ऐ सर्द हवा

ऐ सर्द हवा

ऐ सर्द हवा

ऐ सर्द हवा का झोंका,अब तो,शांत हो जा,
तू भी कहीं जाकर और आराम से सो जा।।

जग को क्यों इतना परेशान कर रहा है,
काहे जग के लिए तू शैतान बन रहा है।।

बूढ़े, बच्चे सब तो परेशान हो गए हैं,
बताओ, आप किसकी सुध में खो गए हैं।।

पेड़ पौधे भी तो अब कांपने लगे हैं,
परेशान सा इधर-उधर झांकने लगे हैं।।

जब तू मानव के शरीर को स्पर्श करते हो,
जोर की सांस ले,ऐसे क्यों,आहे भरते हो।।

तूने तो सूर्य देव को भी जकड़ रक्खा है,
लगता है सारे देवों को पकड़ रक्खा है।।

सूर्य की रोशनी भी तो तुमसे डर गई है,
किरण भी डर की वजह से छुप गई है।।

इतना पाला,इतना कोहरा क्यों करते हो,
काहे को तुम मानव में दुःख भरते हो।।

फूलों की रौनक चली गई है पाले से,
गरीबों को हटा रखे हो तुम निवाले से।।

सर्द देखकर कार्य बंद कर दिया है,
ऐ सर्द हवा तूने यह क्या कर दिया है।।

सब ठिठुर कर बैठ गए हैं आग के किनारे,
सारा जग हो गया है बस आग के सहारे।।

मुरझाए हुए लोग कैसे लग रहे हैं,
आप जनता को ऐसे काहे ठग रहे हैं।।

आज छुटकी जल गई है आग से,
क्योंकि वो अभी खेल रही थी साग से।।

आज कलुआ आग के किनारे बैठा था,
अपनी ही धुन में वो ऐसे ऐंठा था।।

उसने आग में शकरकंद डाल रखा था,
अपने सर में उसने बड़े बाल रखा था।।

झुकने ही वह आज गंजा हो गया,
क्योंकि उसका बाल जल गया।।

फुलवा का बेटा द्वार खेल रहा था,
वो लाल-लाल आग को देख रहा था।।

बच्चा आग की तरफ धीरे से चलने लगा,
धीरे-धीरे वो अपनी दिशा बदलने लगा।।

यह देखकर फुलवा गगरी छोड़कर भागी,
आवाज़ सुनकर फुलवा की ननद जागी।।

फुलवा का पैर फिसल गया पत्ते की ओस से,
गिरते गिरते वो बची देर में आई वो बेहोश से।।

रामधनी काका खेत की रखवाली करने जाते हैं,
बताओ काहे आप भले आदमी को सताते हैं।।

छोड़ दो अपना रास्ता किरण को भी आने दो,
बहू भी घूंघट खोले और थोड़ा उसे शर्माने दो।।

नई नवेली बहुओं का जीना हराम कर दिया है,
तूने क्यों चारों तरफ कोहरा ही कोहरा कर दिया है।।

पशु-पक्षी भी अब तो तुमसे तंग हो गए हैं,
तेरे दृश्य देखकर सभी दंग तो हो गए हैं।।

ऐ सर्द हवा शांत होकर रास्ता दिखा दे,
सूर्य देव को भी पथ का ज्ञान करा दे।।

मन भी अब ऊब गया है सबका ठंड से,
पर तू नहीं ऊबा क्या अपने पाखंड से।।

तेरे गुरुर भी तोड़ने वाला आ रहा है,
परेशान हो, अब काहे को पछता रहा है।।

खिलेगी कलियां मौसम सुहावन होगा,
मकरंद चूसेंगे भौंरे मन भावन होगा।।

प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी
गोंडा,उत्तर प्रदेश

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