नमन | Naman

नमन

( Naman )

 

भारत की प्राचीनता ही उसकी महानता है
बहुआयामी शोध मे ही उसकी परिपक्वता है
चंद्रयान का चांद पर उतरना नव आरंभ है
गतिशीलता इसमें पुरातन से ही प्रारंभ है..

चौदह लोकों तक भ्रमण वर्णित है शास्त्रों मे
नभ से पताल तक सब अंकित है शब्दों मे
यह तो नव प्रभात का नव सृजन है अभी
देखेगी दुनिया आश्चर्य चकित हो अचंभी..

शर्त है बस एक यही,साथ चलें सब मिलकर
जात पात,ऊंच नीच ,भेद भाव सब भूलकर
शिक्षा भी साथ हो,कुछ सनातन की तर्ज पर
औषधि है भारत मे पूर्ण विश्व की मर्ज पर..

होगा तैयार जल्द आदित्य और गगन यान
धीरे धीरे ही स्पष्ट होगा कैसे है भारत महान
सौ सौ बार नमन है,हर वैज्ञानिक जन को
संस्कृति,सभ्यता,अखंडता के नव सृजन को..

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

चंद्रयान तीन | Poem in Hindi on Chandrayaan 3

Similar Posts

  • बोल पड़ी मेरी दीवार घड़ी | Deewar Ghadi par Kavita

    बोल पड़ी मेरी दीवार घड़ी ( Bol padi meri deewar ghadi )    अचानक बोल पड़ी मेरी दीवार घड़ी बढ़ते जाओ यह दुनिया बहुत बड़ी पल पल जीवन का आनंद ले लो खुशियों से अपनी झोली भर लो यह दुनिया घड़ी सी गोल मटोल संसार में पग पग पे रमझोल है अगर समय रहते ना…

  • उम्मीदें | Ummide

    उम्मीदें  ( Ummide )   उम्मीदें अक्सर चोट पहुंचाती है, कमजोर होने का एहसास दिलाती है। प्रेम और मोह में फंसा व्यक्ति ,दूसरों से उम्मीदें रखता है , चोटिल होने पर वह ,एक बार फिर से बिखरता है। शिकायतों का दौर फिर ,कुछ यूं शुरू हो जाता है , उम्मीदें अक्सर चोट पहुंचाती है ,…

  • नरेन्द्र सोनकर की कविताएँ | Narendra Sonkar Poetry

    रोटी बड़ी या देश बड़ा? संसद गूंगीसांसद गूंगान्यायालय गूंगान्यायाधीश गूंगासत्ता गूंगीशासन गूंगादल-दल गूंगागण-गण गूंगाबस्ती गूंगीघर-घर गूंगाजन-जन गूंगाकण-कण गूंगाधरम-करम का परचम गूंगापढ़ें-लिखें का दमखम गूंगाइस देश का सिस्टम गूंगा अशिक्षा का ग्राफ न पूछो?महंगाई की भाप न पूछो?बेरोज़गारी ज़िंदा डसतीछात्र लटकते हैं फांसी परहताशा, निराशा इतनी खून, मांस, लोग बेचें किडनी! नगर-सिटी क्या,बस्ती क्या,लोग भटकते दर-बदररोटी…

  • दारु इतनी मत पीना | Daru par Kavita

    दारु इतनी मत पीना ( Daru itni mat pina )   दारू इतनी मत पीना कि वह तुम्हें पीने लग जाएं, बिन आग व श्मशान के तुम्हारा शरीर जल जाएं। सुधर जाना संभल जाना सभी पीने वाले वक्त पर, शत्रुओं से भी बुरी है ये इससे दूरियां बनाते जाएं।। गिरते-पड़ते आते है इस तरह के…

  • अखंड भारत | Akhand Bharat

    अखंड भारत  ( Akhand Bharat )   अखंड भारत , अद्भुत अनुपम नजारा अनूप वंदन सनातन धर्म, कर्म धर्म मोहक पावन । मानवता सदा श्री वंदित, सर्वत्र समृद्धि बिछावन । स्नेह प्रेम अपनत्व अथाह, सदाचारित परिवेश सारा । अखंड भारत,अद्भुत अनुपम नजारा ।। नदी पर्वत मैदान पुनीत, समरसता मृदुल स्वर । सत्य नित्य मनुज संगी,…

  • पिता – एक कल्पवृक्ष | Pita ek kalpavriksha

    पिता – एक कल्पवृक्ष ( Pita ek kalpavriksha )    अपनी कलम से छोटा सा साहस मैंने भी किया है, पिता पर कुछ लिखने का प्रयास मैंने भी किया है। घने वृक्ष के समान पिता होते हैं, जिनके साये में परिवार पलते है , सूरज का होते है वो ऐसा प्रकाश गम के काले बादलों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *