इज्जत की खातिर

इज्जत की खातिर

“हेलो, क्या यह रीना के घर का नंबर है?”

“हाँ जी, मैं रीना का पिता नरेंद्र बोल रहा हूँ।
आप कौन हो और कहाँ से बोल रहे हो? आपको रीना से क्या काम है?” नरेंद्र ने कहा।

“मैं रीना के कॉलेज का प्रिंसिपल बोल रहा हूँ। आज कक्षा 12 के बच्चों का इंग्लिश का वायवा है। आज आपकी बेटी कॉलेज नहीं आई। कॉलेज में बाहर से वायवा हेतु एग्जामनर आए हुए हैं।

आप तुरंत रीना को लेकर कॉलेज में आ जाइए। वायवा में हर बच्चे की ऑनलाइन अटेंडेंस तो होगी ही, साथ ही प्रत्येक बच्चे का फोटो भी अपलोड होना है। आपको जानकारी के लिए बता दूं कि कक्षा 12 में इंग्लिश का वायवा, सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा का हिस्सा होता है।

इसे असेसमेंट ऑफ़ लिसनिंग ऐंड स्पीकिंग (एएसएल) भी कहा जाता है। यह परीक्षा, छात्रों के अंग्रेज़ी में सुनने, बोलने और संचार कौशल का आकलन करती है।”

“यह सब तो मैं जानता हूँ प्रिंसिपल साहब। रीना तो आज सुबह कॉलेज समय से एक घंटा पहले ही वायवा का बताकर कॉलेज के लिए निकल गई थी। क्या वह कॉलेज नहीं पहुँची? आपने रीना के क्लास टीचर से रीना की उपस्थिति के बारे में ठीक से पता कर लिया है?” चिंतित होकर नरेंद्र ने सवाल किया।

“हां जी, देख लिया है और क्लास टीचर से पता भी कर लिया है। कक्षा 12 के ऐसे बच्चे जो आज कॉलेज नहीं आए हैं और जिनका वायवा है, हम उनको फोन करके बुला रहे हैं। हम नहीं चाहते कि हमारे किसी बच्चे का नुकसान हो, वह परीक्षा में फेल हो। रीना को अनुपस्थित पाकर ही हमने आपको फोन मिलाया है।” प्रिंसिपल सर ने स्पष्टीकरण दिया।

“प्रिंसिपल साहब, रीना को घर से निकले 4 घंटे से ज्यादा हो गए हैं। मैं खुद हैरान हूँ कि आखिर वह अब तक कॉलेज कैसे नहीं पहुँची है, जबकि कॉलेज तक का रास्ता मात्र 15 मिनट का ही है।” यह बोलते हुए अब नरेंद्र ज्यादा चिंतित नज़र आये।

प्रिंसिपल सर के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। वे खामोश हो गए। फोन कट करने से पहले उन्होंने कहा-

“बाहर से जो टीचर वायवा लेने के लिए आए हैं, वे अभी 2 घंटे कॉलेज में रहेंगे। अगर रीना से आपका संपर्क हो जाता है तो आप रीना को याद से कॉलेज भेज दीजिएगा।”

नरेंद्र ने भी आश्वासन दिया कि वे रीना का पता लगाने की पूरी कोशिश करेंगे और उसको साथ लेकर कॉलेज आते हैं।

नरेंद्र ने अपनी बेटी की सभी सहेलियों को कॉल की और हर उस जगह कॉल करके रीना के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की जहाँ रीना हो सकती थी। हर जगह से उन्हें नकारात्मक जवाब मिला। नरेंद्र को रीना का पता लगाते-लगते 1 घण्टा बीत गया था।

इन सब बातों से बेखबर रीना एक होटल में अपने बॉयफ्रेंड सचिन के साथ मौज मस्ती कर रही थी। रीना ने सचिन से वायवा का जिक्र भी किया था। वह होटल से निकलना भी चाह रही थी लेकिन सचिन रीना को जाने नहीं दे रहा था।

उसने रीना को कसकर अपनी बाहों में जकड़ रखा था। रीना उससे बार-बार प्यार से कहती- “जान, आज मेरा वायवा है, मुझे अब जाने दो। अच्छे से प्यार किसी और दिन कर लेना।

मिलने के लिए 3 घंटे ही काफी होते हैं। लेकिन यहां तो 5 घंटे हो गए। कहीं ऐसा ना हो मेरा वायवा छूट जाए और मैं फेल हो जाऊं। बाबू अब बहुत समय हो गया है। चलो कहना मानो और मुझे छोड़ो। मन तो हमारा एक दूसरे से कभी भरेगा ही नहीं। हम बहुत जल्द ही फिर से मिलेंगे।”

लेकिन सचिन रीना को छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं था क्योंकि काफी समय के बाद रीना उससे मिलने के लिए आई थी। रीना द्वारा जल्द से जल्द मिलने का आश्वासन मिलने पर ही सचिन ने रीना को अपनी गिरफ्त से आज़ाद किया।

प्रिंसिपल सर द्वारा घर कॉल करने के डेढ़ घंटे बाद रीना अपने बॉयफ्रेंड सचिन के साथ कॉलेज पहुँची। सचिन उसको कॉलेज के गेट पर छोड़कर आगे निकल गया। सचिन द्वारा रीना को छोड़ते हुए प्रिंसिपल सर ने देख लिया था। रीना के करीब आने पर प्रिंसिपल सर ने उसको डांट लगाते हुए कहा-

“यह समय है कॉलेज आने का? वह लड़का कौन था, जो तुम्हें यहाँ छोड़कर गया? क्या तुम्हारे माँ बाप को उस लड़के के बारे में पता है?” रीना चुपचाप सुनती रही।

“तुम्हें इतनी भी शर्म नहीं कि मां-बाप की इज्जत का ध्यान रख लिया जाए? आज तुम्हारा वायवा है। वायवा देने से बस तुम ही रह गई हो। तुम्हें कॉलेज में ना पाकर हमने तुम्हारे पापा नरेंद्र को भी फोन किया था कि वे तुम्हें वायवा के लिए भेज दें। लेकिन तुम घर पर भी नहीं थीं। कॉलेज का बोलकर अय्याशी करती फिर रही हो। तुमको लेकर तुम्हारे पापा कितने परेशान है, कुछ पता है?”

“यह आपने क्या किया सर? आपने घर फोन क्यों किया? आपको मेरा इंतजार करना चाहिए था? मैं आ ही तो रही थी कॉलेज। रास्ते में देर हो गई तो क्या करूँ?”

“बस, अब चुप हो जाओ। सुबह से कॉलेज का बोलकर घर से निकली हुई हो और मुझे सही-गलत समझा रही हो? तुम्हें तो खुद अपने कैरियर और परीक्षा को लेकर गम्भीर होना चाहिए। मुझे जो ठीक लगा, वह मैंने किया। अब जल्दी से कमरे में जाओ, एग्जामनर तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं। अपना वायवा देकर आओ। फिर बात करते हैं।”

वायवा देकर रीना फिर से प्रिंसिपल सर के रूम में आई और उनके आगे गिड़गिड़ाते हुए बोली-

“सर, अब क्या होगा? प्लीज आप सचिन के बारे में मेरे पापा को मत बताना। मैं किसी लड़के के साथ थी, यह जानकर मेरे पापा मेरे बारे में क्या सोचेंगे? समाज में मैं और मेरे मम्मी पापा मुँह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। आप मुझे बचा लीजिए, नहीं तो मेरे पापा अपनी इज्ज़त की खातिर मुझे जान से मार देंगे।”

“यह सब उस लड़के के साथ जाने से पहले सोचना चाहिए था। मेरे पास होटल मालिक की कॉल आ गई थी। वह होटल मालिक मेरा दोस्त हैं। उसी से मुझे सब पता चल गया है कि तुम उस लड़के के साथ उनके होटल में रंगरेलियां मना रही थी। मैं अब कुछ नहीं कर सकता। मैंने तुम्हारे पिताजी को बुलाया है।

वे आने ही वाले होंगे। जो कहना-सुनना है, उनसे बोलना। हमारे इंटर कॉलेज में तुम सिर्फ चंद दिनों की मेहमान हो। अगर मैंने यह बात तुम्हारे पिताजी से छुपाई और कल को तुम इसी तरह झूठ बोलकर घर से गायब रहीं, और भी ज्यादा बिगड़ गई… न सुधरी तो… मैं तो अपनी नज़रों में ही गिर जाऊंगा। फिर मुझे मलाल रहेगा कि काश यह बात मैं तुम्हारे पिताजी से समय रहते बता देता तो कितना अच्छा होता।”
प्रिंसिपल सर ने जवाब दिया।

रीना के पास प्रिसिंपल सर की बातों का कोई जवाब नहीं था। वह चुपचाप खड़ी थी। उसकी आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। उसके पिताजी अब उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे? यह सोचकर बेहद डर गई और डर से काँपने लगी। प्रिंसिपल सर ने उसको आश्वासन दिया कि वे उसे कुछ होने नहीं देंगे। उसके पिताजी को समझाने की कोशिश करेंगे।

कुछ ही देर में रीना के पिताजी प्रिंसिपल रूम में थे। प्रिंसिपल सर ने विस्तार से सारी बात बताई। नरेंद्र सब जानकर गुस्से से आगबबूला होकर रीना को मारने दौड़ पड़े। प्रिंसिपल सर ने उनको शांत करवाते हुए कहा-

“मुझे लगता है कि रीना को एक मौका और देना चाहिए। इसको अपनी गलती पर अफसोस है। जबसे यह कॉलेज आयी है, मुझसे अपने कृत्य को लेकर माफी मांग रही है, रोये जा रही है। यह आपसे सब कुछ बताने को मना कर रही थी, लेकिन मैंने अपनी अंतरात्मा की बात सुनी और आपको बुलाकर सब सच बताया है। आप प्लीज इसको मारना मत। इसको सुधरने का एक मौका दें।”

“मैं इसको मारूं न तो क्या करूँ? समाज में मैं क्या मुँह दिखाऊंगा।” नरेंद्र बोले।

“मुझे पता है कि मुझे क्या करना है और आपको यहाँ से निकलकर रीना के कॉलेज देरी से आने के बारे में क्या बोलना है? इससे आप लोगों की समाज में बदनामी नहीं होगी और कॉलेज भी बदनामी से बच जायेगा।” आश्वासन देते हुए प्रिंसिपल सर ने कहा।

“हमें क्या कहना है, सर?”

“आपको तो पता है ही… कि हमारी इसी कॉलेज के नाम से दो बिल्डिंग हैं। दूसरी बिल्डिंग यहाँ से 2 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको बोलना होगा कि गलती से रीना अपनी दो सहेलियों के साथ दूसरी बिल्डिंग में चली गयी थी।

उनको यही पता था कि वायवा वहाँ होगा। जब इंतज़ार करते करते ज्यादा समय हो गया तो हमनें दूसरी बिल्डिंग में रीना के बारे में पता किया तो रीना और उसकी सहेलियां वहाँ मिल गयी।”

यही हुआ। रीना की सचिन के साथ होटल में रुककर अय्याशी करने की सच्चाई को छुपाया गया और हर किसी से यही कहा गया कि गलती से रीना कॉलेज की दूसरी बिल्डिंग में चली गई थी। वह समझ नहीं पाई थी कि वायवा किधर है? आखिर रीना और उसके माता पिता की समाज में इज़्ज़त का सवाल था।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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