Meri Purnata

मेरी पूर्णता | Meri Purnata

मेरी पूर्णता

( Meri purnata )

 

यथार्थ के धरातल पर ही रहना
पसंद है मुझे
जो जमीन मेरी और मेरे लिए है
उससे अलग की चाहत नहीं रखता

क्यों रहूँ उस भीड़ के संग
जहां सब कुछ होते हुए भी
और भी पा लेने की भूख से सभी
त्रस्त हों

वहां कोई संतुष्ट हो ही नहीं रहा है
दिखावे में जीने से अच्छा है
वास्तविकता को ही स्वीकार कर लो
कम में भी खुश रहने से अधिक
कोई और पर्याय हो ही नहीं सकता

कर्म और कर्तव्य जरूरी है
स्वयं के प्रति भी और परिवार समाज के प्रति भी
देश और समस्त सृष्टि के प्रति भी
उससे अलग की इच्छा और प्रयास
इंसान को इंसान नहीं रहने देती

मुझसे किसी की उम्मीद टूटे
या मेरी किसी अन्य से टूटे
इससे बेहतर है मेरे प्रयास का हक ही
मुझे मिलता रहे
और मेरी पूर्णता भी इसी में है

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/prashn/

Similar Posts

  • पर्वत प्रदेश में पावस | Kavita

    पर्वत प्रदेश में पावस ( Parvat Pradesh Mein Pavas )   पावसी बूंदे पड़ते ही पर्वत झूमने है लगते.. पेड़  पौधे  फूल  सभी  मुस्कुराने  है लगते .. चट्टानों पर छा जाती है चाहुओर हरियाली मानो उपवन में कोई मोर नाचने है लगते।   रिमझिम बूंदें है गाती  भीगती है चोटियां… छनन छनन खलल खलल गाती…

  • शांति का संदेश देता है भारत | Bharat par kavita

    शांति का संदेश देता है भारत! ( Shanti ka sandesh deta hai bharat )   ज्ञान की शीतल हवा देता है भारत, मोहब्बत का पाठ पढ़ाता है भारत। दुनिया में मजहब हो सकते हैं कई, मोक्ष का रास्ता दिखाता है भारत।   कर्मो का नतीजा भगवान भी झेले, कर्मों का पाठ हमें पढ़ाता है भारत।…

  • प्रेम का नाता | Kavita Prem ka Nata

    प्रेम का नाता ( Prem ka Nata ) यह कैसा, प्रेम का नाता है? कितनी भी ,अनबन हो चाहे । यह पुनः ,लौट कर आता है। जितना बचना ,चाहें इससे । यह उतना, बढ़ता जाता है। हटाकर घृणा, को यह पुनः। अपना स्थान, बनाता है । सबकी चालों, को सहकर भी। यह हर क्षण ,…

  • सत्यमेव जयते

    सत्यमेव जयते     विजय   सत्य   की  होती है, आए कठिनाई कितनी भी।।   सत्य   ही   जीवन  का  सार शक्ति       इसकी     बेशुमार महिमा    इसकी    अपरंपार कुंद   पङे  ना  इसकी   धार लङ   के   हार   जाती   सब है  यहां   बुराई   जितनी भी। विजय    सत्य   की  होती है, आए  कठिनाई कितनी भी।। l   ‘राम’-‘कृष्ण’ का जीवन देखा…

  • बदले की आग | Badle ki Aag

    बदले की आग ( Badle ki aag )   बदले की आग बना देती है अंधा और को जलाने की खातिर हृदय में धधकती ज्वाला स्वयं के अस्तित्व को भी बदल देती है राख में वक्त पर क्रोधित होना भी जरूरी है किंतु समाधान के रास्ते भी कभी बंद नहीं होते विकल्प ढूंढना जरूरी है…

  • प्रवेशोत्सव कार्यक्रम सत्र 2024-25

    “प्रवेशोत्सव कार्यक्रम” सत्र 2024-25   अब कदम बढ़ने लगें,राजकीय विद्यालयों की ओर सहज सरस शिक्षण अधिगम, भौतिक सुविधा युक्त परिवेश । शिक्षा संग सुसंस्कार अनुपमा, नवाचार प्रविधि कक्षा समावेश । मोहक सोहक शैक्षिक गतिविधियां, हर प्रयास सकारात्मकता सराबोर । अब कदम बढ़ने लगें,राजकीय विद्यालयों की ओर ।। सुयोग्य कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकवृंद, विद्यार्थी गण जिज्ञासु संस्कारी ।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *