उड़ान

उड़ान | Udaan

उड़ान

पक्षी अपने गीत के बदले तोड़ लेता है धान की दो बालियाँ लौट जाता है आसमान के घने घोंसले में

अनपहुँच अन्वेषा की आँखें क्षितिज के विराग को छूकर लौट आती हैं फिर से अपने अभीष्ट के अन्तिम आश्रय में

डैने सन्तुलित करते हैं दूर से दूर खिसकती नीलिमा की उदार सान्द्रता और फिर से पाने की आस्था में निश्चेष्ट पड़ी हरित की स्पर्धा को

सहज आवाजाही करते सन्तुलन को तोड़कर दृष्टि परिसर की सभी दिशाओं से कलरव लौट जाते हैं धान-खेत की प्रतीक्षा को छूकर पुनः इच्छा से परे महाकाश के मध्य-बिन्दु में थिर और सन्तुलित प्रत्यय की एकनिष्ठता में

जीवन विवर्तित होता रहता है समय की अराजकता में उपलब्धियाँ जाकर आश्रय ढूँढ़ती हैं मँडराती जिज्ञासा के युग्म आधार में।

बीएल भूरा भाबरा

जिला अलीराजपुर मध्यप्रदेश

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • कर्म

    कर्म राहें चाहे जितनी कठिन हों,मैं चलना जानता हूँ,तेरे साथ की उम्मीद में,मैं हर मंजिल पाना जानता हूँ। कर्म ही मेरा साथी है,पर तेरी याद भी संजीवनी है,हर कदम पर तुझे पाने की आशा,मेरे सम्पूर्ण जीवन की कथनी है। मेरे सपनों में बस तू है,पर मेहनत से है मिलन का रास्ता,क्योंकि कर्म के बिना अधूरा…

  • वाल्ट व्हिटमैन की अनुवादित कविता | अनुवादक- दीपक वोहरा

    वाल्ट व्हिटमैन (1819-1892) को अमेरिका के सबसे प्रभावशाली कवियों में से एक माना जाता है। उनका कविता संग्रह, लीव्स ऑफ़ ग्रास, अमेरिकी साहित्य के इतिहास में एक मील का पत्थर है। व्हिटमैन ट्रान्सेंडैंटलिज़्म और यथार्थवाद के बीच संक्रमण का हिस्सा थे, और उनका काम अक्सर अमेरिकी अनुभव और उसके लोकतंत्र की प्रकृति पर केंद्रित होता…

  • इंटरनेट की दुनिया | Kavita internet ki duniya

    इंटरनेट की दुनिया ( Internet ki duniya )   इंटरनेट का आया जमाना मोबाइल चलन हुआ कर लो दुनिया मुट्ठी में लाइव चैटिंग फैशन हुआ   मोबाइल में जान तोते की भांति मन में बसने लगा साइबर अपराध बढ़ गए ठग नेट पर ही ठगने लगा   ऑनलाइन क्लासे चलती गुरुकुल विद्या आए कैसे बैंकिंग…

  • तुलसी विवाह | Tulsi Vivah

    तुलसी विवाह ( Tulsi vivah )   भजन कर भाव भक्ति से, शालिगराम आए हैं। सजा लो सारे मंडप को, प्रभु अभिराम आए हैं। सजी तुलसी होकर तैयार, तुझे वृंदावन जाना है‌। वृंदा कर सोलह श्रृंगार, द्वारिका नाथ रिझाना है। ठाकुर जी हो रथ पे असवार, बाराती झूमते गाते। बजे शहनाई तुलसी द्वार, चेहरे सबके…

  • करगिल जंग | Kavita Kargil Jung

    करगिल जंग ( Kargil Jung ) युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे रणबाँकुरे।…

  • आओ बेवजह बातें करें | Kavita Aao Bewajah Baat Karen

    आओ बेवजह बातें करें ( Aao Bewajah Baat Karen )   आओ बैठो बेवजह बातें करते हैं। जीवन में कुछ सुनहरे रंग भरते हैं। मुस्कुराता चेहरा चमक सा जाए। हंस हंसकर हल्का दिल करते हैं। थोड़ा तुम कहो थोड़ी सुन लो हमारी। दर्द की दास्तान कह दो पीड़ाएं सारी। अफसाने हमारे ना तुमको रुला पाए।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *