प्रेमसिंह सोलंकी जी

प्रेमसिंह सोलंकी जी

प्रेमसिंह सोलंकी जी

( स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक )


हमारे आदर्श आदरणीय श्री प्रेमसिंह सोलंकी जी,
जनता के बीच में जन _जन के नायक थे।
समाज सेवी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,
राजनीति के धुरंधर विधायक थे।।

तारीख 15 जुलाई सन 1913 को स्थान
पटेल फलिया, समोई, मध्यप्रदेश में
पिता श्री बापुजी सोलंकी.जी
बालक बन कर जन्म लिए घर परिवार में

गांव का सामान्य सीमांत _किसान था।
समाज सुधारक, अध्यक्ष रहे

पटेलिया समाज का बेटा बड़ा समझदार विद्वान था।।
अपना कर्म ऐसा किया उन्होंने दुनियां में,
महात्मा गांधी का शिष्य महान था।।
गांधी जी के साथ डांडी यात्रा
शराब छोड़ो आन्दोलन की यात्रा

प्रखरवक्ता, सहज, सरल, ईमानदार थे।
वे आंडबर मुक्त अपना जीवन जीते थे।।
वाणी ऊपर से नारियल जैसे थे कठोर।
क्योंकि उनके जीवन संघर्षों में बीते थे।।

सत्य, संयम, संवेदना, चिंतन से भरे थे।
सामाजिक और राजनीतिक व्यवहार में!!
पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं जी!
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं विधायक बने जोबट में।

उन्होंने जन सेवा ही प्रभु सेवा हैं मानकर।
अपना सर्वस्वा जीवन ही कुर्बान किया।।
संख्याबल,बाहुबल और धन बल सबको।
निस्वार्थ भारत माता पर बलिदान दिया।।

आया एक तारीख 09 नवंबर सन 1995।
जिसमें मध्यप्रदेश ही नही पूरा भारत रोया था।।
मां भारती का वह वीर सपूत

बीएल भूरा भाबरा

जिला अलीराजपुर मध्यप्रदेश

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • चापलूसी एक हूनर | Chaaploosi par kavita

    चापलूसी एक हूनर ( Chaaploosi ek hoonar )    चापलूसी भी एक कला है जो चमचागिरी कहलाती। सत्ता के गलियारों में यह नेताओं को बहुत लुभाती।   चापलूसी के दम पे कई शहरों में ठेकेदार बन आए। मीठी चाशनी में भीगे शब्द मोहक रसीले खूब भाए।   चमचों की संगठित टीम चापलूसी का हुनर रखते।…

  • धरती माँ | Chhand dharti maa

    धरती माँ ( Dharti Maa )   धरती मांँ धरती माँ, लाल को लोरी सुना दो। लड़े समर में वीर, प्यार दो दुलार दो माँ।   शूरवीर महारथी, योद्धा जांबाज सिपाही। मातृभूमि चरणों में, लाडलो को प्यार दो माँ।   अमर सपूत तेरे, लड़ते सीना तान के। जोश जज्बा भरपूर, शक्तियां अपार दो माँ।  …

  • जवाबदारी | Javabdari

    जवाबदारी ( Javabdari )    बूंद, बूंद से बन जाती है नदी और सागर से महासागर तक भी हस्ती कोई भी हो ,छोटी नही होती बूंद मे समाया रहता है महासागर भी… एक ध्रुव तारा ही बदल देता है पंचांग को एक इंद्र धनुष ही करा देता है पहचान रंगों का एक ,कभी भी एक…

  • नवरात्रि पर्व (अश्विन )

    नवरात्रि पर्व (अश्विन ) भुवाल माता पर आस्था अम्बर हैं ।यह निश्छल ,अविरल , अपलक है ।यह सत्यं-शिवं -सुन्दरं क्षेमंकर हैं ।यह आत्म पथ फलदायी सुखकर है ।भुवाल माता का स्मरण सदा सुखदायी है ।भुवाल माता पर आस्था अम्बर हैं ।जब तक रहता है नील गगन में तारातब तक छविमान दिखता लगता प्याराजब अपने उच्च…

  • हे, मनुज अब तो कुछ बोल | Kavita Hey Manuj

    हे, मनुज अब तो कुछ बोल ( Hey manuj ab Kuch to bol )   मसल रहे है, कुचल रहे है, पंख कलियों के जल रहे है, उजड़ रहा है यह हरा भरा, चमन अमन का डरा डरा, मदारी इशारो पे नचा रहा, यहां कागा शोर मचा रहा, कब तक नंगा नाच चलेगा, कब तक…

  • मेरे बचपन आजा | Bachpan Par Hindi Geet

    मेरे बचपन आजा ( Mere bachpan aaja : Geet )   आजा रे, आजा रे मेरे बचपन आजा, प्यार के गीत सुना जा रे। मां की गोद भरी दुलारे, मीत मिलते प्यारे प्यारे। पिता संग इठला इठलाकर, देखें नए नए नजारे।   बचपन की पाठशाला,गिनती पहाड़े सीखें सारे। आजा रे, आजा रे मेरे बचपन आजा।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *