अति

अति

6 माह पुरानी बात है। रोज की तरह जैसे ही मैं स्कूल पहुँचा तो मुझे पता चला कि आज राजू के दोनों बच्चे स्कूल नहीं आये हैं। कारण पूछने पर पता चला कि बच्चों के पिता राजू ने पंखे पर फांसी का फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की है।

उक्त घटना को सुनकर मुझे धक्का लगा। राजू की उम्र मात्र 30 वर्ष होगी। 1 साल पहले ही उसकी पत्नी पार्वती की पेट की गंभीर बीमारी के चलते मृत्यु हो चुकी थी। मैं तुरंत भाग कर राजू के घर पहुंचा तो पता चला कि परिवार के ज्यादातर लोग अस्पताल गए हुए हैं। घर पर राजू की भाभी सुमन जी मौजूद थी। मैंने उनसे पूछा-

“राजू को क्या हुआ है भाभी जी? मैंने सुना है कि राजू ने आत्महत्या करने की कोशिश की है।”

आंखों में आंसू लिए सुमन बोली- “क्या बताऊं, सर जी? पता नहीं क्या जी में आई राजू के… कि उन्होंने यह कदम उठा लिया? सुबह 8:30 बजे के लगभग खाना खा रहे थे।

दाल चावल बनाये थे। खाना खाते-खाते अचानक राजू रोने लगा। हमने उनसे रोने का कारण पूछा तो… राजू रोते हुए बताने लगा- “जो बीमारी मेरी पत्नी को थी, वही बीमारी मुझे लग गई है। अब मैं आसानी से ठीक होने वाला नहीं हूँ। मैं भी अपनी पार्वती की तरह जल्द ही तड़प तड़प के मरूँगा।”

सुमन- “राजू ये अनाप शनाप क्या बक रहे हो? इस तरह नहीं बोलते और न ही इतना गलत सोचते। तुम्हारे आगे दो छोटे बच्चे हैं, उनका तो सोचो। तुम्हें कुछ हो गया तो उनका कौन ध्यान रखेगा, कौन पढ़ायेगा-लिखायेगा?”

राजू- “मैं सच कह रहा हूँ। कल मैं डॉक्टर के यहाँ गया था, जाँच भी करवाई थी। पार्वती की तरह डॉक्टर को मेरी बीमारी भी समझ नहीं आयी। बोलने लगा कि तुम्हें कम से कम 3 साल दवा खानी पड़ेगी।

उसकी बात सुनकर यही लगा कि मेरा मन रखने के लिए डॉक्टर ने 3 साल का समय दिया है। जबकि मुझे अंदर से कितनी दिक्कत होती हैं, ये मैं ही जानता हूँ। कितना भी खा लूँ, पचता नहीं है। दिनों दिन कमजोर होता जा रहा हूँ। जी में आता है कि खुद को खत्म कर लूँ।”

“ऐसा कभी मत करना। ये सब कायर लोग करते हैं।” सुमन ने उसको समझाते हुए कहा।

सुमन ने आगे बताते हुए कहा-

“कुछ देर राजू चुपचाप बैठा रहा, फिर पता नहीं, उसे क्या सूझा.. अचानक से वह उठा। उसने घर के एक कोने में पड़ी रस्सी उठायी और उसको लेकर कमरे में घुस गया और तेजी से कमरे का दरवाजा बंद करके फांसी लगा ली। मैं तब खाना बना रही थी।

मेरा बिल्कुल भी इस ओर ध्यान नहीं था कि वह ऐसा कुछ करेगा। 5 मिनट बाद मेरा 5 वर्षीय बेटा लव मेरे पास भागकर आया और उसने बताया कि राजू चाचा कमरे में बन्द हो गए हैं। वे दरवाजा नहीं खोल रहे हैं। जब मैने कमरे में जाने की कोशिश की थी तो उन्होंने मुझे डाँट के भगा दिया था और कमरा बन्द कर लिया था।

मुझे बच्चे की बात सुनकर अनहोनी की आशंका हुई। मैं रोटी बनाना छोड़कर अंदर भागी और दरवाजा खुलवाने की कोशिश की, राजू को आवाज भी लगवाई, लेकिन राजू ने दरवाजा न खोला। कमरे की खिड़की से मैंने देखा कि राजू फंदे पर लटका हुआ है। उसे ऐसी हालत में देखकर मेरी चीख निकल गयी।

मेरी चीख सुनकर घर परिवार के अन्य लोग भी इकट्ठे हो गए। परिवार में उस समय हम तीन महिलाएं (मैं, सासू माँ और सबसे छोटी देवरानी) और दो छोटे बच्चे ही थे।

हम सबने मिलकर दरवाजा, खिड़की तोड़ने की भरकस कोशिश की लेकिन न तो दरवाजा टूटा और न ही खिड़की टूटी। दोनों बेहद मजबूत थे। हम सबके हाथ पैर फूल गए। हमने आसपास के लोगों को बुलवाकर दरवाजा तुड़वाया। तब तक राजू के दोनों भाई भी आ गए थे।

मरणासन्न अवस्था में राजू को फाँसी के फंदे से उतारा गया। राजू ने पंखे से रस्सी बांधकर लटककर जान देने की कोशिश की थी। आनन फानन में तुरन्त डॉक्टर के यहाँ राजू को बाइक पर बैठाकर ले जाया गया। अब राजू खतरे से बाहर है। मेरे पति (सोनू) ने अभी कुछ देर पहले ही अस्पताल से फोन करके मुझे सूचना दी है। राजू को ऑक्सीजन दी जा रही है। शाम तक उसको अस्पताल से छुट्टी मिल जायेगी। अगर कुछ देरी और हो जाती तो वह बच नहीं पाता।”

“भगवान का शुक्र है कि राजू की जान बच गई। वैसे एक बात बताओ, राजू को क्या बीमारी है.. जिसकी वजह से उसने जीने की बजाय मरना पसन्द किया। अभी आपने बताया कि राजू की पत्नी पार्वती को भी वही बीमारी थी?” मैंने सवाल किया।

‘पता नहीं सर, उनकी बीमारी का कुछ पता नहीं चल सका था। अब राजू के साथ भी यही दिक्कत है। हमने यही सुना है कि इनको ये बीमारी खाने की वजह से हुई है।”

“खाने की वजह से? क्या खाने के कारण हुई?” हैरानी से मैंने सवाल किया।

बीमारी का जो कारण सुमन ने बताया, उसको सुनकर मुझे यकीन नहीं हुआ कि ऐसा भी हो सकता है।

सुमन ने बताया-
“राजू और पार्वती को ज्यादा मीट खाने की आदत थी। वे अक्सर अपने दिन की शुरुआत मीट के साथ करते थे और रात के खाने में भी मीट का सेवन करते थे। एक दिन पार्वती को पेट की समस्या हुई। उसने सोचा कि यह कोई आम समस्या होगी और जल्दी ठीक हो जाएगी।

लेकिन समस्या बढ़ती गई और बाद में पता चला कि उसे पेट की लाइलाज बीमारी हो गई है। राजू ने पार्वती के इलाज के लिए कई अस्पतालों का चक्कर लगाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पार्वती की तबीयत दिन-ब-दिन खराब होती गई और आखिरकार उसने अपने दो छोटे बच्चों को छोड़कर दुनिया को अलविदा कह दिया। राजू को अपनी पत्नी की मृत्यु का बहुत बड़ा झटका लगा। वह अपनी पत्नी के बिना

जीने की कल्पना नहीं कर सकता था। लेकिन जल्द ही राजू को पता चला कि उसे भी पेट की गंभीर बीमारी हो गई है। पार्वती के जाने के बाद से राजू का लगातार इलाज चल रहा है। डॉक्टर ने उसे रेस्ट करने की सलाह दी है। इसका काम भी छूट गया था। इसलिए राजू और अधिक परेशान रह रहा था।

अस्पताल से लौटकर आने के बाद राजू को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी बीमारी का इलाज शुरू कर दिया। उसने अपने खान-पान को बदला और नियमित व्यायाम करना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे, उसकी तबीयत में सुधार होने लगा और वह अपनी बीमारी से लड़ने में सफल रहा। याद रखें कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, हमें हार नहीं माननी चाहिए। हमें अपनी समस्याओं का सामना करना चाहिए और उनका समाधान ढूंढना चाहिए। साथ ही हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए और अपने खान-पान को नियंत्रित करना चाहिए।

ज्यादा मात्रा में मांस खाने से सिर्फ़ जानवरों को ही नुकसान नहीं होता – यह आपको भी नुकसान पहुँचा सकता है! मांस खाने से मानव स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है, आपके पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है और जानलेवा बीमारियों से पीड़ित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

प्रोसेस्ड मीट (वो मांस है जिसे ज़्यादा समय तक ताज़ा रखने के लिए रसायन, प्रीजरवेटिव के साथ मिलाकर रखा जाता है) व अधपका मीट खाना भी घातक बीमारियों को बुलावा देने जैसा है। ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन सहित अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जो लोग मांस और डेयरी का सेवन करते हैं, उनमें मोटापे, कोरोनरी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कैंसर से पीड़ित होने की संभावना उन लोगों की तुलना में अधिक होती है जो इसका सेवन नहीं करते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि लाल या प्रसंस्कृत मांस, जैसे कि गोमांस, भेड़ का मांस, सूअर का मांस, बेकन, हैम और हॉट डॉग का सेवन कैंसर का कारण बनता है। ज़्यादा मांस खाने से कैंसर, हृदय रोग, और मधुमेह जैसी बीमारियां हो सकती हैं। मांस खाने से जुड़ी कुछ बीमारियां इस तरह हैं:-

कोलन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर, लिम्फ़ोमा, पेट का कैंसर, आंत्र कैंसर, इस्केमिक हृदय रोग, डायवर्टिकुलर रोग, मधुमेह, गैस्ट्रो-ओसोफ़ेगल रिफ़्लक्स रोग, प्रोसेस्ड मीट खाने से कैंसर का खतरा ज़्यादा होता है। मांस प्रोसेस करने की प्रक्रिया में कैंसर पैदा करने वाले रसायन बनते हैं। एक लिमिट में मांस सेवन ठीक है।

अति हर चीज की बुरी होती है। इसलिए सोच समझकर लिमिट में हर चीज का सेवन करें ताकि उस चीज की अति के कारण होने वाले दुष्प्रभावों और नुकसानों से बचा जा सके। हमें अपने जीवन में सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और परिवार और दोस्तों का साथ और समर्थन लेना चाहिए।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • हँसी

    बहुत दिनों बाद सब एक साथ इकट्ठा हुए थे। घर का आँगन रौनक से भर गया था। बच्चे दौड़ते फिर रहे थे, औरतें रसोई में व्यस्त थीं, और मर्द हुक्का-चाय का आनंद ले रहे थे। मिलजुल कर खाना खाने के बाद सभी बरामदे में बैठ गए — बातें चलने लगीं, हँसी-ठिठोली का दौर शुरू हो…

  • अनानास

    दस साल का रामू बहुत भोला भाला और सीधा लड़का था। उसको कोई भी अपनी बातों में फंसाकर उल्लू बना देता था। वह बिना सोचे समझे काम करने लग जाता था परन्तु बाद में उसको बड़ा पछतावा होता था। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ स्कूल जा रहा था। रास्ते में उनको अनानास का…

  • लड़के का भविष्य | Laghu Katha Ladke ka bhavishya

    एक बार की बात है । एक ग्रामीण औरत अपने 13 साल के लड़के को शहर के प्रसिद्ध ज्योतिष के पास लेकर गई । औरत : पंडित जी ! यह मेरा इकलौता लड़का है मुझे हर समय इसके भविष्य की बड़ी चिंता रहती है। (पंडित जी लड़के का हाथ देखते हैं।) पंडित जी : वाह…

  • रॉंग नंबर (PART-4 ) | Wrong number Hindi kahani

    रॉंग नंबर (PART-4 ) # अगले_दिन_शाम_को                   ★★★ हम टहलने आये थे।कल की यात्रा ने हमे थका दिया था। वह लड़की और उसका नम्बर हमे अब भी याद था यद्यपि नम्बर मिलने के चांस न के ही बराबर थे तब भी हमने try किया।रवी मेरे फोन से…

  • छेड़खानी

    एक दिन रमेश सर (कंप्यूटर शिक्षक) जैसे ही कंप्यूटर सेंटर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सेंटर प्रबंधक श्री शमीम अहमद जी व कुछ पुलिस वाले रमेश सर के इंतजार में ही बैठे हैं। रमेश सर को देखते ही प्रबंधक महोदय ने कहा,“यहीं है रमेश सर, जिनका आप इंतजार कर रहे थे।” रमेश सर के अंदर…

  • लौट आओ ना पापा | Katha Laut Aao na Papa

    नेहा का कोई संसार में अपना सा लगता था तो वह थे – उसके पापा! उसके पापा भी उसे बहुत चाहते थे। जब उन्हें कोई जरूरत होती तो नेहा को ही बुलाया करते थे। वैसे नेहा की दो और बहने हैं एक बड़ी जिसकी शादी हो चुकी है उसके 1 वर्ष का है छोटा सा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *