ढ़ाई आखर प्रेम के ( दोहे )

ढ़ाई आखर प्रेम के (दोहे)

ढ़ाई आखर प्रेम के ( दोहे )

( मंजूर के दोहे )

*****

१)

ढ़ाई आखर प्रेम के,पंडित दियो बनाय।
सद्भावना के पथ चले,जग को हिंद सुहाय।।

२)

ढ़ाई आखर प्रेम के,मित्रता दियो बढ़ाए।
शत्रुता मिटाकर शत्रु जन,करने सलाह आए।।

३)

ढ़ाई आखर प्रेम के, हैं उच्च शक्ति के पुंज।
तमस मिटा रौशन करें,हर ले जग के धुंध।।

४)

ढ़ाई आखर प्रेम के, करें कई चमत्कार।
दंभी दंभ त्याग करें,शुरू करें सहकार।।

५)

ढ़ाई आखर प्रेम के, मानवता को भाए।
सह-अस्तित्व की भावना,रत्नवती को सुहाय।।

 

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

यह भी पढ़ें :

नारी : एक स्याह पक्ष ! ( दोहे )

Similar Posts

  • काली मिर्च | Kavita Kali Mirch

    काली मिर्च  ( Kali Mirch )    काली है वह रूप से लेकिन है बहुत गुणकारी, प्रकृति की जो देन है पीड़ा हर लेती वो भारी। हर घर में मिल जाती है वो आसानी से हमारी, ज़ायका खाने में बड़ा देती दूर करती बीमारी‌।। दक्षिण भारत में ख़ासकर जिसकी खेती होती, उसके उत्पाद से जनता…

  • उम्मीद | Ummeed

    उम्मीद ( Ummeed )    उम्मीद आसरा है, सहारा है, बल है उम्मीद उत्तर है, रास्ता है, हल है उम्मीद ज़िगर है, करेजा है, दिल है उम्मीद मूल है, ब्याज है, हासिल है उम्मीद बंधन है, जुड़ाव है, लगाव है उम्मीद परीक्षा है, फल है, दबाव है उम्मीद मंजिल है, ख़्वाब है, कामना है उम्मीद…

  • बसंत ऋतु के आगमन पर | Basant Ritu par Kavita

    बसंत ऋतु के आगमन पर ( Basant ritu ke aagman par )   मदिर से है बसंत, आये हैं जी पाहुने से सखि पिया बिन मोहे, कछु न सुहावत है।। खखरा के पात उड़, उड़ आये द्वारे आज पवन के झौकन भी, जिया को जगावत है।। अमुआ के बौर वाली, वास है सुवास आली महुआ…

  • समय | Samay par Kavita

    समय ( Samay )    मूल्यवान है समय की कीमत  इसको    व्यर्थ   गवाओं   ना    समय  समय पर डोले धरती  समय  पर  सूरज  चांद  उगे   समय  समय  पर चले हवाएं   समय  पर   सुंदर  नाद  लगे,   कर सदुपयोग कर्म कर अपना पीछे      पैर     हटाओ    ना।   पेड़   समय  पर  फल  देता  है समय  …

  • मैं भारतीय हूं | Poem Main Bharatiya Hoon

    मैं भारतीय हूं ( Main Bharatiya Hoon )     मैं भारतीय हूं सभी धर्मों का सदा आदर करता हूं। संस्कृति उपासक हूं शुभ कर्मों से झोली भरता हूं।   शौर्य पराक्रम स्वाभिमानी रगों से गहरा नाता है। रणभूमि में जोहर दिखलाना शमशीरों से आता है।   अतिथि आदर करना पावन परिपाटी वतन की। उस…

  • करवा चौथ मनाऊ मै | Karva chauth par kavita

    करवा चौथ मनाऊ मै ( Karva chauth manaun main )   करवा चौथ मनाऊं मै करवे को सजाऊ मैं गणेश का पूजन कर दूर्वा उन्हें चढ़ाऊ मैं एड़ी में लगा आलता सिंदूर मांग सजाऊ मै पांव में बिछिया माथे बिंदी मेहंदी हाथ रचाऊ मै लाल चुनरिया ओढ़ के गीत खुशी के गाऊ मै धूप दीप…