बेवफाई | Bewafai

बेवफाई

( Bewafai ) 

 

वक्त के धागे कभी, कमजोर नहीं होते
तेरी यादों ने ही निभाई है, अपनी वफादारी

बातों में छलावा था ,दिल में थी मक्कारी
होठों की मुस्कान तेरी, महज थी एक अदाकारी

दिए तेरे जख्मों के दर्द को, पीता हूँ सुबह शाम
फरेब था तेरी चाहत में, मन में भरी थी गद्दारी

जाना था चले जाते, पता था हमें भी इस बात का
अनदेखा कर गए, यह भी एक चाल थी तुम्हारी

खेल नहीं होता,दिल से दिल के लगी प्रीत की
तेरे रोज रोज के बहनों में थी, झूठ की लाचारी

बेवफा के हुस्न पर, कभी यूं फिदा नहीं होते
ना होता कोई ईमान उनका, ना होती कोई दिलदारी

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

मेरी पूर्णता | Meri Purnata

Similar Posts

  • सब तुम जानती हो मां | Poem in Hindi on Maa

    सब तुम जानती हो मां ( Sab tum janti ho maa )    घड़ी की सुई यों के संग तुम भी भागती हो मां किसे कब क्या चाहिए यह सब तुम जानती हो मां प्रबंधन के लिए लाखों खर्च करते हैं लोग कितना बेहतरीन समय प्रबंधन जानती हो मां पापा के गुस्से को हंस कर…

  • आखिर क्यों | Aakhir Kyon

    आखिर क्यों ( Aakhir Kyon )    युगों से उठ रही थी आँधियाँ न जाने क्यूं ओले बरसै क्यूं तूफानों ने किया रुख मुझ पर, क्यूं, आखिर क्यों ? क्या ईश्वर को था मंजूर जो ले बैठा परीक्षा मेरी मैंने तो अपने मन-वचन से किया था सब वरण फिर मेरी साधना पर, प्रश्न चिन्ह आखिर…

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता | Kritrim Buddhimatta

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( Kritrim buddhimatta )  जानें कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ वर्तमान विज्ञान प्रगति प्रयास, मनुज दिव्यता प्रतिस्थापन । यंत्रवत परिवर्तन उपमा, तीव्रता शुद्धता कार्य संपादन । लघु काल लाभ आधिक्य, सकारात्मक प्रयोग मानव हितार्थ । जानें कृत्रिम बुद्धिमता का यथार्थ ।। जॉन मैकार्थी प्रतिपादक , उन्नीस सौ छप्पन अमेरिका । स्वदेश प्रणेता राज रेड्डी,…

  • रेशम धागा पहन कर

    रेशम धागा पहन कर पांच बहनो का भईया सजता धजता आज, रेशमी धागा पहन कर ,करता कितना नाज। बचपन की खुशबू भरी,बिखराए सरस धार, पावन सावन पूर्णिमा,नित रक्षा हो हर काज।।1। रिश्तों का बंधन पावन,छलकाता उर प्यार, कच्चे धागे में दिखता, खुशियॉ अपरम्पार। चावल रोली थाली रख, बहना है तैयार, भईया गेह खुशहाल हो,लगे उमर…

  • चाँद की व्यथा | Kavita Chand ki Vyatha

    चाँद की व्यथा ( Chand ki Vyatha ) चाँद सागर से कहता रहा रात भर, तुम मचलते रहो मैं तरसता रहूँ ।। तुम उफनते रहो अपनी लहरों के संग मैं तो खामोश तुम को तकता रहूँ l अपनी पलकों में तुमको छिपाये हुए, मैं यूँ ही उम्र भर बस पुलकता रहूँ ।। अपने दामन को…

  • ट्वीटर की धृष्टता

    ट्वीटर की धृष्टता ***** ट्वीटर वालों ने हमारे देश की आजादी, संप्रभुता, उदारता से खिलवाड़ किया है धृष्टता की है,मूर्खता की है इतना ही नहीं तकनीकी खामी बता- आरोपों से बचने की कोशिश की है। हमारी संप्रभुता से खिलवाड़ किया है, जम्मू एवं कश्मीर को- चीन में दिखाने का दुस्साहस किया है; लद्दाख को- जम्मू-कश्मीर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *