सुभाष चन्द्र बोस | Hindi Poem on Subhas Chandra Bose

सुभाष चन्द्र बोस

( Subhas Chandra Bose ) 

 

अपने प्यारे नेता जी,थे सबके प्यारे नेता जी!
आजादी के नायक थे, बोस अपने नेता जी !!

जन-मन के सच्चे नायक, देशभक्त नेता जी,
भगवत गीता से थे प्रेरित, सर्व-प्रिय नेता जी !

चकमा देकर जेल से निकले ऐसे थे नेता जी,
अंग्रेजो के बाप निकले अपने प्यारे नेता जी !

आजादी का बीड़ा उठा घर से चले नेता जी,
आजाद हिन्द फ़ौज बनाकर चमके नेता जी !

गाँधी से मतभेद विचारो में रखते थे नेता जी,
पिता पुत्र सम रिश्ता फिर भी रखते नेता जी !

पर्वत जैसे सीना ताने आगे बढ़ते थे नेता जी,
निडर हो जान पर खेले ऐसे अपने नेता जी !!

 

DK Nivatiya

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

https://thesahitya.com/mere-ghar-ram-aaye-hai/

Similar Posts

  • प्रतिस्पर्धी | Pratispardhi

    प्रतिस्पर्धी ( Pratispardhi )   हार जीत तो जीवन का हिस्सा है यह जरूरी नही की धावक के हर कदम पर पदक ही धरा हो हार भी तो जीत के लिए ही किया गया प्रयास है जो सीखा देता है स्वयं की कमियों को जीत की दिशा मे बढ़ने के लिए सफलता मे यदि प्रसन्नता…

  • विधान | Kavita vidhan

    विधान ( Vidhan )   विधि का विधान है या नियति का खेल कोई डोर  हाथों  में उसके करतार करता सब होई   दुनिया का दस्तूर यही है जगत का विधान प्यारे बुराई का अंत बुरा भलाई दमकाती भाग्य सितारे   न्याय का विधान हमारा प्यारा है संविधान हमारा जनता को हर अधिकार दिलों में…

  • महॅंगी हुई तरकारी

    महॅंगी हुई तरकारी आज बेहद-महॅंगी हो गई है देशों में ये तरकारी,क्या बनाएं, क्या खाएं सोच रही घरों की नारी‌।छू रहा दाम आसमान इन तरकारियों का सारी,बढ़ रही है मुसीबतें आम आदमी और हमारी।। कभी सोचूं ये शिकायत करुं मैं किससे तुम्हारी,आलू-प्याज़ ख़रीदना भी आज हो रहा दुश्वारी।ग़रीब अमीर जिसे रोज़ खाते आज़ दे रहें…

  • सत्य राम कहॉं से लाऊँ?

    सत्य राम कहॉं से लाऊँ? दशानन रावण का अहम् हुंकार ,विजय से पराजय जाता है हार,पर यह तो त्रेतायुग की कहानी,कलयुग रावणों का ही है संसार । दुष्कर्म,विवाद,द्वेष,दम्भ,दिखावट,ढूँढती कहाँ हैं राम, कहाँ है केवट?छल-कलह,दगेबाज,कपटी-व्यापार,अन्याय,अत्याचार,अनादर, बनावट। प्रत्येक साल विजयादशमी है आती,नई ऊर्जा जन-जनार्दन में है भरती,नौ दिन आदिशक्ति देवी नवरात्र पर्व,रामलीला प्रदर्शन हर्षोल्लासित करती। प्रशंसा से…

  • देवा श्री गणेशा | Deva Shree Ganesha

    देवा श्री गणेशा ( Deva shree ganesha )    रिद्धि सिद्धि के दाता सब विध्नहर्ता, सब कार्यों में प्रथम पूज्य शुभारंभ कर्ता। देवा श्री गणेशा……. सबसे निराले और विलक्षण रूप धारी, शुभ और लाभ दाता हैं मंगल कारी। देवा श्री गणेशा…… इनकी पूजा बिना न कोई काम होवे, इनको है भाते मावा, लड्डू और खोवे।…

  • हृदय के गाँठ | Kavita hriday ke ganth

    हृदय के गाँठ ( Kavita hriday ke ganth )   1. हृदय के गाँठ खोल के,आओ बात बढाते है। परत दर परत गर्द है, आओ उसे उडाते है। ये दुनिया का है मेला,भीड मे सब अन्जाने से, पकड लो हाथ मेरा तो,दिल की बात बताते है।   2. खुद लज्जाहीन रहे जो, वो तेरी क्या…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *