Man me Bhed

मन मे भेद | Man per Kavita

मन मे भेद

( Man me bhed )

 

वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है
हर किसी का व्यक्तिगत संसार है
किंतु ,आपसी मन मुटाव
कर देता है बाधित कई सफलताओं को….

मन मुटाव भी स्वाभाविक है
हक है सभी को अपनी तरह से जीना
किंतु ,बात जब परिवार या समाज की हो
तब ,आपका मूल्य व्यक्तिगत नही रह जाता…

आज की आपकी स्थिति मे
कइयों का साथ और सहयोग रहा है
एक दो बातों से ही सब खत्म नहीं हो जाते
समझौता और कठोरता
सभी जरूरी हैं….

उम्मीदें लोगों से आपकी ही नही
आपसे भी लोगों को उम्मीदें हैं
मनमुटाव से हुए अलगाव पर
सुलगने लगती है राख मे चिंगारी…..

धुंआ सिर्फ धुंआ ही नही रह जाता
अंधेरा भी पसर जाता है वहां
और,आप दोनो ही देख नही पाते
अंधेरे के बाहर का दृश्य…

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

दरार | Daraar

Similar Posts

  • इतने शून्य उफ इतने शून्य

    इतने शून्य उफ इतने शून्य इतने शून्य उफ इतने शून्यये शून्य जीवनये जीवन का शून्यये आसमान शून्यये आसमानों में शून्यये रिश्ते शून्यये लहू में बहता शून्यइतने शून्य.. उफ इतने शून्यशून्य ही शून्यदुनिया का नही पता मगर मैं तो रह गया दंग.इतने शून्य उफ इतने शून्य.लड़ने को कहते सब मगर शून्य से कैसे करे कोई जंगदुनिया…

  • नव-वर्ष शुभ-कामना | Nav-Varsh Shubhkamna

    नव-वर्ष शुभ-कामना ( Nav-varsh shubhakaamana )   सारा जग  सुंदर स्वस्थ रहे,             सानंद  रहे  सकुशलता  हो।    स्नेह  प्रेम  ममता  का मधु ,             अपनेपन की आकुलता हो।।    निज देश जाति के बंधन में ,             आकर्षण  हो  परिवारों  सा।    कर्तव्य कर्म का क्षणक्षण हो,            स्वर्णिम मधुरिम उपहारों सा।।   करुणा…

  • करगिल जंग | Kargil Jung

    करगिल जंग! ( Kargil Jung )   युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे…

  • मन की डायरी | Kavita Man ki Diary

    मन की डायरी ( Man ki Diary ) मन की डायरी में लिखे है कुछ अनकहे अलफ़ाज़ जिन्हे पढ़ने के लिए जरूरत होगी तुमको रूह में उतरने की, हृदय समंदर में डूबकर अहसासों के सीप चुनने की, क्या तुम चुन पाओगे मेरे मन को पढ़ पाओगे !! डी के निवातिया यह भी पढ़ें:- हे, मनुज…

  • माई | Mai

    माई ( Mai )   आओ शिवानी, सुनो शिवानी  दर्द में डूबी मेरी कहानी तब, तड़प उठा था मेरा हृदय चारों ओर  धुंधल के छाए थे जब बेमौत मरी मेरी ममता को  हाथों में लोग उठाए थे कुएं से लाश निकाले थे  अग्निशमन दल के लोग वो निकले थे बेमौत मरी वह अबला थी कह…

  • तुझसे शर्माना और तुझसे मुस्कुराना

    तुझसे शर्माना और तुझसे मुस्कुराना कुछ मुस्कूराना चाहता हू हाँ तेरी बातो पर खुलकर हसना चाहता हू तेरी खिलखिलाते हुए चेहरे को देखकर मै मुस्कुराना चाहता हूं मै शर्माना चाहता हू तेरी मासूम चेहरे को देखकर तेरी मद‌होश भरी बातो पर तेरी शैतानी भरी हाथो के इधर उधर छुअन से शर्माकर अपने चेहरे पर हाथ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *