एहसास
भाभी जी, आप पिंकी को कैसे बर्दाश्त कर रही हो? पिंकी में मुझे बिल्कुल भी मैनर्स नजर नहीं आते। पूरे दिन अपने कमरे में ही पड़ी रहती है। हमसे बात करना बिल्कुल पसंद नहीं करती। इससे तो यह भी नहीं होता कि मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके आई हूँ तो मेरे पास बैठ जाए या मम्मी के पास बैठ जाए।
एक दूसरे का सुख-दुख बांटने की भी इसे फुर्सत नहीं है। बस साफ-सफाई करने और खाना बनाने आ जाती है और उसके बाद वापस अपने कमरे में चली जाती है और वहां पड़े-पड़े न जाने किस-किस से बातें करती रहती है? हमसे बोलना तो बिल्कुल भी पसंद नहीं करती। खाना तक परोसकर नहीं देती।
शायद इसको हमारा यहां आना बोझ लग रहा है। इसकी हरकतों से तो मुझे लग रहा है कि मेरी और इसकी तो बिल्कुल नहीं बनेगी। मैं तो यहाँ तभी आया करूंगी जब आप यहाँ मौजूद होंगी।” संध्या के मायके से वापस आने के बाद उसकी ननद नीतू ने अपने छोटे भाई अतुल की पत्नी पिंकी (जिसकी शादी मात्र 6 माह पहले ही हुई थी) की बुराईयां करते हुए कहा।
संध्या एक सरकारी अध्यापिका है। उसके पति दिवाकर की 10 साल पहले एक दुर्घटना में असामयिक मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद सन्ध्या ने शादी न करने का फैसला किया। सन्ध्या का ज्यादातर समय ससुराल में ही बीतता है। साल में एक बार ही सन्ध्या एक-दो दिन के लिए अपने मायके जाती हैं।
स्कूल के और घर के सभी कामों की जिम्मेदारी का निर्वहन बखूबी वे निभा रही है। पति की मौत के बाद सभी ने सन्ध्या से यही कहा था कि अपने देवर अतुल से शादी कर लो लेकिन उन्होंने अतुल से शादी करने को स्पष्ट मना कर दिया और कह दिया कि वे देवर को अपने बेटे के तौर पर देखती हैं।
अतुल उनसे दस वर्ष छोटा है। वह उनको शुरू से ही भाभी माँ कहता आया है। वे माँ बेटे के पवित्र रिश्ते को कलंकित नहीं कर सकती। अगर सन्ध्या चाहती तो कहीं और शादी करके अपना घर बसा सकती थी और उस घर से निकल सकती थी।
उन्हें यह सब करना उचित न लगा। संध्या के दोनों बच्चे भी बड़े हो लिए थे। वे हर जगह अपने पति दिवाकर को महसूस करती थी। उन्हें ऐसा लगता था कि जैसे वे उसके आसपास ही हैं।
दिवाकर और सन्ध्या को जो भी देखता तो कहता कि कितनी खूबसूरत जोड़ी है। एक दूसरे के लिए ही ये दोनों बनें है। एक दूसरे का दोनों बहुत ध्यान रखते थे और एक दूसरे को मान सम्मान देते थे।
जमाने की नज़र उनके रिश्ते को खा गई। शादी के 5 साल बाद एक दिन एक सड़क दुर्घटना में दिवाकर की मृत्यु हो गई। अपने पति की मृत्यु के बाद सन्ध्या ने शादी न करने और उनकी यादों के सहारे जिंदगी काट देने का निर्णय लिया।
अपने देवर अतुल की शादी उन्होंने ही पिंकी से करवाई थी। पिंकी एक गरीब घर की समझदार लड़की थी। संध्या का कहना मानते हुए शुरू-शुरू में उसने सास- ससुर, ननद-ननदोई आदि का बहुत ध्यान रखा, लेकिन अपनी ननद नीतू और सास का अपने प्रति गंदा व्यवहार देखकर, पिंकी उनसे बचने लगी थी।
वे दोनों पिंकी के हर काम में कोई ना कोई कमी निकालते, उसको तरह-तरह से ताने देते, उसको टॉर्चर करते। बोलते कि इसकी माँ ने इसे कुछ सिखाकर नहीं भेजा है। गुस्से में एक दो बार पिंकी ने अपनी सास को जवाब भी दे दिया था लेकिन संध्या ने उसको समझाया, बड़ो से जबानजोरी करने को मना किया।
सन्ध्या ने चोरी छिपे नोटिस किया कि सास व ननद दोनों पिंकी को परेशान करने का कोई मौका न छोड़ती थी और पिंकी के हर काम की तुलना सन्ध्या(स्वयं) के काम से करती, भले ही पिंकी का काम बेस्ट हो।
पिंकी सन्ध्या के पीछे खाने के लिए उनसे बार-बार पूछती रहती लेकिन वे कहती कि अभी भूख नहीं है। अभी नाश्ता किया है। बाद में खाएंगे। बार-बार पूछने से दुखी हो होकर… एक ही जवाब मिलने से पिंकी ने पूछना बंद कर दिया। वह सबके लिए खाना बना कर चली जाती और बोलकर जाती कि जिसका जब भी खाने का मन हो… खाना लेकर खा लेना। उसने बना कर रख दिया है।
नीतू शादीशुदा थी। उसके भी दो बड़े-बड़े बच्चे थे। नीतू के अंदर एक गन्दी आदत थी कि वह हमेशा अपने ससुराल पक्ष की बुराई करती रहती थी। उसे कभी किसी की अच्छाई, अच्छी आदत या बातें नजर नहीं आती थी।
वह बिल्कुल अपनी माँ पर गई थी। माँ बेटी की एक ही आदत थी कि अपने और अपने परिवार के लिए उनके मापदंड/नियम अलग थे और दूसरों के लिए अलग। दूसरे की बहू/बेटी को वो गुलाम बना कर रखना चाहती थी। हर छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें परेशान करती थी। ये भी न देखती थी कि उसकी तबियत ठीक नहीं है।
शादी के कई सालों तक माँ बेटी ने संध्या के साथ भी यही किया था। बाद में नीतू की शादी हो गई थी। अब सन्ध्या पिंकी के साथ भी यही होता देख रही थीं। जब भी नीतू के बच्चों या उसके पति मनीष की छुट्टियां होती थी तो नीतू घर पर रुकना पसन्द न करके मायके जाना या बाहर घूमना पसंद करती थी।
छुट्टियों में ज्यादातर समय उनका मायके में ही बीतता था। संध्या के यहां खाने पीने की कोई कमी नहीं थी। वे भरपेट खूब खाते-पीते थे, खूब मजे लेते थे। बैठे-बैठे बिस्तर तोड़ना और सिर्फ खाना उनका काम था।
इस बार भी यही हुआ। गर्मियों की छुट्टियां चल रही थी। संध्या ने घर जाने के लिए अपना रेलवे रिजर्वेशन करवा रखा था। उसे मायके गए हुए 1 साल से ज्यादा समय हो गया था। सन्ध्या के मायके जाते ही अचानक नीतू अपने दोनों बच्चों के साथ मायके आ गई और अपनी भाभी संध्या को न पाकर वह मायूस हो गई। उसने संध्या से फोन पर शिकायत करते हुए कहा-
“भाभी जी, आप मायके मत जाया करो। हम तो यहां आपसे ही मिलने आते हैं। एक आप ही हो, जिससे मुझे इतना लगाव है, प्यार है। मेरा तो मन कर रहा है कि मैं यहां ना रुककर सीधे आपके पास, आपके मायके ही आ जाऊं।” तब संध्या ने नीतू को समझाते हुए कहा-
“दीदी जिस तरह आपका अपने मायके जाने का और मुझसे मिलने का मन करता है… ठीक इसी तरह मेरा भी अपनी माँ और भाभी से मिलने का मन होता है। आपको तो पता है कि मैं अपने मायके 1 साल के बाद आई हूँ। घर के कामकाज, बच्चों और नौकरी के चक्कर में अब जाकर मायके आने का मौका मिला है।
मैं चार दिन यहाँ सुकून के साथ रहना चाहती हूँ। चार दिन बाद मैं आ ही रही हूँ। मम्मी ने बताया था कि आप तो अभी लगभग 15 दिन घर पर रहोगे ही। मैं जल्द आकर आपसे मिलती हूँ। मैंनें पिंकी को समझा दिया है। वह आप लोगों का अच्छे से ध्यान रखेगी। आपको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।” संध्या ने मायके से ही नीतू दीदी को आश्वासन दिया।
संध्या जानती थी कि नीतू को मायके में भरपूर खाने-पीने घूमने को मिलता है। खाना बनाने के नाम से उसकी जान निकलती है। छुट्टियों में काम करना उसे पसन्द नहीं, इसलिए वह मायके आ जाती है ताकि बैठे-बिठाए भाभी जी उसको तरह तरह के पकवान बनाकर खिलाती रहें और उनकी मौज आती रहे।
सन्ध्या जानती थी कि नीतू की नजर उसकी दौलत पर है। उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत है तभी नीतू इतना प्यार लुटाती है। सन्ध्या को वह दिन भी याद थे जब उसकी जॉब नहीं लगी थी तब उनका व्यवहार कितना गन्दा था।
नौकरी लगने के बाद, पैसा आने के बाद उनके व्यवहार में गजब परिवर्तन आया था। नीतू को जो भी चीज, सामान मायके में सन्ध्या का पसंद आता वह उस पर अपना कब्जा जमा लेती और अपने साथ मायके ले जाती।
नीतू कहती- “भाभी जी, आपकी पसन्द बहुत अच्छी है। मेरा तो आपकी इस वस्तु/सामान पर दिल आ गया है। मैं वापसी में इसको अपने साथ लेकर जाऊंगी। आप और ले लेना।” चाहकर भी सन्ध्या मना न कर पाती।
नीतू घर वापसी में काफी सारी चीजें/सामान समेटकर अपने मायके ले जाती और ससुराल पक्ष वालों को सीना चौड़ा करके दिखाती। मायके में नीतू संध्या से आए दिन होटल पर खाना खाने की फरमाइश करती।
घर का खाना उसे पसंद नहीं आता था। वह बाहर रेस्टोरेंट में खाना और घर मंगवाकर फास्ट फूड खाना पसंद करती थी। संध्या जानती थी कि सब रिश्ते दौलत से ही होते हैं।
गरीब के यहाँ कोई आना जाना पसंद नहीं करता क्योंकि सबको पता होता है कि वे अच्छा खिला-पिला नही सकते। मजबूरन सन्ध्या हर रिश्ता निभा रही थी और खुश रहने की कोशिश करती थी।
अतुल की पत्नी पिंकी गृहणी थी, कामकाजी नहीं थी। अतुल प्राइवेट कंपनी में काम करता है। पिंकी बहुत सोच समझकर खर्च करने वाली थी। इसके उलट नीतू मायके में पिकनिक मनाने ही आती थी।
उसे पता था कि सन्ध्या भाभी उसका एक रुपया उठने नही देती, सब खर्च खुद करती हैं। सन्ध्या की अनुपस्थिति में नीतू को बाहर का खाना खाने को नहीं मिल रहा था इसलिए वह पिंकी के खाने में रोज कमियां ही निकालती रहती थी।
संध्या के मायके में रहते हुए नीतू कम से कम हर रोज पांच बार कॉल करती और पिंकी की हर गतिविधि के बारे में बताती और उसकी बुराई करती। संध्या के सास भी पिंकी को पसंद नहीं करती थी।
वह भी पिंकी की बुराई करने से बाज नहीं आती थी। पिंकी और संध्या की बॉन्डिंग बहुत अच्छी थी। पिंकी सन्ध्या की हर बात मानती थी। पिंकी भी सन्ध्या को रोज नीतू दीदी और अपनी सास की हर एक बात बताती-
“दीदी, आज मैंने नीतू दी और सासू मां के लिए यह किया…वह किया… ससुर साहब को खाना बनाकर खुद पहुंचा दिया… वगैरह-वगैरह। वह यह भी बताती कि नीतू दीदी और सासू माँ ने उसके खाने में कमियां निकालते हुए गंदे गंदे कमेंट किए। उसके मम्मी पापा की बुराई की। इसलिए उसने उनके पास बैठने की बजाय अपने कमरे में रहना पसंद किया।”
पिंकी संध्या से लगभग 12 वर्ष छोटी थी। संध्या पिंकी को एक छोटे बच्चे की तरह समझाकर कहती-
“बेटा, आप नीतू दीदी या अपनी सास को जवाब मत देना। बस खामोश रहकर अपना काम अच्छी तरह से खामोशी से करती रहना। बस दो-चार दिन की बात है। मैं वहां जल्द ही आ जाऊंगी और आकर के उन लोगों से बात करूंगी।
नीतू दीदी 15 दिन के लिए आई हुई हैं। 15 दिन के बाद वे अपने घर चली जायेंगी। इसलिए उनसे कोई ऐसी वैसी बात मत बोल देना जो उनको बुरी लगे। मैं खुद आकर उनसे बात करूंगी। मेरा और नीतू दीदी का दोस्ती वाला रिश्ता है। मैं उनको अपने हिसाब से समझा दूंगी।”
पिंकी खामोश हो गई। अपना सभी काम ईमानदारी से संध्या के पीछे वह कर रही थी। अब जबकि संध्या मायके से वापस आई तो आते ही नीतू दीदी ने संध्या से पिंकी की शिकायतों की झड़ी लगा दी।
माँ-बेटी (नीतू और अपनी सास) के व्यवहार को संध्या अच्छी तरह से जानती थी। पिंकी की शादी होकर आने से पहले सास ने भी उसको परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर वह अपने कमरे में ही पड़ी रहती थी। किसी काम में भी संध्या का सहयोग नहीं करती थी जबकि घर के सारा खर्चे और जरूरतों को सन्ध्या ही पूरी करती थी। बाहर जाने के नाम पर सन्ध्या की सास बिल्कुल ठीक महसूस करती, बन ठनकर जाती और हर चीज खाती।
यह तो संध्या ही जानती थी कि किस तरह उन्होंने परिवार व बच्चों को संभाला, सारी जिम्मेदारी निभाते हुए नौकरी भी की। अब जबकि अतुल की शादी हो गई है तो उन्होंने संध्या को छोड़कर पिंकी को अपना टारगेट बना रखा था। आज सन्ध्या ने मन ही मन सोच लिया था कि वह नीतू और सास की गन्दी आदत, व्यवहार का विरोध करेगी।
संध्या ने नीतू की बात का जवाब देते हुए कहा-
“नीतू दीदी, आपको और मम्मी को हमेशा पिंकी में कमियां ही क्यों नजर आती हैं? आप लोग उसको अपना क्यों नहीं पा रहे हो? वह अभी इस घर में नई-नई है। उसको आए हुए मात्र 6 महीने ही हुए हैं। वह अपनी तरफ से अपना बेस्ट देने की हर संभव कोशिश कर रही है।
वह हर वह काम कर रही है जो आपको अच्छा लगे। मैंने भी उसको आपके अनुसार काम करने को कहा है। मेरे पीछे पिंकी आप दोनों से कई घंटे पहले सुबह उठ जाती थी, घर का सारा काम जैसे- झाड़ू-पोछा, कपड़े धोना वगैरह कर देती थी आपको बैठे-बिठाए चाय नाश्ता करवा देती थी।
सबके लिए खाना तैयार करके रख देती थी। उस बेचारी से आप लोगों को और क्या चाहिए? अगर वह खाना परोसकर दे और आपसे खाने के लिए कहे तो आप बोलते हो कि अभी भूख नहीं है, बाद में खा लेंगे। और जब बाद में वह अपने रूम में आराम करने चली जाये तो आप लोगों से यह भी सहन नहीं होता।
आप उसको आराम भी नहीं करने देते। उसको किसी न किसी बहाने से आवाज लगाते रहते हो.. बुलाते रहते हो.. क्या आप लोगों से इतना भी नहीं होता कि आप खुद भूख लगने पर अपना खाना लेकर खा सकें? नीतू, आप तो ऐसी नहीं थी। आप तो मेरे सामने मेरे कामों में भी सहयोग करती थी, चाय भी बना लेती थी।
मेरी तरह पिंकी भी आपकी भाभी है। मेरे पीछे पिंकी ने अकेले ही घर के सब काम किये। क्या आप दोनों में से किसी ने उसका काम में हाथ बँटाया। बोलो, जवाब दो। आप लोगों ने सिर्फ बैठे-बैठे आर्डर दिया और पिंकी ने आपके हर आदेश का पालन किया। यह बहुत गलत बात है।
बेचारी झाड़ू पोछे, कपड़े धोने से लेकर खाने-पीने के सारे काम चुपचाप ईमानदारी से कर रही है और आपसे मदद करवाने के लिए कोई शिकायत तक नहीं कर रही और आप उसके खाने तक में कमियां निकाल रहे हैं। उस पर तरह-तरह के तंज मार रहे हैं। उसके मायके तक की बुराई कर रहे हैं।
उससे दो प्यार के बोल तक नहीं बोल रहे। इसके उलट, आप पिंकी से उम्मीद कर रहे हो कि वह आपके पास आए, बैठकर बातें करें, सुख-दुख शेयर करे। जब आप एक इंसान का दिल इतना ज्यादा दुखाओगे, उसको इतना ज्यादा परेशान कर दोगे कि वह आपसे बात करने से कतराने लगेगा तो भला… वह आपके पास बैठेगा कैसे? पिंकी को भी प्यार की जरूरत है।
उसको भी अपनापन चाहिए। वह अपनापन ना मम्मी से उसे मिल रहा है और ना ही आपसे। आपको और मम्मी को अपने व्यवहार में बदलाव लाने की बहुत जरूरत है। जब तक आप खुद में बदलाव नहीं लेकर आओगे तब तक स्थिति नहीं सुधरेगी।
मैंनें ही पिंकी से कहा था कि अगर मम्मी दीदी कमेंट करें तो पलटकर जवाब न दे, चुप रहना और उसने वही किया, मेरा कहना माना। आपको समझना चाहिए कि उसकी भी अपनी जिंदगी है। उसे भी सुकून के पल चाहिए होते हैं। अगर वह अपने कमरे में जाकर आराम करती है तो क्या गलत करती है?
उसको हर छोटे-बड़े काम के लिए आवाज लगाना.. यहाँ तक कि अपने बच्चों के लिए दूध देने तक के लिए आवाज लगाकर उठाना.. कितना सही है? कई कई बार चाय बनाने के लिए उसको पुकारना, दुनिया भर की चीज बनवाने के लिए उसको कहना क्या यह सही है? मुझे नहीं लगता, यह ठीक है।
अब जबकि उसने आप लोगों की सारी बातें मानी हैं, हर कहना माना है और हर चीज बना कर आपको खिलाई हो। ऐसे में उसकी शिकायत करना सही है? मैं होती तो घर का परिदृश्य अलग होता।
मैंने हमेशा यही सोचा कि मेरे दिवाकर की बहन नीतू कुछ दिनों के लिए मेरे घर आई है तो क्यों न मैं इनका अच्छे से ख्याल रखूं? यही सोचकर मैंने आज तक आपका हर तरह से ध्यान रखा। पिंकी अभी बच्ची है। उसको इस परिवार में ढलने में अभी समय लगेगा। मेरे सामने तो आप कभी ऐसा नहीं करती। नीतू आपसे मुझे ऐसा कहना तो नहीं चाहिए, लेकिन अब मुझे बोलना पड़ेगा।”
आगे बोलते हुए सन्ध्या ने कहा-
“आपके सास ससुर की आये दिन मेरे पास कॉल आती रहती हैं। मुझे आपके परिवार का सब पता चलता रहता है। आप अपनी ससुराल में अपने सास ससुर के साथ बहुत गंदा व्यवहार रखती हो, उनका बिल्कुल ध्यान नहीं रखती। सिर्फ अपने बच्चों और पति का ही ध्यान रखती हो।
खाना केवल उतना बनाती हो जो आप चारों द्वारा खाया जा सके। सास ससुर तक को खाना बनाकर नहीं देती। बेचारे कितने परेशान रहते हैं। उनको अपनी दूसरी बहू मतलब आपकी देवरानी के पास जाकर ही खाने को मिलता है। आप तो अपने सास ससुर को तरह-तरह की जली-कटी बातें तक सुना देती हो, उन्हें उल्टा सीधा तक बोल देती हैं। बेचारे जवाब तक नहीं देते।
इसके बावजूद वे आपके बच्चों का कितना ध्यान रखते हैं? आपके सास ससुर तो बहुत अच्छे हैं लेकिन मेरे सास ससुर सिर्फ हुकुम चलाना जानते हैं। किसी तरह का… सहयोग तक करना उनको पसंद नहीं। मेरे सास ससुर अगर आपके जैसे होते तो क्या कहने थे?
