काहे के नववर्ष ? ( भोजपुरी भाषा में )

मिलता कैसे सहारा नये साल में

मिलता कैसे सहारा नये साल में

मिलता कैसे सहारा नये साल में
कर रहे सब किनारा नये साल में

चमके किस्मत का तारा नये साल में
कर दो कुछ तो इशारा नये साल में

भर गया दिल हमारा उमंगों से अब
देखा ऐसा नजारा नये साल में

कोई तरकीब ऐसी लगा लीजिये
हो सुकूँ से गुज़ारा नये साल में

याद होगें तुम्हें दिन मुलाकात के
कैसे अब तक पुकारा नये साल में

आसमां ने चमन ओस से भर दिया
प्यार शायद उतारा नये साल में

माँ से अपनी किनारा मैं कैसे करूँ
जिसका हूँ मैं दुलारा नये साल में

उससे जीवन हमारा है आनंद मय
प्रीत नदिया की धारा नये साल में

किस कदर ये प्रखर आज बेताब है
कोई आये हमारा नये साल में

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • उदासियाँ | Udasiyan

    उदासियाँ ( Udasiyan ) बैठी हैं हर क़दम पे डगर पर उदासियाँकैसे हो अब गुज़र, मेरे दर पर उदासियाँ मायूस होके लौटे जो उनकी गली से हमछाईं हमारे क़ल्ब-ओ-जिगर पर उदासियाँ क्या हाल आपसे कहें क़हर-ए-खिज़ां का हमसूखी है डाल-डाल शजर पर उदासियाँ दिखता नहीं लबों पे तबस्सुम किसी के अबछाई हुई हैं सबकी नज़र…

  • हमने देखा है | Humne Dekha Hai

    हमने देखा है मुस्कुराते गुलाब की मानिंद।हर ख़ुशी है शराब की मानिंद। हमने देखा है ग़ौर से इसको।ज़िन्दगी है ह़बाब की मानिंद। धुन है गर आसमान छूने की।बनिए ज़िद्दी उ़क़ाब की मानिंद। कैसे ढालूं मैं हाय रे ख़ुद को।चश्मे-जानां के ख़्वाब की मानिंद। कोई सानी ही जब नहीं उनका।किसको लिक्खूं जनाब की मानिंद। मिल न…

  • ज़रूरत है | Ghazal Zaroorat Hai

    ज़रूरत है ( Zaroorat Hai ) जो रूठे हैं फ़क़त उनको मनाने की ज़रूरत है मिटाकर दूरियों को पास जाने की ज़रूरत है उदासी ही उदासी है हमारे दिल की बस्ती में कोई धुन प्यार की छेड़ो तराने की ज़रूरत है गुज़ारी ज़िंदगी तन्हा किसी की याद में हम ने मगर इस दौर में हमको…

  • कृष्ण कन्हाई | Krishna Ghazal

    कृष्ण कन्हाई ( Krishna Kanhai )    किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई तिरी राधिका भी चली दौड़ी आई नहीं और कुछ देखने की तमन्ना तुम्हारी जो मूरत है मन में समाई हुई राधिका सी मैं भी बाबरी अब कथा भागवत माँ ने जब से सुनाई रहे भक्त तेरी शरण में सदा जो भंवर से…

  • हर लम्हा है हसीन | Ghazal Har Lamha

    मेरी ग़ज़ल ( Meri Ghazal ) मिलती सभी से मेरी ग़ज़ल दिलकशी के साथ शीरीं ज़ुबां है उसकी बड़ी चासनी के साथ हम जीते ज़िंदगी को हैं दरियादिली के साथ हर लम्हा है हसीन फ़क़त मैकशी के साथ बातें करेंगे वस्ल की और इंतिज़ार की इक़रार-ए-इश्क़ की सदा संजीदगी के साथ बीती सुख़नवरी में ही…

  • तीर बरसाता है पर नायक नहीं है

    तीर बरसाता है पर नायक नहीं है तीर बरसाता है पर नायक नहीं हैशायरी करता है संहारक नहीं है अनकहे अध्याय इंसा क्या पढ़ेगाज़िंदगी जीता है संचालक नहीं है वेदना ही वेदना है शायरी मेंवृक्ष यह भी कोई फलदायक नहीं है वो जो दौलत के लिए रिश्ते ही छोड़ेआदमी तो है मगर लायक़ नहीं है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *