Holi Aayi re

होली आई रे | Holi Aayi re

होली आई रे 

( Holi Aayi re )

( 2 )

होली आई…..होली आई…होली आई रे
होली आई…..होली आई…होली आई रे
नीले पीले लाल गुलाबी रंगों का ये त्यौहार,
खुशियों उमंगों से भर देता है सबका संसार।
रंग बिरंगे रंगों में सबको डुबोने होली आई रे,
क्या बच्चे क्या बूढ़े सबकी बनाने टोली आई रे।

होली आई…..होली आई…होली आई रे ….1
रंग गुलाल से सराबोर तन मन को करेंगे,
ढोल नगाड़े की थाप में सब मिल थिरकेंगे।
गली गली में होली की हुडदंग अब मचेगी,
रंग बिरंगे रंगों से राधा गोरी की चोली सनेगी।

होली आई…..होली आई…होली आई रे ….2
मदमस्तों की टोली में खुशियां है छाई,
भेदभाव लड़ाई झगडे भूल जाओ भाई।
होली के रंग में खुद रंगों औरों को भी रंगा लो,
छोड़कर सारे दुख विषाद मस्ती में झूमो गा लो।

होली आई…..होली आई…होली आई रे ….3
ऊंच नीच अमीरी गरीबी सबको भुलाकर,
आओ सब होली मनाएं सबको गले मिलाकर।
होली के रंगों से रंग दो सभी को तुम प्यारे,
खुश होकर दुआ सच्ची देंगे तुमको बेचारे।
होली आई…..होली आई…होली आई रे ….4

राग द्वेष और भेदभाव की छोड़ो तुम बोली,
मिल जुलकर सतरंगी रंगों से खेलो होली।
इस होली दुश्मनी दूरियां सब तुम भूलाओ,
होली की बोली में चहुं ओर मिठास फैलाओ।।
होली आई…..होली आई…होली आई रे ….5

रचनाकार –मुकेश कुमार सोनकर “सोनकर जी”
रायपुर, ( छत्तीसगढ़ )

( 1 ) 

होली आई रे आई होली आई रे
संग संग खेलें राधा और कन्हाई रे
होली आई रे
होली आई रे होली आई रे
राधा और कन्हाई रे

पीले, लाल, हरे, गुलाबी
इक दूजे के सब बने जवाबी
भर भर मारें हैं पिचकारी
हंस हंस देय रहे हैं गारी
रंगन मे सब गये नहाई रे
होली आई रे आई होली आई रे
संग संग खेलें राधा और कन्हाई रे

होली है पुनीत पर्व प्रेम का
भाई संग खेल रहा भाई भैया भाभी खेल रहे हैं
खेले ननद संग भौजाई
चढ़ा दिलों में रंग प्रेम का
प्रेम की मारें सब बोली रे
आई रे होली आई रे
संग संग खेलें राधा और कन्हाई रे
होली आई रे

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

व्याकुलता | Vyakulta

Similar Posts

  • औरत | Aurat par kavita

    औरत ( Aurat )   कोई कह दे तेरा अस्तित्व नहीं मान ना लेना जहां थक कर हारते हैं सब वहीं शुरुआत करती है औरत जहां पूजती है दूजे को शक्ति रूपा पूजी जाती है औरत कहने को कह देते हैं अबला नव अंकुर को जन्म देती है औरत संघर्ष प्रकृति का नियम है संघर्षों…

  • ये मुल्क हमारी जान | Kavita Ye Mulk Hamari Jaan

    ये मुल्क हमारी जान ( Ye mulk hamari jaan )   एक दिन भी निभा नही सकेंगे हम जैसा किरदार पर आज वही लोग हम को मशवरे देते है हजार। उंगली पर लगी हुई स्याही केवल निशानी नही है हमारी शान व देश की पहचान, लोकतंत्र यही है। देश मना रहा गणतंत्र दिवस लोकतंत्र देता…

  • लहू से ये दुनिया कब तक नहाये | Lahoo se

    लहू से ये दुनिया कब तक नहाये ? ( Lahoo se ye duniya kab tak nahaye )   नज़्म    बारूद को मैं बुझाने चला हूँ, चराग़-ए-मोहब्बत जलाने चला हूँ। दुनिया है फानी, दो पल की साँसें, बिछा दी है लोगों ने लोगों की लाशें। रोती फिजा को हँसाने चला हूँ, चराग़-ए-मोहब्बत जलाने चला हूँ, बारूद…

  • अतुल्य भारत | Kavita Atulya Bharat

    अतुल्य भारत ( Atulya Bharat ) अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि सर्व धर्म समभाव छटा, स्नेह प्रेम भाईचारा अनंत । विविधता अंतर एकता, जीवन शैली संस्कार अत्यंत । खेती संग खुशहाली अथाह, परिश्रमी ओज सम रवि । अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि ।। दक्षिणी एशिया वृहत्तर राष्ट्र, पर्यटन क्षेत्र अति उत्तम । उत्तर शोभा दिव्य…

  • प्रभु दो ऐसा वरदान | Prabhu do Aisa Vardan

    प्रभु दो ऐसा वरदान ( Prabhu do aisa vardan )    प्रभु!ज्ञान प्रभा शोभित हिय, दो ऐसा वरदान मृदुल मधुर ह्रदय तरंग, स्वर श्रृंगार अनुपम । विमल वाणी ओज गायन, ज्योतिर्मय अन्तरतम । मानस सर नवरस लहर, गुंजित मधुमय गान । प्रभु!ज्ञान प्रभा शोभित हिय,दो ऐसा वरदान ।। दुर्बल छल बल मद माया, प्रसरित जग…

  • मनभावन है हिंदी | Manbhavan hai Hindi

    मनभावन है हिंदी ( Manbhavan hai Hindi )    हिंदी है हमारी शान स्वाभिमान अभिमान गागर में सागर का भाव ये जागती है। पावन है हिंदी मनभावन है हिंदी संस्कृत की बेटी ये अज्ञान हटाती है। धूमिल ना होय छबि नेकभाषा हिंदी मेरी हिंग्लिश चाल चले,रूप मिटाती है। शब्दों की खान है दिनकर सा भान…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *