Poem in Hindi on Sharad Purnima

पुनीत पर्व शरद पूर्णिमा | Poem in Hindi on Sharad Purnima

पुनीत पर्व शरद पूर्णिमा

( Puneet parva sharad purnima ) 

 

ज्योत्स्ना मचल रही,अमिय वृष्टि करने को
षोडश कला सोम छवि,
अनूप कांतिमय श्रृंगार ।
स्नेहिल मोहक सौंदर्य,
अंतर सुरभिमय आगार ।
धरा रज रज भावविभोर,
तृषा तृप्ति कलश भरने को ।
ज्योत्स्ना मचल रही, अमिय वृष्टि करने को ।।

पटाक्षेप काम क्रोध द्वेष,
शीतलता सरित प्रवाह ।
परम बेला समुद्र मंथन,
मां लक्ष्मी अवतरण गवाह ।
कामनाएं अति उद्वेलित,
परिपूर्णता संग रमने को ।
ज्योत्स्ना मचल रही,अमिय वृष्टि करने को ।।

दिव्यता शीर्ष स्पर्शन,
कौमुदी व्रत साधना ।
श्री कृष्ण महारास काल,
फलीभूत संकल्प उपासना ।
सोम प्रभा परणय तत्पर,
मेह बन नेह झरने को ।
ज्योत्स्ना मचल रही,अमिय वृष्टि करने को ।।

कोजागरी रास पूनम,
अन्य शुभ संबोधन ।
कृपा सुख समृद्धि वैभव ,
दुःख कष्ट पीड़ा रोधन ।
चंद्र धरा समीपस्थ योग,
प्रीति पार उतरने को ।
ज्योत्स्ना मचल रही,अमिय वृष्टि करने को ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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