प्रतिभा पाण्डेय “प्रति” की कविताएं | Pratibha Pandey Poetry
परछाई राधा बन जायें
मुरली मधुर बजाते छवि देखी कृष्ण की
प्रेम रस भीनी मधुर मुरली बजाती,
राधा नजर आयें,
प्रेम का संसार अनोखा सखि रे,
देखूँ कृष्ण को साक्षात पर,
परछाई राधा बन जायें ।
असीमानंदित अभिव्यक्ति प्रेम का
कृष्ण छवि अपनी निहारें,
निरीह-सी राधा
कृष्ण को प्रेम से निहारें,
एक के अंदर एक विराजते,
प्रेम सुधि में प्रेम के सहारे।
सखी रे,
ना देखी ना सुनी थी ऐसी प्रेम कहानी!
हृदयपूर्ण लगती ये जोड़ी लुभावनी,
छलिया नाम कृष्ण का पर,
पीछे-पीछे भागती प्रेम दिवानी |।
गणेश वंदन
ऊँ गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ऊँ…….
आज गणपत पधारे है,
आज गणपत पधारे द्वार
सभी मिलकर दर्शन लो..-2
आज गणपत पधारे द्वार
सभी मिलकर दर्शन लो….-2
रिद्धि-सद्धि के दाता
कार्तिकेय के भ्राता-2
पार्वती सुत नंदन
नमस्तु प्रमोदन्
गणनायक गजानंदन
आज द्वारे पधारे है ….-2
प्रथम निमंत्रण आपको
स्वीकारो शिवनंदन-2
सुमरन करती प्रतिभा
कृपाला हो बुद्धिनाथम्
मंगलमूर्ति शुभम्
आज द्वारे पधारे हैं…-2
आज गणपत पधारे है…….|
मैं सान्ध्य-ज्योति तुम सूरज मेरे
सुनो प्रिय प्रियतम वचन मांगती हूँ,
जीवन का साथ सनम मांगती हूँ।
सदा सुहागन का है वरदान मिला,
आपका मन मंदिर दर्पन मांगती हूँ।
मैं सांध्य- ज्योति तुम सूरज मेरे,
दिशाओं में श्रेष्ठतर, पूरब मेरे।
बनूंगी सदा सुख-दुख की परछाईं,
धड़कन को सुखी करते मूरत मेरे।
यमराज भी डरे तुमको छूने से,
अपने लिए ऐसा वचन मांगती हूँ।
सदा सुहागन का है वरदान मिला,
आपका मन मंदिर दर्पन मांगती हूँ।।1।
कुमकुम, काजल लगाती बिन्दी,
श्रृंगार करूँ प्यारे रचाकर मेंहदी।
मधुर गीत गाए चूड़ी, झुमका झूमें,
मैं लगूँ मानो संस्कृत दुलारी हिन्दी।
सोलह श्रृंगार सौन्दर्य, शुभता बढ़ाए,
आजीवन सम्मान का मन मांगती हूँ।
सदा सुहागन का है वरदान मिला,
आपका मन मंदिर दर्पन मांगती हूँ।।2।
तेरे संग देख, दुख छू भी ना पाए,
गंगासागर मिलन अभिभूत कराए।
सच्चे हमसफर सदा साथ चलें तो,
आँखों की चमक चेहरे को सजाए।
लड़ाई के बाद भी तुमको ही चुनती,
स्वामी तेरा प्रेम अटूट बंधन मांगती हूँ।
सदा सुहागन का है वरदान मिला,
आपका मन मंदिर दर्पन मांगती हूँ।।3।
कृष्ण जन्माष्टमी
सर्वत्र उत्सव का आयोजन,
सोहर गाने को मैया है बेसब्र,
धूम धाम से मनता त्यौहार,
कृष्ण का जन्म खूबसूरत उपहार ,
लीलाओं से मंत्रमुग्ध करते,
माखन की चोरी करते,
बड़े बड़े दानव को युद्ध में हराकर,
मामा कंस को जीवन मुक्त करते,
मुरली मनोहर की बांसुरी की धुन पर,
नाचता पूरा बृज धरोहर ,
दुख हरते, शेषनाग से लड़ते,
गोपियों संग रास करते गिरिधर,
मोर मुकुट सर पर साजे,
मनमोहक छवि, बांसुरी बजाते,
धन्य गोकुल हुआ आज के दिन,
नंद के घर आंनद सजाते,
मैया यशोदा फूली ना समायें,
ढोल नगाड़े नाना वाद्य बजवाये,
खुश है आज पूरा देश,
अवतरित हुए विष्णु ,
श्रीकृष्ण वेष,नमन अशेष ।
तिरंगा
दिखती धरती धानी, अम्बर नीला,
मुस्कुराए शहर, गांव रंगीला।
तीन रंग में रंगा हर कोना-कोना,
उत्साह से मन हुआ सुरीला।।
गायन शौर्य का चारों तरफ हो रहा,
तिरंगा ऊँचाई तक फहर रहा,
आओ आजादी का जश्न मनायें
आजादी हर दिलो में लहर रहा |
केसरिया ताकत और साहस दिखाती,
श्वेत शांति और सत्य बताती,
गहरा हरा रंग शुभ, विकास और उर्वरता दर्शाती,
अशोक चक्र की चौबीस तीलियां
चौबीस मार्ग धर्म समझाती |
तीन रंग का तिरंगा हमारी शान है
येही गरिमा, यही अभिमान है,
मर मिटें थे, मर मिटे है, मर मिटेंगे,
तिरंगा हमारी आन शान,जहान है |
रक्षाबंधन
खिलता महकता घर परिवार
सुन्दर प्यार भरे पल यादगार,
धमाचौकडी सारे दिन की,
भाई-बहन से है रौशन संसार,
सावन माह लाया पवित्र त्यौहार।
अटूट रिश्तों का मूल्य बताता,
रिश्तों का प्यारा चमन खिलाता,
रक्षाबंधन प्यार भरा भंडार ,
शुभकामनाएं रक्षाबंधन का त्यौहार।
भाई की कलाई
बहन ने रक्षासूत्र सजाई,
भूल मार पिटाई
प्रेम की ज्योत जलाई,
रोली अक्षत रक्षाबंधन
और रख मिठाई ,
बड़े प्यार से मनाया,
राखी का पावन पर्व ,
बड़े चाव से गुलाबजामुन खिलाई।
बहन को मिला उपहार ,
आकांक्षा नही अपेक्षा करती हूँ,
बना रहे प्रेम भावना का संसार ,
रिश्तों में असीमित प्यार,
अपार स्नेह देखभाल जैसा व्यवहार,
शुभकामनाएं रक्षाबंधन का त्यौहार।।
हम बस दोस्त नहीं
दोस्त दोस्ती की मिसाल है तू,
मेरे हर जवाब का सवाल है तू,
तेरी दोस्ती से सुन्दर जिन्दगी मेरी ,
मेरे जैसा ही दोस्त कमाल है तू।
हृदय- तल में तुम्हारा नेह,
लुटाता मुझपर सारा स्नेह,
पक्कमपक्की है दोस्ती अपनी,
बरसता मुझपर बनकर मेह।
दुख में मुझे चुटकला सुनाकर हँसाये ,
गर मैं ना हंसी तो जबरदस्त गुदगुदाये ,
लोटपोट हो जाती उसकी हरकतों पर,
बिना कारण ही हर दुखड़ा रोकर सुनाये।
कहता है लंगोटिया यार हैं हम,
सुख-दुख के अगरचे दिलदार हैं हम,
असंख्य आवाजों में पहचान जाता है,
सिर्फ दोस्त नहीं,दो तन एक मन हैं हम….।
सूखे अधरों की मधुर मुसकान हैं हम।।
नागपंचमी

सबकी सुनते कालभैरव, भोले भण्डारी,
काशी विराजते विश्वनाथ त्रिपुरारी
गले में सर्प, सिर पर गंगा विराजे
सदाशिव गौरी अर्ध अंग है साजे
सावन माह पावन सुहावन
नागपंचमी त्यौहार शिवभक्त मनभावन
नाग देवता को दूध पिलाने की रस्म अनोखी
धरा ने ओढ़ ली हरित चुनर सरीखी
कुश्ती का आयोजन होता गाँव-गाँव
बच्चे मिलकर क्रीडांगन करते हर ठाँव
झूम-झूम कजरी गाती माताएं
मल्हार की धुन गूँजे चारों दिशाएं
झूला झूलती हर नार
हर्षोल्लास से मनता नागपंचमी का त्यौहार |
सिन्दूर सौन्दर्य है
( अगीत )
दिन आज फिर से याद तुम करो,
तेरहवीं की चल रही है अब तैयारी।
सेना ने मार गिराये है चुन-चुन कर,
जिसने की मानवता के साथ गद्दारी ।।
सुखद स्वप्न में खोए आतंकवाद,
प्रगति को नुकसान पहुँचाने वाले।
हो गया रे नामोनिशान खत्म तेरा,
साम्प्रदायिक दंगे भड़काने वाले ।।
पच्चीस भारतीय एक नेपाली मारकर,
किए थे राम-सनातन पर चोट गहरा।
एजेंसियों से कराई आतंकी पहचान,
शौर्य दिखाए वीर नौ ठिकाना कहरा।।
सिन्दूर आपरेशन बना चल पड़े वीर,
रजनी की चीत्कार चला गोली-बारूद।
नृशंसता की हद पार कर की जो बर्बरता,
दुश्मन को याद कराए सिन्दूर का वजूद।।
सुन लो सभी जो भी हमसे टकराएगा,
वो जरुर एक दिन चूर-चूर हो जाएगा ।
बहन, बेटी को रुलाने वाले सुन लो,
सिन्दूर रंग नहीं सौन्दर्य है, रण चिन्ह भी,
इसलिए नेस्तनाबूत कर दिया जाएगा।।
प्रतिभा हो अनाड़ी दिखना नहीं है
हे नारी!तुम्हें कभी टूटना नहीं है,
सशक्त बनो तुम्हें बिखरना नहीं है ।।1।
सावन कहाँ सदैव रहता भला,
पीड़ित बन गेसू झरना नहीं है ।।2।
बसंत जानकर चलो खुद को,
पर कभी पतझड़ बनना नहीं है ।।3।
फूल की उपमा से सुशोभित हो,
फिर कण्टक बन चुभना नहीं है ।।4।
शिव शक्ति बने तभी उपजी भक्ति,
झांसे में सूपर्णखा होना नहीं है ।।5।
स्नेह दया ममता मूरत माता हो ,
जलती ज्वाला धधकना नहीं है ।।6।
धर्म कर्म पोषक, विधि रचित श्रेष्ठ,
प्रतिभा हो अनाड़ी दिखना नहीं है ।।7।
कहानी
ये कहानी हमारी, ससबर हो जाएगी ,
दुनियाँ किरदारों की,पूरक हो जाएगी ।।1।
उपल पिघल जाएगा, कोशिश करते रहिए,
बंजर जमीन हमारी , ससफर हो जाएगी ।।2।
अंधेरी रात है, जुगनू के साथ चलिए,
रवि के इंतजार में, दुपहर हो जाएगी ।।3।
जो नहीं डरते कभी, परीक्षा परीक्षण से,
वही सभी मंजिल भी, ठठहर हो जाएगी ।।4।
बढ़ाकर हाथ अपना,अब खींचने लगे सनम,
मौजे-जिन्दगी हरी, बे-सर हो जाएगी ।।5।
प्रेम के ये समुन्दर, काश खारे न होते,
तो मौत भी जिन्दादिल, ललहर हो जाएगी ।।6।
मीठे में थोड़ा तो, तंगी रखिए प्रतिभा,
स्वाभिमान रिश्तों में, कमकर हो जाएगी ।।7।
जीवंत लगा
प्रेम-परिपूर्णा फरवरी आई,
और धीर-धीरे खत्म हो रही,
बात की रफ्तार,
मेरी दुनिया के जिक्र पर रूक गई…,
तेरे ख्वाब के ख्याल में,
मैं फिर से अटक गई….।
रोशनी मुस्कान को रही बिखेर,
कब हुई रात कब हो गया सबेर,
गमगीन हुए ख्याबों को,
मीठी याद आज रही तरेर ।
बिखराई थी जो बिखराहट आज भी है,
कल के प्यार में तड़प आज भी है,
वक्त गुजर गया कभी भी बेवक्त आने के लिए,
खेल मुकद्दर मुझसे खेलता आज भी है ।
हसीन पल जीवंत लगा मुझे,
शक्कर में खटास कुछ कम लगा मुझे,
गुदगुदाती रोती तन्हाईयाँ, मुस्कुराएं,
आह!!!! हँसकर,
फिर से एक पृष्ठ और पलट दिया मैंने ।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई
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Very nice
Bahut badhiya