बसन्त ऋतु

बसन्त ऋतु | Basant ritu par kavita

बसन्त ऋतु

( Basant Ritu )

 

प्रकृति उत्सव चली मनाने,
पीत वसन काया पर है ।
नव पल्लव की पायल पहने,
राग रंग बसा रग रग है।।

 

पैर धरे न अब धरती पर,
लाज शरम सब छूट गयी।
ऋतुओं के राजा से मिलने,
चूनर धानी ओढ़ गयी।।

 

बौरों के आभूषण पहने,
बौरायी सी लगती है।
कोयल की मीठी वाणी में,
गुन गुन करती फिरती है।।

 

अपनी सुन्दरता के मद में,
संग पवन के झूम चली।
मोहक रूप दिखाती प्रकृति,
हाथ सभी का थाम चली।।

 

स्वच्छ गगन सुंदर धरती के,
अभिनन्दन का उत्सव है ।
वसुधा की श्रृंगारिकता के,
अभिनन्दन का उत्सव है।।

रचना – सीमा मिश्रा ( शिक्षिका व कवयित्री )
स्वतंत्र लेखिका व स्तंभकार
उ.प्रा. वि.काजीखेड़ा, खजुहा, फतेहपुर

यह भी पढ़ें :

Hindi Kavita | Hindi Poem -कष्ट निशा के मन का

Similar Posts

  • चिड़ियों से सीखें | Chidiyon se Sikhen

    चिड़ियों से सीखें चिडियों से सीखे हम वैज्ञानिक युग के विक्षिप्त विकसित कुत्सित मानव प्रेम-प्रीतिकी रीति गीत पेड़ की डाली की महकती चहकती दुनिया बेबस,बंटे,झुलसे,त्रस्त मानव को मुक्ति-मंत्र का संदेश जो हमें देते बहुजन हिताय की नीति बरबस हमें सिखाती द्रोह-भावना को मिटाती पाप,लाभ,लोभ-भोग की परवाह किए बिना सब मिल आशियां बनाते शेखर कुमार श्रीवास्तव…

  • सलमान की सद्भावना | Salman par kavita

    सलमान की सद्भावना ! *****   आज धर्म के नाम पर सभी लड़ रहे हैं, काट और कट रहे हैं। देश को बदनाम और मानवता को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। इसी बीच सलमान खान ने दिया सुंदर संदेश, घर में ही स्थापित किया “गणेश”। हर साल की भांति इस साल भी सपरिवार ‘गणपति…

  • पर्व पर गर्व | Kavita Parv par Garv

    पर्व पर गर्व  ( Parv par Garv )   भले जली होलिका आज भी जल रही है जिंदा है आज भी हिरण कश्यप रावण आज भी जिंदा है बच गया हो प्रहलाद भले बच गई हों सीता भले अहिल्या को मिल गई हो मुक्ति तब भी आज भी स्थिति वही है खुशियां मनाएं किस बात…

  • मैं शून्य हूँ | Kavita Main Sunay Hoon

    मैं शून्य हूँ ( Main Sunay Hoon ) मैं शून्य हूँ जिसे शिखर का अभिमान है आवारगी है रगों में मेरी जिसका सहारा अम्बर है मैं अस्तित्व हूँ बूंद की जिसे साहिल का गुमान है मैं शब्द हूँ जिसका ये सारा जहां है मैं तुम में हूँ जो तुम्हारा निशां है तुम पिता हो मेरे…

  • माँ की ममता | Maa ki mamta par kavita

    माँ की ममता ( Maa ki mamta )    आंचल में छुपाकर के अपने ममता के स्नेह से नहलाती है करती मां दुलार बच्चों को मोती प्यार भरे लुटाती है   सुकून सा मिल जाता है आंचल की ठंडी छांव में डांट फटकार लगती प्यारी मां स्वर्ग बसा है तेरे पांव में   मीठी मीठी…

  • दलित की यथार्थ वेदनाविदा

    दलित की यथार्थ वेदनाविदा घर की खिन्नता को मिटाऊँ,या समाज की उन्नति जताऊँ lक्यूँ भूल गए है हम ,एक डाल के फूल है हम lक्लेश से व्याकुलता तक ,साहित्य से समाज तक lदलित की गति अम्बेडकर जी है ,तो दलित की यति वाल्मीकि जी है l न भूलूँ गत अनुभव ,न छोडूँ अस्त भव lसाँझा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *