महात्मा गांधी के महाप्रयाण दिवस

महात्मा गांधी के महाप्रयाण दिवस

अहिंसा को हम जीवन में लाए ।
प्रभु को भीतर घट में बसा लें ।
मोक्ष की और कदम बढ़ाये ।
सद्ज्ञान की रोशनी जगा लें ।
आत्मा के अज्ञान को हटायें ।
क्रोध , मान , माया ,लोभ को छोड़े ।
सबसे मैत्री , प्रेमभाव जगा लें ।
जीवन की सौरभ को हम महकायें ।
होनी को कोई टाल नहीं सकता ।
क्यों व्यर्थ में सोंचे रोते – रोते ।
कर्मों का खेल बड़ा विचित्र हैं ।
इससे जीवन को सदा बचाना हैं ।
मोटी हैं हमारी नश्वर काया ।
दुनिया की हैं सब झूठी माया ।
ममता के जाल से सदा हमको बचना हैं ।
खुद में खुद जीकर जीवन को सँवारना हैं ।
जीवन रूपी बगिया में सदा फूल खिलाना हैं ।
बगिया में महकती खुशबू को सदा बाँटना हैं ।
जैसे पतझड़ में पान झरते नीचे गिरते ।
ठीक इसी तरह साँसो को कोई ना ठिकाना हैं ।
दुर्लभ होता मिलना मनुष्य का भव ।
सत्संगति का मिलना भी होता और दुर्लभ ।
आत्मा का “प्रदीप “ जला क्षण – क्षण सफल कर लें ।
मनुष्य भव से मोक्ष मिलता निश्चित यहाँ से जाना ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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