वसंत ऋतु

बसंत हाइकु | Basant par Haiku

बसंत हाइकु

( Basant Haiku ) 

 

१.
कोयल गायें,
सरसों लहलायें
बसंत आये !!

२.
सरसों छाये,
ओढ़े पीली चादर,
खेत मुस्काये !!

3.
बागों में शोर
लदने लगे जब,
आमों पे बौर !!

४.
नई डालियाँ,
बसंत ने खिलाई
नई कलियाँ !!

५.
बसंत कवी,
मीठी धूप सृजन
कराये रवि !!

DK Nivatiya

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

सुभाष चन्द्र बोस | Hindi Poem on Subhas Chandra Bose

Similar Posts

  • छू गई मन | Chhoo Gayi Man

    छू गई मन ( हाइकु )   छू गई मन, फ़िज़ाओ में बिखरी तेरी खुशबू !! आँखें है दंग, पढ़ी मन की चिट्ठी प्रीत के संग !! नेह धूप से, हर लेता है मीत, मन का शीत !! छोड़ के मौन, उड़ेगा ये पखेरू, ढूंढेगा कौन !! शीत का शोर, कुहासा ओढ़कर सूर्य है मौन…

  • गुरू | Guru

    गुरू ( Guru ) गुरू महान~ उनके चरणों में सारा जहान ● गुरू ही सार~ बिन गुरू लगता जग असार ● गुरू वंदन~ गुरू त्याग की मूर्ति गुरू चंदन ● गुरू ही आस्था~ प्रभु से मिलने का गुरू ही रास्ता ● गुरू प्रमाण~ जीवन सार तत्व गुरू ही प्राण ● निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह…

  • मकर संक्रांति ( हाइकु )

    मकर संक्रांति ( हाइकु )   १. संक्रांति पर्व गुड़ तिल चुड़ा का- महत्त्व बड़ा। २. उत्तरायण सूर्य की रश्मियों में- तेज बहुत। ३. दिखे आकाश पतंगबाजी कला- उड़ाएं बच्चे। ४. डुबकी लगे जलधि सरोवर- आलस्य मिटे। ५. दान ध्यान में दीन हीन की सेवा- रखें अग्रणी। ६. जीवन तणे सूरज सा चमके- आशीष यही।…

  • नववर्ष (हाइकु)

    नववर्ष (हाइकु) ******* १. सब अच्छा हो इस नववर्ष में- करें प्रार्थना । २. थका दिया है वर्ष बीस ने हमें- आस इक्कीस । ३. शांति समृद्धि जीवन में सबके- लाए इक्कीस । ४. शत्रु विनाशे जग शीष विराजे- अपना देश । ५. नया विहान नववर्ष का लाए- सुख सम्मान । ६. कालचक्र में जिन…

  • निर्मल जैन ‘नीर’ के हाइकु | Nirmal Jain ke Haiku

    विश्व जनसंख्या दिवस बदलो सोच~बढ़ती जनसंख्याधरा पे बोझ●रोज सताती~कल की चिंता हमेंखूब रूलाती●गम ही गम~घटते संसाधनआँखे है नम●बुरा प्रभाव~शिक्षा,स्वास्थ्य,खानाहुआ अभाव●भूल न जाओ~जनसंख्या अंकुशखुशियाँ पाओ● नशा सदैवध्यान रखनाधूम्रपान है निषेधकभी मतकरना●बातरखना यादतम्बाकू गुटखे सेजीवन होताबर्बाद●नशाबहुत बुराखाँसी, दमा, कैंसररहे जीवनअधूरा●नशामुक्त समाजहम सबने मिलकरलिया संकल्पआज योग दिवस योग की माया~पहला सुख होतानिरोगी काया•स्वच्छ हो मन~नियमित योगा सेस्वस्थ हो…

  • बाढ़ विभीषिका | Baadh Vibhishika

    बाढ़ विभीषिका ( Baadh Vibhishika ) नदी उफान~ बाढ़ की विभीषिका डूबे मकान ● मूसलाधार~ झुग्गी-झोपड़ियों का कहाँ आधार ● हुई है भूल~ ताश के पत्तों जैसा ढहता पुल ● जीवन त्रस्त~ अथाह जल राशि हौसले पस्त ● हे!कद्रदान~ नदी से नदी जोड़ो है समाधान ● ————— निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह भी पढ़ें :-…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *