Swatantrata Hai ab Hum

स्वतंत्र है अब हम | Swatantrata Hai ab Hum

स्वतंत्र है अब हम

( Swatantrata hai ab hum ) 

 

पूर्ण स्वतंत्र है अब हम
स्वतंत्रता दिवस है आया,
हर्ष,उल्लास, देशभक्ति
का रंग फिज़ा में छाया।

आजाद वतन के वास्ते वीरों
ने अपना खून बहाया,
तोड़ गुलामी की जंजीरें
आज़ाद वतन बनाया।

पृथक भाषा, पृथक जात,
पृथक बोलते है बोलियां,
स्वतंत्र देश को करने
सीने पर खाई सबने गोलियां ।

वीर सैनिक गाते है यहां
देशभक्ति की मीठी लोरियां
नापाक इरादों से जो उठी
वो तोड़ दी है उँगलियां।

विश्व गुरु बन महान इसने
सबको गले लगाया,
दामन अपना फैलाया
जब भी संकट आया।

ये तिरंगा झंडा देश की
पहचान बन लहराया,
गर्व भारतीय होने का
हृदय में सबके समाया।

 

शैली भागवत ‘आस’
शिक्षाविद, कवयित्री एवं लेखिका

( इंदौर ) 

यह भी पढ़ें :-

हर दिन | Har Din

Similar Posts

  • गौरी विनायकम | Aarti Gauri Vinayakam

    गौरी विनायकम ( Gauri Vinayakam )   एकदंत दयावंत लंबोदर गौरी विनायकम कृपा दृष्टि कीजिए l सुखकर्ता दुखहर्ता विघ्नहर्ता कष्टों को दूर कर ज्ञान हमको दीजिए l वक्रतुंड महाकाय शंभू सुत पूज्य प्रथम आप तो सवार काज दीजिए l जय देव मंगल मूर्ति गणेश दुष्टों का दलन कर विघ्न हर लीजिए l रिद्धि सिद्धि भालचंद्र…

  • शिक्षक होता युग निर्माता | Shikshak par Kavita

    शिक्षक होता युग निर्माता ( Shikshak hota yug nirmata )    शिक्षक ही होता युग निर्माता, आदर्शों का वह पाठ पढ़ाता। वो मर्यादा, संस्कार सिखाता, भविष्य की बुनियाद ‌बनाता।। अज्ञानता से सबको उबारता, सद्गुणों का संदेश वह देता। अंधेरे से उजाला वो दिखाता, आध्यात्मिकता ज्ञान बताता।। सभी बच्चों का ध्यान रखता, बुद्धिमान व गुणवान बनाता।…

  • शिव पथ

    शिव पथ शिव पथ अतृप्ति का ऐसासुखद मार्ग है जिसमेंअभोग ,त्याग , आस्थाआदि सहायक होते है ।रोटी खाई, भूख बुझी नहीं ।पानी पिया, प्यास बुझी नहीं ।धन का अर्जन किया ,लालसा बुझी नहीं आदिक्योंकि इस क्षणिक तृप्तिके पीछे अतृप्ति काविशाल सुखद साम्राज्य हैजिससे प्यास बुझे कैसे?यह एक अबूझ पहेली है ।पदार्थ का भोग तृप्तिका आभास…

  • 21 वीं सदी का यथार्थ

    21 वीं सदी का यथार्थ देव संस्कृति देव भाषा देव लोक की विदाई मानव का प्रौद्योगिकीकरण जड-चेतन का निशचेतन छायावाद का प्रचलन चार्वाक का अनुकरण कृत्रिम इच्छा का सृजन कृत्रिम मेधा का उत्पादन बाजारों के बंजारें आत्ममुग्धता की उपभोक्तायें मानवता का स्खलन सभ्यता का यांत्रिकरण बिलगेटस,मस्क का खगोलीकरण अंबानी,अडानी का आरोहण मूल्यों-नीतियों का मर्दन रक्तबीजों…

  • परिवार | Parivar par kavita

    परिवार ( Parivar )   चाहे कोई कितना भी हो पास, चाहे तुम हो किसी के कितने भी खास। छोटी-बड़ी बातों को पल में जो भुला दे, वो परिवार ही होता है। टूटने लगे जब हर आस, छूटने लगे जब तन से साँस, फिर भी हर आवाज़ में तुम्हें पुकारे, उस पिता के साये में…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem | Love Kavita -प्रेम अगन

    प्रेम अगन ( Prem Agan )   बचना  होगा   प्रेम  अगन से, इसमे  ज्वाला ज्यादा है। सुप्त सा ये दिखता तो है पर,तपन बहुत ही ज्यादा है।   जो भी उलझा इस माया में, वो ना कभी बच पाया है, या तो जल कर खाक हुआ या, दर्द फफोला पाया है।   कोई कुछ भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *