Geet Modi ki vaccine

नहीं लगाना चाह रहे वो मोदी की वैक्सीन | Geet

नहीं लगाना चाह रहे वो मोदी की वैक्सीन

( Nahin lagana chah rahe wo Modi ki vaccine )

 

“नहीं लगाना चाह रहे वो मोदी की वैक्सीन।
काश ! नहीं मानें वो इसमें अब अपनी तौहीन।
और लगा लें अब वे सारे मोदी की वैक्सीन।।”

सुन कर ये उदगार मित्र ने तुरत विरोध किया
कहा बात यह ठीक नहीं है जो अभिव्यक्त किया

कैसे कह सकते हैं मोदी ने ये दवा बनाई
पूना हैदराबाद कंपनी से ये बन कर आई

रूस चीन अमरीका यू के सबने जोर लगाया
कोरोना वैकसीन सभी ने अपने लिए बनाया

हाॅं यह सच है भारत की वैक्सीन जरा सस्ती है
इसीलिए यह भारत के लोगों को लग सकती है

मोदी ने खुद बार -बार था अपना इसे बताया
राहुल जी ने तब इसको मोदी वैक्सीन बताया

किन्तु गलत है कहना ये हैं मोदी की वैक्सीन।
पूना हैदराबाद की निर्मिति की न करो तौहीन।।

उसने कुछ वामी कांग्रेसी नेता नाम बताए
कहा पता है हमको ये सब हैं लगवा कर आये

सारी दुनिया कहे बनाई चीन ने ये बीमारी
उसने धरती भर में सब को फैलाई महामारी

दुखी न हो अब बाकी भी इसको लगवा ही लेंगे
नहीं दवा ये मोदी की है हम भारत की कहेंगे

बीमार पड़े बारह करोड़ सारे देशों में इससे
और मर चुके लाखो सारे देशों के इस मिस से

कोशिश की है सब सरकारों ने रक्षा करने की
भारत ने भी कुछ कोशिश की है गढ्ढा भरने की

समझा – वे कांग्रेसी हैं पर सच को छिपा रहे हैं।
पर हैं भीतर तक राहुल के जैसे ही गमगीन।।

जबउनके भीतर का असलीतत्व समझ मेंआया
तब समझाने वाले ने उनको ऐसे समझाया-

वह कोरोना नहीं और ही बीमारी है भाई
सात दशक से रही फली फूली बनकर दुखदाई

जब आजादी मिली देश की सत्ता पर जा बैठी
किसी दवा से नहीं मिटी वह रही सदा ही ऍंठी

सन चौदह में मोदी ने उसकी वैकसीन बनाई
आधे से ज्यादा भारत में थी वह गई लगाई

चमत्कारसा असर सभीने उस वैक्सीन का देखा
छै वर्षों में बदल चुका है भारत का सब लेखा

छिटके खड़े हुए भारत से आज पाक और चीन।
अब भारत दुनिया में है ऊॅंचे पद पर आसीन।।

नहीं जीनियस कोई जहाॅं में मोदी जैसा भाई
वह क्षमता किस वैज्ञानिक ने इस दुनिया में पाई

उसके निज एकान्त ह्रदय में इक प्रयोग शाला है
शोध किया हर बीमारी पर, पता लगा डाला है

कभी गुफा केदार की जाकर नया ज्ञान लाता है
और कोई नुस्खा सौ वर्षी माॅं से पूछ आता है

बनी दवा वह मोदी में अब भी काफी संचित है
पर भारत आबादी का कुछ भाग अभी वंचित है

कुछ ने दवा जहर होने की खबरें तक फैलाईं
कितनों ने ना लगवाने की माॅं की कसमें खाईं

अगर कहीं सब लगवा लेते मोदी की वैक्सीन।
रहते स्वस्थ और वे चेहरे रहते नहीं मलीन।।

 

?

Manohar Chube

कवि : मनोहर चौबे “आकाश”

19 / A पावन भूमि ,
शक्ति नगर , जबलपुर .
482 001

( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

होली ने आकर कर डाला | Ghazal

Similar Posts

  • प्रेम की भाषा हिंदी | Prem ki Bhasha

    प्रेम की भाषा हिंदी ( Prem ki Bhasha ) ज़बानो के जमघट मेंएक ज़बान है नायाबहमारी ज़बान”हिंदी”जिसमें एक लफ्ज़ केहोते हैं कई मुतादरीफ़। एक “मोहब्बत व ईश्क”कोप्यार कहो या प्रेमसुर कहो या रश्कममता कहो या प्रीतिसंस्कृति कहो रीति रिवाजनाज कहो या लाज…. यह हिन्दी हैमाथे की बिंदी है। मनजीत सिंहसहायक प्राध्यापक उर्दूकुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र…

  • पुज्य पितर | Kavita pujya pitar

    पुज्य पितर ( Pujya pitar )   हे पूज्य पितर देव हमारे कृपा दृष्टि बरसा देना फुलवारी पूर्वज आपकी वरदानों से हरसा देना तुम बसे हो यादों में चित में नित्य समाए हो जीवन की प्रचंड धूप में आशीषों के साए हो तुम बगिया को महकाये हो   हे देव पितृलोक में रह जीवन में…

  • म्हारो गांव अलबेलो | Marwadi poem

    म्हारो गांव अलबेलो ( Mharo gaon albelo )   ठंडी ठंडी भाळ चालै चालो म्हारा खेत म काकड़िया मतीरा खास्यां बैठ बालू रेत म   पगडंडी उबड़ खाबड़ थोड़ा सा मत हालज्यो गांव री गुवाड़ घूमो म्हारा चोपालां म चालज्यो   अलबेला है लोग अठै सगळो मस्तानो काम मस्ती में सगळा झूमै नाचै खेजड़ली री…

  • पद्मजा | Padmaja

    पद्मजा ( Padmaja )   पद्मजा श्री चरणों में, स्वर्णिम प्रज्ञा भोर घट पट नवल धवल, मृदुल मधुर विचार प्रवाह । स्नेहिल व्यवहार तरंगिनी, सकारात्मकता ओज अथाह । स्वच्छ स्वस्थ अंतर काय, कदम चाल मंगलता ओर । पद्मजा श्री चरणों में, स्वर्णिम प्रज्ञा भोर ।। जीवन पथ प्रति क्षण , अनुभूत अनंत अनुराग । दिग्दर्शन…

  • दीपक वोहरा की कविताएं | Deepak Vohra Poetry

    कविता में वो कविता मेंकविता ढूंढ़ रहे हैंमैं मनुष्यता वो कविता मेंभाषा देख रहे हैंमैं तमीज़ वो कविता मेंशिल्प शैली छान रहे हैंमैं पक्षधरता छंद, रस, बिंब ,सौन्दर्य, लयन जाने क्या क्या कसौटी परवो परख रहे हैं कविता और मैं न बाज़ीगर हूं कविता कान ही तथाकथित बड़ा साहित्यकारबस मनुष्यता का पक्षधर हाथ वो हाथजो…

  • जय श्रीराम | Jai Shri Ram par Kavita

    जय श्रीराम ( Jai Shri Ram )  ( 1 )    सदियों से श्रापित भूमि का, आज हुआ उद्धार। मन्दिर का निर्माण हुआ जहाँ,राम ने लिया अवतार। धन धन भाग्य हमारे नयना, तृप्त हो गये आज, अवधपुरी मे सज रहा फिर से,भव्य राम दरबार। पुलकित है हर हिन्दू का मन, छलकत नयन हमार। बाँधन चाहत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *