उसका जलवा कमाल है अब भी

उसका जलवा कमाल है अब भी

उसका जलवा कमाल है अब भी

उसका जलवा कमाल है अब भी
वो नही तो मलाल है अब भी

देख उसको यही सदा कहते ।
जान तुझ पर निहाल है अब भी

वो जो उसने कभी नही पूछा
लब पे वो ही सवाल है अब भी

सुर्खी जितनी लगा रही लब पर
सुर्ख उतने तो गाल है अब भी

रूख पे बेशक नकाब हो उसके
हाथ रखता रुमाल है अब भी

तूने देखा नही अभी उसको
लाखो में बेमिसाल है अब भी

मत बुला तू प्रखर सनम अपना
आ गई तो बवाल है अब भी

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • कितना है प्यार | Kitna Hai Pyar

    कितना है प्यार ( Kitana Hai Pyar ) कितना है प्यार याद दिलाने की देर हैयानी कि दूर यार से जाने की देर है इक राज़ को तमाशा बनाने में कितनी देरअपने से दूसरे को बताने की देर है इतना तुनक-मिज़ाज हूँ कमरा भी हर तरफ़बिखरा हुआ मिलेगा सजाने की देर है अर्ज़ो-समा का हो…

  • हमेशा इश्क में

    हमेशा इश्क में हमेशा इश्क में ऊँची उठी दीवार होती हैनज़र मंज़िल पे रखना भी बड़ी दुश्वार होती है सभी उम्मीद रखते हैं कटेगी ज़ीस्त ख़ुशियों सेनहीं राहत मयस्सर इश्क़ में हर बार होती है । बढ़े जाते हैं तूफानों में भी दरियादिली से वोदिलों को खेने वाली प्रीत ही पतवार होती है नहीं रख…

  • मिलके दीवाली मनायेंगे | Diwali ke Upar Shayari

    मिलके दीवाली मनायेंगे ( Milke diwali manayenge )    उसे घर आज अपने ही बुलायेंगे उसे ही खीर उल्फ़त की खिलायेंगे बढ़ेगा प्यार दीवाली से हर दिल में सभी के साथ में दीपक जलायेंगे मिटेंगे सब अंधेरे नफ़रतों के ही मुहब्बत के यहाँ दीप झिलमिलायेंगे ढलेंगे दिन वतन से ही गमों के सब ख़ुशी हर…

  • मैं खूबसूरत नहीं | Ghazal Main Khubsurat Nahi

    मैं खूबसूरत नहीं  ( Main Khubsurat Nahi )   कोई मुझे पसंद करे इतना मैं खूबसूरत नहीं ! देखता यहां कोई ज़माने में भली मूरत नहीं ! गोरी घनी सूरत के सब कायल रहे होते सदा, मेरी ज़माने को यहां, कोई जरुरत ही नहीं ! होते वो किस्मत के धनी जिन्हे मिले कोई परी, कोई…

  • ग़ज़ल खंडहर | Khandhar

    खंडहर (Khandhar )    वक्त के साथ मशीनों के पुर्जे घिस जाते है जाने कितने एहसासों में इंसान पिस जाते है। ज़िन्दगी का शिकार कुछ होते है इस कदर उबर कर भी कितने मिट्टी में मिल जाते है। शामोसहर बेफिक्री नहीं सबके नसीब में जीने का सामान जुटाने में ही मिट जाते है। ताकीद करता…

  • वो सपनों में आकर सताने लगे हैं

    वो सपनों में आकर सताने लगे हैं वो सपनों में आकर सताने लगे हैंमेरी धड़कनों को बढ़ाने लगे हैं बनाया था तिनकों से जो आशियानाअदू आके उसको जलाने लगे हैं क़यामत कहीं आ न जाए यहाँ परसितमगर को हम याद आने लगे हैं ज़माने ने ठोकर लगाई है उनकोतभी होश उनके ठिकाने लगे हैं कहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *