याद आता है

याद आता है

याद आता है

 

सर्दी की गुनगुनी धूप में

वो तेरा पार्क में बैठ

तेरा अपनी आँखों से

मुझे अनिमेष तकना

और मेरा हाथ थामना

याद आता है……

 

तुम्हारा मेरी हथेलियों में

अपना हाथ थमा देना

अपनी उंगलियों को

मेरी उंगलियों में उलझा देना

और फ़िर धीरे धीरे

अपनी उंगलियों से

मेरी हथेली पर

गुदगुदाना

अपने नाखूनों से

मेरी उँगली पर गड़ाना

सच में इस शरद मौसम में

बहुत याद आता है………!!

 

?

कवि : सन्दीप चौबारा

( फतेहाबाद)

यह भी पढ़ें :

पढ़ पाऊँ

Similar Posts

  • पास उसके हमारा घर होता

    पास उसके हमारा घर होता     काश कुछ इस कदर बसर होता। पास उसके हमारा घर होता ।।   काटकर पेड़ उसने रोके कहा छांव मिलता जो इक शज़र होता।।   रतजगे मार डालेंगे अब मुझे, यार तुम पर भी कुछ असर होता।।    जीने मरने की तो फिकर ही कहां, जो भी होता…

  • उठो पार्थ | Kavita utho parth

    उठो पार्थ (  Utho parth )     उठो पार्थ प्रत्यंचा कसो महासमर में कूद पड़ो। सारथी केशव तुम्हारे तुम तो केवल युद्ध लड़ो।   धर्म युद्ध है धर्मराज युधिष्ठिर से यहां महारथी महाभारत बिगुल बजाओ उद्धत होकर हे रथी।   कर्ण भीष्म पितामह से महायोद्धा है सारे भारी। धनंजय धनुष बाण लेकर करो युद्ध…

  • स्वच्छता है जरूरी

    स्वच्छता है जरूरी ***** रखें ध्यान इसका विशेष, जन जन को दें यह संदेश। इसी से आती खुशहाली, दूर रहे संक्रमण बीमारी। जो स्वच्छ रहे परिवेश हमारा, तो स्वस्थ हो जाए जीवन प्यारा; गांधी जी का यही था नारा। सुन लो मेरे राज दुलारे, कह गए हैं बापू प्यारे। इधर उधर न कूड़ा डालो, बात…

  • परिवार सब टूट रहे हैं

    परिवार सब टूट रहे हैं संस्कार छूट रहे हैं कुटुंब परिवार सब टूट रहे हैं। संदेह के घेरे फूट रहे हैं अपने हमसे रूठ रहे हैं। घर-घर दांव पेंच चालों का दंगल दिखाई देता है। कलही कारखाना घर में अमंगल दिखाई देता है। संस्कारों की पतवार जब भी हाथों से छूट जाती है। परिवार की…

  • गुरु नानक देव | Guru Nanak dev ji poem in Hindi

    गुरु नानक देव ( Guru Nanak Dev )   सिख धर्म के संस्थापक प्यारे गुरु नानक देव हमारे। प्रकाश पर्व जयंती मनाये गुरु ज्ञान आलोकित तारे।   धर्म सुधारक समाज सुधारक योगी धर्मगुरु कहलाए। दार्शनिक गुण धर मन मानस देशभक्ति राह अपनाए।   वाहे गुरुजी का दरबार सजता गुरुद्वारे गूंजे कीर्तन कर। धर्म की रक्षा…

  • मौसम ने बदला मिजाज़ | Mausam ne Badla Mizaaj

    मौसम ने बदला मिजाज़ ( Mausam ne Badla Mizaaj )   मौसम ने बदला अपना मिज़ाज हमने भी बदला अपना अन्दाज़। ऋतु यह आई सर्दी ली अगडाई हम सबके मन को ये बहुत भाई।। निकाल लिऐ सब कम्बल, रजाई मौसम भी बदला अब सर्दी आई। गैस चूल्हा आज हमको ना भाऐ लकड़ी जलाकर ये खाना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *