उड़ान हौसलों की | Udaan Hauslon ki

उड़ान हौसलों की

( Udaan hauslon ki )

 

जरूरी नही की स्वयं पर उठे
हर सवालों का जवाब दिया ही जाय
जरूरी है की
उठे सवालों पर गौर किया जाए..

प्रश्न तो हैं बुलबुलों की तरह
हवा के मिलते ही
बिलबिला उठते हैं
सोचिए की
आपका बैठना किस महफिल मे है…

किसकी आंखों ने
देखा है कब खुद के चहरे को
देखा है किसने कब
किसी की आंखों मे छिपे खून और पानी को…

सागर से गई हुई बूंद भी
लौट आती है जमीन पर
तुम रखो कायम वजूद अपना
हवाएं तो मौसम के साथ बदलती हैं….

बदल जाते हैं जवाब सवालों के
बिन कहे ही
हौसलों की उड़ान मे
आकाश भी उतर आता है..

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

मुट्ठी भर आकाश | Mutthi bhar Aakash

Similar Posts

  • मकर संक्रांति (खिचड़ी)

    मकर संक्रांति (खिचड़ी) भगवान विष्णु ने असुरों पर विजय प्राप्त किया था,भगवान सूर्य इस दिन धनु से मकर में प्रवेश किया था।इस दिन पवित्र नदियों में लोग स्नान कर दान करते हैं,भागीरथी संग गंगा ने कपिल आश्रम में प्रवेश किया था।। प्रयाग में स्नान करने से पापों से छुटकारा मिलता हैं,गंगासागर में स्नान को महास्नान…

  • ऋषि पंचमी | Rishi Panchami

    ऋषि पंचमी ( Rishi Panchami )    आज का दिन माहेश्वरी का रक्षाबंधन कहलाता है, ऋषि पंचमी को ही हर माहेश्वरी राखी बंधवाता है, सजती है हमारी भी सुनी कलाई पर राखी आज राखी बांधने कभी बहन कभी भाई बंधवाने आता है। मायके में भी फिर से खुशी का माहौल छा जाता है, बेटी को…

  • पावन तीर्थ धाम लोहार्गल | Kavita

    पावन तीर्थ धाम लोहार्गल ( Paawan tirth dham lohargal )     सुरम्य वादियों बीच में बसा लोहार्गल तीर्थ धाम अरावली पर्वतमालाये बहता सूर्यकुंड अविराम   शेखावाटी का हरिद्वार जन मन जगाता है विश्वास श्रावण में सब कावड़ लाते शिव पूजे जाते खास   सूर्य मंदिर संग पुरातन पांचो पांडव मंदिर जहां अस्त्र-शस्त्र विसर्जित किये…

  • पं. दीनदयाल उपाध्याय | Pt. Deendayal Upadhyay

    पं. दीनदयाल उपाध्याय ( Pt. Deendayal Upadhyay )    वो महान विचारक राजनेता एवं समाज-सुधारक थें, भारतीय जनसंघ पार्टी बनानें में योगदान वे दिए थें। काॅलेज समय में राजनीति का निर्णय वो ले लिए थें, कई-उपलब्धियां कम समय में वे हासिल किए थें।। पं. दीनदयाल उपाध्याय था उस महापुरुष का नाम, कभी पत्रकार के रुप…

  • कलम तुम्हें मरने ना देंगे | Kalam Tumhe

    कलम तुम्हें मरने ना देंगे ( Kalam tumhe marne na denge )   जब तलक जिंदा है हम, कलम तुम्हें मरने ना देंगे। उजियारे से अंधकार में, कदम तुम्हें धरने ना देंगे। उठो लेखनी सच की राहें, सत्य का दर्पण दिखाओ। कलमकार वाणी साधक, सृजन का दीप जलाओ। चंद चांदी के सिक्कों में, हम धर्म…

  • मृत्यु का भोज | Mrityu bhoj par kavita

    मृत्यु का भोज ( Mrityu ka bhoj )    मानों बात आज नव युवक लोग, बन्द कर दो यह मृत्यु का भोज। चला रहें है इसको ये पुराने लोग, आज तुम सभी पढ़े-लिखे लोग।।   जीवित पिता  को एक रोटी नही, मृत्यु पर जिमाते आप लोग कई। अपना समय तुम सभी भूल गये, खिलाते थें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *