धुंये के कितने रंग

धुंआ | Dhuaan

धुंआ

( Dhuaan )

 

धुंये के कितने रंग…||

1.उठता है ऊपर आसमान, छूने का जनून होता है |
उसे देखकर लोगों मे, हलचल सा शुरूर होता है |
भीड जमा होती है, जाने कितने सबाल होते हैं |
धुंआ कहाँ से उठा है, पता कर के निहाल होते हैं |

धुंये के कितने रंग…||

2.किसी के दिल मे उठता है, किसी के घर मे उठता है |
किसी की याद मे उठता है, किसी की बात मे उठता है |
किसी की जात मे उठता है, किसी की राह मे उठता है |
किसी के जीवन मे उठता है, तो सरे-आम ही उठता है |

धुंये के कितने रंग…||

3.कोई किसी से जलता है, पता चलता है उठे धुंये से |
कोई चाहत मे जलता है, झलकता है यादों के धुंये से |
पानी-गरम-दूध चाय, तो कभी रसोई से धुंआ उठता है |
आग जलने से पहले और, बुझने के बाद धुंआ उठता है |

धुंये के कितने रंग…||

4.कभी खुशी मिलने से, आहूति देने मे उठता है धुंआ |
कभी मौत के गम मे, जलती चिता से उठता है धुंआ |
कभी बिन आग उठता है धुंआ, जिन्दगी बदल जाती है |
अगर बुराइयों का धुंआ उठे, तो दुनिया बदल जाती है |

धुंये के कितने रंग…||

कवि :  सुदीश भारतवासी

 

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