को जो सर फिरा समझे। क़ाफ़ले ग़र्क़ हो गए उन के।नाख़ुदाओं को जो ख़ुदा समझे। क्यों न पागल कहे उसे दुनिया।ज़ुल्फ़-ए-जानां को जो घटा समझे। ख़ुद को समझे वो ठीक है लेकिन।दूसरों…

  • हमेशा इश्क में

    हमेशा इश्क में हमेशा इश्क में ऊँची उठी दीवार होती हैनज़र मंज़िल पे रखना भी बड़ी दुश्वार होती है सभी उम्मीद रखते हैं कटेगी ज़ीस्त ख़ुशियों सेनहीं राहत मयस्सर इश्क़ में हर बार होती है । बढ़े जाते हैं तूफानों में भी दरियादिली से वोदिलों को खेने वाली प्रीत ही पतवार होती है नहीं रख…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *