हमें आप से दिल लगाना पड़ेगा

हमें आप से दिल लगाना पड़ेगा

हमें आप से दिल लगाना पड़ेगा

( Hame Aap Se Dil Lagana Padega )

 

 

हमें आप से दिल लगाना पड़ेगा।
ज़माने से तुम को चुराना पड़ेगा।।

 

बहे जैसे खूं मेरी नस-नस में हरदम।
तेरा प्यार ऐसे बसाना पड़ेगा।।

 

सदा मेरे दिल की रहो बन के धङकन।
मेरी साँस बनके समाना पड़ेगा ।।

 

मेरी रूह तुम को पुकारा करेगी।
कहीं भी रहो तुम को आना पडेगा।।

 

न बेशक पढ़ो आज ग़ज़लों को मेरी।
किसी रोज सुन गुनगुनाना पड़ेगा।।

 

?

 

कवि व शायर: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

यह भी पढ़ें : 

तेरा नाम दिल से मिटाना पडेगा

 

Similar Posts

  • Hindi Poetry | नयन

    नयन ( Nayan )     नयनाभिराम नयना, ना नींद है ना चैना। बेकल नयन अधीर है, काटे न कटे रैना।   मन साँवरे में लीन है,उनसे नही ये कहना। आयेगे  तो पूछूँगी  मै, बितायी कहाँ रैना।   जहाँ प्रेम है विरह भी है,राधा जहाँ है कृष्णा। फिर क्यों तडप रहा है मन,सन्तुष्ट नही तृष्णा।…

  • मेरी सरगोशियाँ | Hindi poetry meri shargoshiyan

    मेरी सरगोशियाँ ( Meri shargoshiyan )   मैं मेरे मन के एहसास को संजोकर उसके प्रेम की अनुभूति को लिखने चला मेरे ख्यालों में मेरे ख्वाबों में वो आकर मेरे जज्बातों की अग्नि को प्रदीप्त कर दी आकर कानों कुछ सरगोशियां की कितने दीवाने हो तुम मेरे प्यार में ये तुम्हारा पागलपन है क्यों करते…

  • निद्रा

    निद्रा     शांत क्लांत सुखांत सी पुरजोर निद्रा। धरती हो या गगन हो हर ओर निद्रा।।   विरह निद्रा मिलन निद्रा सृष्टि निद्रा प्रलय निद्रा, गद्य निद्रा पद्य निद्रा पृथक निद्रा विलय निद्रा, आलसी को दिखती है चहुंओर निद्रा।।धरती०   सुख भी सोवे दुख भी सोवै सोना जग का सार है, सोना ही तो…

  • Hindi Kavita On Women -नारी

    नारी ( Nari Kavita )   नर से धीर है नारी … घर में दबी बेचारी , कभी बेटी कभी बहू बने , कभी सास बन खूब तने, एक ही जीवन कितने रूप , धन्य भाग्य तुम्हारी नर से धीर है नारी… कभी यह घर अपना , कभी वह घर अपना जिस घर जाए वहीं…

  • कुमार अहमदाबादी की रुबाइयाँ | Rubaiyat of Kumar Ahmadabadi

    आवाज़ सर्वोत्तम मीठी औ’ प्यारी आवाज़ममता में डूबी दीवानी आवाज़कर देती है तन मन को शांत सुखीमाँ की पीयूषी लोरी की आवाज़ आज थोडा सा मन को बहलाने दे आजसूखे पुष्पों को महकाने दे आजबरसों से जिन्हें छेड़ा नहीं है उनरिसते घावों को सहलाने दे आज सूरज गंगा सूरज गंगा चांद सितारे देखेनवरस से भरपूर…

  • चाहे काँटे मिले या कि फूल

    चाहे काँटे मिले या कि फूल   चाहे काँटे मिले या कि फूल मुस्कुरा के तू कर ले क़ुबूल   झूट को सच कहा ही नहीं अपने तो कुछ हैं ऐसे उसूल   हाल ऐसा हुआ हिज्र में जर्द आँखें है चेहरा मलूल   आस फूलों की है किसलिए बोये हैं आपने जब बबूल  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *