वैवाहिक वर्षगाँठ

26वीं वैवाहिक वर्षगाँठ

राजेन्द्र और स्वाति भाभीजी
को खूब- खूब “प्रदीप”की बधाई ।
पति पत्नी का बंधन प्रेम की फुलवारी है ।
राजेन्द्र और स्वाति भाभीजी का रिश्ता अटूट है ।
बारिश की कुछ बूँदें- बूंदे आसमान से उतर,
आती हैं जब धरती पर, बारिश की कुछ बूंदे,
एक आहट सी होने लगती हैं,
इंतजार में खड़ा हो जैसे कोई,
प्यार की लगती हैं ये दस्तक,
जब गुलाब अपनी मुस्कान लिए,
घर की बालकनी से निहार रहा हो
राजेन्द्र स्वाति भाभीजी को अपने।
सुख – दुख की दोनों चादर ओढ़े,
दोनों साथ – साथ जगते सोते ,
सफर के हर मोड़ पर हर पथ पर,
दोनों साथ – साथ हंसते रहते ,
आगे परिवर्तन का एक दौर आया,
दस्तक दी 3 नन्ही मुन्नी किलकारियों ने।
दोनों अपने जीवन में आगे बढ़े ।
एक बार राधा जी ने कृष्ण से पूछा ,
मीरा से आप का क्या रिश्ता है ?
कृष्ण जी ने कहा , मीरा है मेरी
दीवानी और तुम हो मेरी अर्धानगिनी !
एक बार राधा जी ने कृष्ण से पूछा ,
पति पत्नी का रिश्ता कैसा होना चाहिए ?
कृष्ण जी ने कहा , जैसे मंदिर का इबादत से ,
निष्ठा का पूजा से , चाहत का हसरत से !
प्रेम का व्यवहार ,स्नेह भरा दुलार
प्रेम व्यवहार से खुशियाँ आये द्वार
प्रेम हैं जहाँ दिलों से पूर्ण नफ़रत
मिटती हैं । छोड़ दो राग द्वेष
को क्यों बनाते हो उसे अपना
कैसे भी हिस्सा यह जग की रीत
हैं पराये व अपने प्रेम से जीत जाते है ।
प्रेम मिठास हैं जब दिलों से मिटे यह सारी
खटास तब होगा प्रेम आनन्द हैं सुख व शान्ति हैं
संजीवनी बुटी हैं । इन्ही शुभ भावों से राजेन्द्र स्वाति
भाभीजी को 26 वी सालगिरह की पुनः खूब- खूब बधाई ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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