Mridul Vani

मृदुल वाणी | Mridul Vani

मृदुल वाणी

( Mridul vani ) 

 

मृदुल वाणी मधुर वचन मन मोह लेते
बोल सदेव मीठी वाणी मन मोह लेते

मोर बोले मृदुल नाचे वन उपवन में
मोरनी का मन भावन वन उपवन में

मोर रंग रूप-स्वरूप सुंदर सुहाना सलोना
मानव प्राणी सुन तान पावन सुहाना सलोना

सुंदर स़ूरत मोहक मूर्त पग काले कलूटे
आंखों में बरबस आंसू टपके काले कलूटे

कोयल रंग काली बोल मिश्री घोल बोले
बना दे मन मतवाला मिश्री घोल बोले

‘कागा’ पपिहा प्रीत चोखी चकोर चांद चाहत
मृदुल वाणी मधुर बोल मन होती राह़त

कवि साहित्यकार: तरूण राय कागा

पूर्व विधायक

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/anusaran/

Similar Posts

  • वोट देना जरा संभाल के | Vote Dena

    वोट देना जरा संभाल के ( Vote dena jara sambhal ke )    नए-नए नेता ले टोली, धवल वेश और मीठी बोली। उमड़ पड़ा हुजुम यहां, बंद तिजोरी नेताजी खोली। वादे मधुर बड़े कमाल के, बदल देंगे ढंग हाल के। नेता फिर भी सशक्त चुने, वोट देना जरा संभाल के। वोट देना जरा संभाल के…

  • नाकाम | Kavita Nakaam

    नाकाम ( Nakaam ) दुनिया की उम्मीदों पर खरा ना उतर सका मैं। ज़िंदा रहते खुद को मरा ना समझ सका मैं। अपने कद का अंदाज़ा सदा रहा मुझे। अफसोस है कि खुद से बड़ा ना बन सका मैं। एक उनके लिए, और दूसरा अपने लिए ऐसे दोहरे चरित्र का प्रहसन ना पहन सका मैं।…

  • नंदवन के घर आनंद लाल

    नंदवन के घर आनंद लाल दयावान ही चक्रधारी है ,मुरलीवाला ही चमत्कारी है lराधा – कृष्ण – रुक्मणि है ,तरल लीला , कृष्ण लीला lसखी राधा तो सखा सुदामा l मुरली अगर सुरों की लीला ,तो मेघ सजे वर्षा की लीला lउँगली बनी गोवर्धन लीला ,कद्रू पुत्र यमुना कुंड लीला lआलम, मीरा, सुर में भी…

  • माँ से बना बचपन मेरा

    माँ से बना बचपन मेरा अजब निराला खेल बचपन का lदुनिया ने लिया पक्ष सक्षम का llबचपन ने लिया पक्ष माँ का lआज भी धुन माँ की लोरी की llसुनाओ , फिर से कहानी माँ की lमाँ से बना बचपन मेरा ll किसी ने पूँछा ” मुकद्दर ” क्या है ?मैं ने कहा मेरे पास…

  • अर्थ हीन | Arth-Heen

    अर्थ हीन ( Arth-Heen )    एक स्त्री के लिए अच्छा घर,अच्छा पति अच्छे बच्चे, सास ससुर और ,एक अच्छी खासी आमदनी भी तब,किसी काम की नही होती जब, उस पर लगा हो बंदिशों का पहरा किसी से भी बात न करने की मनाही उठती हुई शक की नजरों के साथ हर बात पर व्यंग…

  • दोहा सप्तक | जीवन इक कचहरी है,सबको मिलता न्याय

     जीवन इक कचहरी है,सबको मिलता न्याय ( Jeevan Ik Kachahari  Hai,Sabko Milata Nyaay )   जीवन इक कचहरी है,सबको मिलता न्याय। बिना मुकदमा केस का,समय सुनाये राय।   रखें मुखौटा बॉंधकर,घूमें मत बाजार। साफ सफाई से करें,कोरोना संहार।   नहीं सियासत में कभी,होता कोई मित्र। किन्तु शुभ संकेत नहीं,इसका रक्त चरित्र।   जीवन के कैनवास…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *