मेले में सीखा सबक

मेले में सीखा सबक

आज रोहन ने फिर से अपने पिता राजेश से मेले में जाने की जिद्द की। वह कई दिनों से मेले की बात कर रहा था।

राजेश ने कहा, “मेले में बहुत भीड़ होती है, मेरे साथ… मेरे पास, मेरा हाथ पकड़कर रहना।”

रोहन ने आश्वासन दिया, “पापा, मैं आपका हाथ पकड़कर रहूंगा। मैं आपको नहीं छोड़ूंगा।”

राजेश ने मुस्कराकर कहा, “ठीक है, चलो मेले में चलते हैं।”

रोहन की खुशी का ठिकाना नहीं था। वह अपने पिता के साथ मेले की ओर चल दिया।

मेले में जाते ही, रोहन की नजर रंग-बिरंगी चीज़ों और खिलौनों पर पड़ी। उनको देखकर वह इतना खुश हो गया कि उसको होश भी न रहा… कि उसने कब पिता का हाथ छोड़ दिया और उन चीज़ों को देखने लगा। राजेश ने रोहन को कई बार पुकारा, लेकिन उसने नहीं सुना। वह इतना मगन था कि अपने आसपास कुछ नहीं देख रहा था।

वह आगे बढ़ता चला गया और मेले में खो गया। राजेश ने उसे हर जगह ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। राजेश दुःखी मन से रोहन का नाम पुकारते हुए मेले में घूमता रहा। रोहन की अनुपस्थिति ने राजेश को चिंतित कर दिया।

“मैंने रोहन को कहा था कि मेरा हाथ पकड़कर रहना, लेकिन उसने नहीं माना। अब मैं क्या करूं? मैं उसके बिना घर कैसे जाऊं?” राजेश के मन में यही विचार चल रहे थे।

“मैं उसकी मां को कैसे मुँह दिखाऊंगा? मैं क्या कहूंगा कि मैं उसका ध्यान नहीं रख सका?” राजेश की आंखों में आंसू आ गए।

मेले में बेटे के खोने पर राजेश की दशा बहुत ही दुःखद और चिंतनीय थी। उसके मन में रोहन की सुरक्षा को लेकर चिंता और डर बैठ गया। उसके मन मे सवाल चलने लगे कि उसका बेटा कहाँ होगा? किस हाल में होगा? और क्या वह सुरक्षित होगा?

उसके अंदर भावनात्मक उथल-पुथल चल रही थी मानो कि डर, चिंता, गुस्सा, और दुःख बढ़ते ही जा रहे थे। वह अपने बेटे को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास करता है। बेटा न मिलने पर वह खुद को ही दोष देता है कि वह अपने बेटे की देखभाल में असफल रहा।

अगर वह थोड़ा अधिक सावधान रहता तो यह नहीं होता। राजेश के मन में आशा-निराशा के भाव चलते रहते हैं। आशा इस बात की कि उसका बेटा जल्द ही मिल जाएगा।

लेकिन निराशा इस बात की कि बहुत कोशिश के बाद भी वह अपने बेटे को ढूंढ़ नहीं पा रहा था, उसका बेटा मिल नहीं पा रहा था। वह शारीरिक और मानसिक रूप से थकान महसूस करने लगता है। तभी अचानक उसे अपने बेटे रोहन की पासपोर्ट साइज फोटो का ध्यान आता है जोकि उसकी जेब में रखी हुई थी।

अब वह अपने बेटे की पासपोर्ट साइज की तस्वीर दिखाकर उसके बारे में लोगों से पूछता है। अपने बेटे की सलामती व सुरक्षा के लिए बार-बार भगवान से प्रार्थना करता हैं।

मेले में लोग राजेश की मनोस्थिति को समझते हैं और सहानुभूति दिखाते हैं। वे उसकी सहायता करते हैं और उसके बेटे को ढूंढने में मदद करते हैं। लेकिन सब लोग मिलकर भी पूरे मेले में रोहन को ढूंढ नहीं पाते हैं।

थक हारकर राजेश रात को काफी देरी से परेशान, दुःखी हालत में आँखों में आंसू लेकर घर पहुँचता है। दूर से ही घर पर रोहन को माँ के साथ खेलता देखकर राजेश खुद को रोक नहीं पाता और भागकर रोहन के पास पहुँचता है और उसको कसकर गले लगा लेता है। वह काफी देर तक उसको अपनी बाहों में जकड़े रहता है। उसकी आंखों से खुशी के आँसू लगातार बहने लगते हैं।

रोहन की मम्मी सोनिया ने कहा-

“रोहन को मेले में हमारे पड़ोसी कमल जी मिल गए थे। वे रोहन को मेले में तुम्हारे लिए परेशान देखकर, इसको रोता देखकर अपने साथ घर ले आये थे। आपने घर आने में इतनी देर कैसे लगा दी?

आपने ही तो रोहन को शिक्षा दी थी कि अगर बिछड़ जाओ तो किसी तरह घर पहुँचने की कोशिश करना क्योंकि मेला बहुत बड़ा है, वहाँ खो जाने के बाद ढूंढना सम्भव नहीं है।

वही इसने किया। मैंने इसको डाँट भी लगाते हुए कहा भी था कि तुम्हारे पिता तुम्हारे लिए बहुत चिंतित होंगे और तुम्हें मेले में ढूंढ रहे होंगे। उनके पास तो फोन भी नहीं है। अब उन तक कैसे सूचना पहुँचेगी कि तुम सही सलामत हो और घर पर हो? बस यह मुँह झुकाये सुनता रहा।

हम दोनों के पास सिवाय राजेश का इंतजार करने के कोई और चारा न था क्योंकि मेला काफी बड़ा था, बहुत दूर तक फैला हुआ था। हम आपको ढूंढने किसको भेजते?”

पिता ने रोहन से शिकायत करते हुए कहा, “बेटा, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। मेले में तुम्हारा हाथ, मेरे हाथ में रहना चाहिए था। लेकिन तुम मेले की चकाचोंध में मेरा हाथ छुड़ाकर आगे चले गए।

यह गलत है। तुम्हें मेरी हालत का अंदाजा नहीं है। पूरे मेले में तुम्हें ढूँढने में कितनी दिक्कत हुई, इसकी कल्पना तुम कर ही नहीं सकते। मेरे मन में तुमको लेकर बहुत गन्दे गन्दे विचार आ रहे थे, मैं बहुत डर गया था। अब आइन्दा ऐसा मत करना। मैं तुम्हारे बिन नहीं जी सकता।”

रोहन ने पिता से माफी मांगी और कहा, “पापा, मैं अगली बार आपका हाथ नहीं छोड़ूंगा। आपको शिकायत का मौका नहीं दूँगा। मैं आपका हाथ कभी नहीं छोडूंगा। मुझे माफ़ कर दो”

राजेश ने मुस्कराकर कहा,

“मैं जानता हूँ बेटा, तुम सीखोगे। गलती करने से ही इंसान सीखता है। आगे से मेले में जाने से पहले हम एक योजना बनाएंगे ताकि हम कभी अलग न हों।”

रोहन ने कहा, “हाँ पापा, मैं आपकी बात अवश्य मानूंगा।”

उस दिन के बाद, रोहन और राजेश ने मिलकर कई मेलों का आनंद लिया, और रोहन ने कभी पिता का हाथ नहीं छोड़ा।

रोहन ने सीखा कि मेले में जाने का आनंद तब ही है जब परिवार साथ हों। वह अपने पिता के साथ हर जगह जाने लगा और उनकी बातें मानने लगा। राजेश और सोनिया को अपने बेटे पर गर्व हुआ।

इस कहानी में कई महत्वपूर्ण बातें हैं:

  1. परिवार के साथ समय बिताना बहुत महत्वपूर्ण है।
  2. बच्चों को सिखाना चाहिए कि वे अपने माता-पिता की बात मानें और उनकी सलाह का पालन करें।
  3. अगर बच्चे खो जाएं तो उन्हें शांति से सोचकर घर पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए।
  4. माता-पिता को अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए हमेशा सावधान रहना चाहिए।
  5. परिवार के सदस्यों के बीच प्यार और समझदारी बहुत महत्वपूर्ण है।

कहानी बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए एक अच्छा संदेश देती है। यह दिखाती है कि परिवार के साथ समय बिताना और एक दूसरे की देखभाल करना कितना महत्वपूर्ण है।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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