नीतू, कभी सोचा है कि आप भी तो अपनी सास के पास बैठना पसंद नहीं करती, क्यों? क्यों छुट्टियों में ससुराल में न रहकर मायके जाना पसंद करती हो? क्यों घर से भाग जाना आपको अच्छा लगता है? क्यों उनके साथ समय नहीं बिताते, घर का माहौल ठीक क्यों न करते? जवाब दो।
कोई आपकी देवरानी की तारीफ करें तो आपको जलन होती है। उसकी तारीफ आपसे झिलती नहीं है। आखिर आपकी देवरानी की तारीफ क्यों ना हो? सास-ससुर का आपके द्वारा ध्यान न रखने पर, वही तो उनकी सेवा कर रही हैं, उनके खानपान का ध्यान रख रही है, एक बहू का हर दायित्व अच्छे से निभा रही है।
नीतू, इस तरह के दोहरे मापदंड ठीक नहीं है। जो व्यवहार आप अपने मां-बाप के प्रति नहीं चाहती, वह अपने सास ससुर के साथ कैसे कर सकती हो? जबकि यहां पिंकी की कोई गलती भी नहीं है। वह हर तरह से अपने सास ससुर का पूरा ध्यान रख रही है। खाने पीने से लेकर दवाई, इलाज तक का ध्यान रख रही है।
बताओ, क्या मैं कुछ गलत बोल रही हूँ? जो बात अब आप मुझसे कर रही हो… जो शिकायत आप पिंकी की मुझसे कर रही हो… वह सब बातें अभी आप पिंकी से कहना। चोरी छिपे मुझे कोई काम पसन्द नहीं है। मैं पिंकी को बुला रही हूँ क्योंकि मैं दुखी हो चुकी हूँ।
आपसे और माता जी से बुराई करने के अलावा और कुछ नहीं आता। चीजों को सुलझाने की बजाय, और ज्यादा बिगाड़ने पर आपका फोकस होता है। मैंने जब भी देखा तो आपको अपने ससुराल पक्ष की बुराई करते हुए देखा है। जबकि मुझे आपके सास ससुर से हर बात का पता चलता रहता है।
कल को जब आप सास बनोगी, बहू रोटी न देगी, आपके बेटे के साथ अलग घर बसाकर रहेगी तब आपको एहसास होगा कि आपने क्या किया है? लेकिन तब तक देर हो चुकी होगी। मैं यह भी जानती हूँ कि हमेशा गलत आप ही होती हो। मनीष भी आपको समझाने की कोशिश नहीं करता।
इसके बावजूद मैं आपसे कुछ नहीं कहती ताकि हमारे संबंध मधुर बने रहे। आपसे अपने घर की समस्या हल नहीं हो रही है और आप हमारे घर के मामलों में दखलंदाजी करने लगी हो। अब मैं पिंकी को बुला रही हूँ क्योंकि आपको सबसे ज्यादा शिकायत पिंकी से है। पिंकी की गलती है तो उस गलती सुधारने का काम भी तो पिंकी को ही करना है ना कि मुझे।”
यह कहकर संध्या ने जैसे ही पिंकी को आवाज देनी चाही, नीतू ने संध्या को रोक दिया और कहा-
“भाभी जी, आप पिंकी को मत बुलाइये। हाँ, मुझे एहसास है कि यहाँ मेरी और मम्मी की गलती है। काश आप इस तरह मुझे बहुत पहले ही समझा चुकी होती।” यह कहकर नीतू खामोश हो गई। सन्ध्या की बातें बहुत गहराई तक नीतू के अंदर घर कर गयी थी। नीतू को एहसास हो गया था कि छुट्टियों में घर पर न रुककर, घर से भागकर, सास ससुर का ध्यान न रखकर, उनकी बेकद्री करके वह गलती कर रही थी।
उसने मन ही मन सोच लिया था कि अब आगे से वह परिवार के संबंध मधुर बनाने के लिए, मिलजुलकर साथ रहने के लिए, परिवार का माहौल अच्छा बनाने के लिए सास ससुर का ध्यान रखेगी, उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत को पूरा करेगी और उनके पास बैठकर उनके सुख-दुख के भागीदार बनेगी, आखिर कल को वह भी सास बनेगी, उसकी बहू ऐसी निकली तब क्या होगा? और सबसे जरूरी बात… लोगों में अब बुराई ना देखकर सिर्फ सकारात्मक पक्ष को ही देखेंगी और उनका अनुसरण करेगी। नीतू की आँखे खुल चुकी थी।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा
यह भी पढ़ें :-







