वायदों का झांसा | दोहा

वायदों का झांसा

( Waydon ka jhansa )

 

वायदों का झांसा देते नेता जुमले बाज़!
जान चुकी जनता इन्हें पोल खुली है आज!!

देंगे सबको कहता था पंद्रह पंद्रह लाख!
सिंहासन पर बैठ गया चुरा रहा अब आंख!!

सत्ता में गुंडे -मवाली बैठे नेताओं संग!
भ्रष्ट्रचारी ही लड़ रहे भ्रष्ट्रचार की जंग!!

मंदिर -मस्जिद करता फिरे मुद्दा मिला न कोय!
मुद्दे की जो आई बात घड़ीयाली आंसू रोए!!

बेच बेच कर दे रहा तरक्की की सौगात!
देश गया कर्ज़ में डूब बिगड़ रहे हालात!!

सुनता है राजा नहीं जनता की चीत्कार!
महंगाई से चहुं दिशी मचा हुआ हाहाकार!!

रोजगार से वंचित युवा हो रहे कंगाल!
कमा कमा के काला धन नेता मालामाल!!

दस सालों में टूट गई अच्छे दिन की आस!
बेशर्मी से करता फिरे वादे वह पचास!!

 

 शायर: मोहम्मद मुमताज़ हसन
रिकाबगंज, टिकारी, गया
बिहार-824236

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