नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) अष्टम दिवस

नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) अष्टम दिवस

भुवाल माता के सिवाय कोई न साथ ।
जंग यह जीवन का ले जीत
लगा ले सत्य धर्म से प्रीत
जीवन सिख ले जीना
आता भव सागर पार किनारा ।
जो पल बीत गया यहाँ रे
वह न लगे फिर हाथ
आवागमन लगा एकाकी
होता कोई न साथ ।
जो लाया खाया यहाँ रे
अब आगे की सोच
खाली हाथ गया तो होगा
पग – पग पर संकोच ।
अपने पर अपना रहे रे
अनुशासन भरपुर
पर अनुशासन की आशंका
खुद हो जाये दूर ।
अपने मन को मारना रे
बहुत कठिन है काम
इसके बिना मूल्य जीवन का
किन्तु न एक छदाम ।
भुवाल माता के सिवाय कोई न साथ ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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