आचार्य श्री तुलसी का 111 वाँ जन्मदिवस ( अणुव्रत दिवस )

आचार्य श्री तुलसी का 111 वाँ जन्मदिवस ( अणुव्रत दिवस )

वि. सं. 1971 को कार्तिक शुक्ल द्वितीया आज के दिन 110 वर्ष पूर्व आचार्य श्री तुलसी का जन्म हुआ था । आचार्य श्री तुलसी को मेरा भावों से शत – शत वन्दन ! इस अवसर पर मेरे भाव –

जीवन उज्ज्वल कर ले
अज्ञान तिमिर मिटा ले
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।
खाली जीवन घट में
सदगुण के मोती भर ले ।
जिसको हम अपना मानते
वह नहीं है हमारा ।
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।
स्वर्णिम रवि उदित हुआ है
अंतर तम दूर हटायें
निर्मल ज्योति पाकर
सभी तरह का क्लेश मिटायें ।
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।
दिन चार यहां पे जीना
आखिर कब उठ जाये डेरा
यह अभी सुखद पल हैं
स्वयं को पावन कर ले ।
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।
बचते रहना हरदम
दुर्व्यसनों से हमको
मन की न पूर्ण होगी
दुःख का भरा खजाना ।
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।
जिन्दगी की राह हमारी
कष्टों से भरी पड़ी है
सत्पथ पर चलने से
हैं जीवन सुखदाई ।
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।
चलना सदा सजग बन
तृष्णा नदी तरी हैं
मृदु व्यवहार से ही
सबको अपना कर ले ।
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।
कम खाना गम खाना
सीखें पल – पल नमना
ये स्वर्ण सूत्र इनको
अपनाकर हैं चलना ।
गुरु तुलसी का स्मरण कर
प्रभु से ही लौ लगा ले ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • दर्द ए दास्तां | Hunkar ki dard -e- dastan

    दर्द – ए – दास्तां ( Dard -e- dastan )     1. दर्द – ए – दास्तां दर्द ए दास्तां लिख करके भी, दर्द बता ना पाया मैं। वो उलझा था अपने ग़म में, अपना कहाँ दिखाया मैं। दुनियादारी में उलझा वो, मेरा मन उलझा उसमे, बालसखा सी दर्द हमारी,दूर ना उससे जा पाया…

  • आई लव यू में | I Love you Mein

    आई लव यू में ( I Love you Mein ) प्रेम जप तप लगन , तन मन मुदित भाव । निहार अक्स आकर्षण, जीवन सौम्य शीतल छांव । शब्द अर्थ अभिव्यंजना , हृदय श्रोत मधुरता अथाह । आई लव यू में,अपनत्व का सरित प्रवाह।। अंतराल विलोप पथ, मैत्री चाहना परिवेश । हर पल आनंद जन्य,…

  • कर्मठ बनिए | Kavita Karmath Baniye

    कर्मठ बनिए ( Karmath Baniye ) निरन्तर लगाव का भाव रखना , हद और सरहद जमीन की होती है ।।1। भारतीय अंधेरे भी हैं मुट्ठी बांधे , हाथापाई की झड़प चीन की होती है ।।2। शब्द के प्रयोग से प्रभाव शून्य होता, सम्मान सदैव मनहर मौन की होती है।।3। हर युद्ध का पथप्रदर्शक धर्म रहा…

  • औरत | Aurat par kavita

    औरत ( Aurat )   कोई कह दे तेरा अस्तित्व नहीं मान ना लेना जहां थक कर हारते हैं सब वहीं शुरुआत करती है औरत जहां पूजती है दूजे को शक्ति रूपा पूजी जाती है औरत कहने को कह देते हैं अबला नव अंकुर को जन्म देती है औरत संघर्ष प्रकृति का नियम है संघर्षों…

  • जीवन के रंग

    आवा-गमन जो आया जग में अंत जाना है,जो जाया जग में अंत जाना है। प्रकृति की रचना प्रबल आवा-गमन अडिग,चौरासी लाख योनियों का उत्पन्न पतन अडिग। चार खानें चित्त अजर अमर कोई नहीं,सबके अंदर सांसें अता पता कोई नहीं। काम क्रोध लोभ मोह अहंकार पांच प्रमुख,भिन्न-भिन्न रंग रूप तीन ताप संताप सुख। दस इन्द्रियां सबका…

  • वाह भाई वाह | Wah Bhai Wah

    वाह भाई वाह ( Wah Bhai Wah )   बालपन से बनना चाहतें कवि-लेखक साहित्यकार, मन में थी उनके ऐसी आशा उसको किया साकार। तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से बनाएं पहचान, शैलेश लोढ़ा नाम है जिनका सपनें किया साकार।। ९ वर्ष की उम्र में जिन्होंने बाल-कवि उपनाम पाया, ये साहित्य की प्रेरणा इन्होंने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *