Niyam

नियम | Niyam

नियम

( Niyam ) 

 

कौन है संसार में जो नियम में बंधना चाहता है
हर कोई तो नियम से परे निकलना चाहता है।

प्रेम के नियम में बंध कर बहता चला गया जो
सिमट कर भी वह तो बिखर जाना चाहता है।

सीमाओं से परे की ज़मीन आकर्षित है करती
बंधनों से परे जा जहाँ इंसान विचरना चाहता है।

संज्ञान है उसे ज्ञान कहाँ तक साथ दे पायेगा
कभी तर्क वितर्क से बाहर खोजना चाहता है।

झूठी दलीलों में फंसी रही रिवायतें हज़ारों देखी
सच जो बसा हृदय में एक बार देखना चाहता है।

धुंध ही धुंध कितनी बढ़ती जा रही है आसमां में
छंटे भोर संग स्वयं का अस्तित्व ढूढ़ना चाहता है।

 

शैली भागवत ‘आस’
शिक्षाविद, कवयित्री एवं लेखिका

( इंदौर ) 

यह भी पढ़ें :-

स्वतंत्र है अब हम | Swatantrata Hai ab Hum

Similar Posts

  • हिमायत में आ गये

    हिमायत में आ गये सारे अज़ीज़ उनकी हिमायत में आ गयेमजबूर होके हम भी सियासत में आ गये हाँलाकि ख़ौफ़ सबको सितमगर का था बहुतकुछ लोग फिर भी मेरी वकालत में आ गये इतने हसीन जाल बिछाये थे आपनेहम ख़ुद शिकार होके हिरासत में आ गये सोचा नहीं नशे में हुकूमत के आपनेअहबाब इतने कैसे…

  • दर्द में भी मुस्कराना चाहिए

    दर्द में भी मुस्कराना चाहिए हर खुशी को गुन गुनाना चाहिएदर्द में भी मुस्कराना चाहिए जो पड़ी बंजर हमारी भूमि हैअब वहां फसलें उगाना चाहिए तुम नहीं भागो नगर की ओर अबगाँव में मिलकर सजाना चाहिए खोखले हो जाये न रिश्ते सभीयार उनको भी बचाना चाहिए साथ मिलके खाई थी उसने कसमयाद अब उसको दिलाना…

  • मिली जब से मुहब्बत

    मिली जब से मुहब्बत मिली जब से मुहब्बत हम सफ़र की बात करते हैंहुईं पूरी मुरादें , रहगुज़र की बात करते हैं बड़े नादान है अब पूछते दिल में हमारे क्याये दिल हम हार बैठे अब जिगर की बात करते हैं सफ़ीना आज मेरा जब फँसा है इस भँवर में तोकरें हम याद रब को…

  • तुम्हारा नाम | Tumhara Naam

    तुम्हारा नाम ( Tumhara Naam ) न याद-ए-आब-जू आए न याद-ए-आबशार आए।तुम्हारा नाम ही लब पर हमारे बार-बार आए। रहें होश-ओ-हवास़ अपने सलामत उस घड़ी या रब।हमारे सामने जिस दम जमाल-ए-ह़ुस्ने-यार आए। अभी दौर-ए-ख़िजां है तुम अभी से क्यों परेशां हो।सजा लेना नशेमन को गुलों पर जब निखार आए। सजा रक्खी है जिसके वास्ते यह…

  • देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए

    देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए बात तो अहल-ए-ख़िरद यह भी सिखानी चाहिएहर बशर को देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए ऐ मेरे मालिक ये तेरी मेहरबानी चाहिएकाम आये सब के ऐसी ज़िंन्दगानी चाहिए दे गया मायूसियाँ फिर से समुंदर का जवाबजबकि मेरी प्यास को दो बूँद पानी चाहिए क्यों भला पकड़े हुए हो रहबरों की उँगलियाँराह…

  • खुशियों में हर मातम बदला | Matam Shayari

    खुशियों में हर मातम बदला ( Khushiyon mein har matam badla )    गर्मी का ये आलम बदला बारिश आयी , मौसम बदला ज़ख़्म नहीं भर पाये दिल के साल महीने मरहम बदला लोग नये सत्ता में आये हर छत पर अब परचम बदला साल महीने मौसम बदले लेकिन कब मेरा ग़म बदला सच्चा समझा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *