देखते है | Dekhte Hain

( ऐसे तो कितने ही सारे अतुल सुभाष है जिन्हें कोई जानते नहीं है, उनमें से कुछ दुनिया में आज भी मौजूद है कुछ इस दुनिया से जा चुके हैं!! )

देखते है

देखते है अब कौन हो हल्ला करेगा।
देखते है अब कौन कैंडल जलाएगा।

निर्दोष पुरुष बेमौत मरा है यह देखो,
कौन जो खिलाफ आवाज़ उठाएगा।

ना कभी पकड़ा जाएगा वकील वो,
ना ही जज वो कभी सज़ा पाएगा।

आख़िर में छूट जाएंगे सभी बेल पर,
अंधा कानून देखता ही रह जाएगा।

वो करती अधिकारों का दुरुपयोग,
क्या समााज ये बात समझ पाएगा।

फंसाकर झूठे इल्ज़ाम में पति को,
एलिमनी के नाम पर लूटा जाएगा।

कब तक दर्ज होंगे ऐसे झूठे मुकदमे,
क्या पति होना अपराध कहलाएगा!

मिलता क्यों नहीं इंसाफ पुरुषों को,
मर्द बनना ही अभिशाप कहलाएगा!

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

#sumitkikalamse

#atulsubhash

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • हमारी विरासत हमारी धरोहर | Poem hamari virasat

    हमारी विरासत हमारी धरोहर ( Hamari virasat hamari dharohar )     शौर्य पराक्रम ओज भरा दमकता हो भाल जहां। हम उस देश के वासी हैं बहती प्रेम रसधार यहां।   पुरखों की पावन संस्कृति रग रग में संस्कार भरा। दूरदर्शी सोच ऊंची विनयशीलता गुणों भरी धरा।   दुर्ग किले हमारी विरासत हमारी धरोहर प्यारी…

  • सोच की संकीर्णता | Soch ki Sankirnata

    सोच की संकीर्णता ( Soch ki sankirnata )    पानी है अगर मंजिल तुम्हे, तो कुछ फैसले कठोर भी लेने होंगे जिंदगी की हर ऊंचाई का पैमाना निश्चित नही होता.. कभी कभी सोच की संकीर्णता स्वयं की प्रतिभा को ही निखरने नही देता…. बढ़ाएं तो आएंगी ही कभी अपने से कभी अपनों से और कभी…

  • कुछ दिन पहले

    कुछ दिन पहले     कुछ दिन पहले मैं आकर्षित हो गया था उसके गौर वर्ण पर उसके मदहोश करते लफ़्ज़ों पर उसके उभरे उरोजों पर……   उसने कहा था-   तुम भी मुझे अच्छे लगते हो मैं जुड़ तो सकती हूं पर…… कैसे तेरे साथ आ सकती हूं.? शंकाओं ने घेरा हुआ है आऊँ…

  • प्रतिस्पर्धा | Pratispardha

    प्रतिस्पर्धा ( Pratispardha )    एक स्पर्धा ही तो है जो ले जाती है मुकाम तक लक्ष्य के अभाव मे हर प्रयास सदैव बौना ही रहता है…. कामयाबी की चाहत ही उभरती है आपने ऊर्जा बनकर भटकाव के रास्तों से भी मंजिल ,अपने दिशा का चयन कर ही लेती है… प्रतिस्पर्धा किसी विशेष एक की…

  • दीपावली सबसे प्यारा त्यौहार

    दीपावली सबसे प्यारा त्यौहार दीपावली है दीपोत्सव का सबसे प्यारा त्यौहार,दीपक जलाकर इसे मनाता हैं देखो सारा संसार।जगमगाता है जग, दीपक की ज्योति की लौ से,दीप जलाते,खुशी मनाते हैं, है रंगोली की भरमार।। दीपावली सनातनियों का है सबसे प्यारा त्यौहार,जग के अंधकार मिटाता है होती रोशनी की भरमार ।बुराई से अच्छाई की विजय कर घर…

  • औघड़ दानी | Aughad dani par kavita

    औघड़ दानी ( Aughad dani )   जब कोई ना हो सहारा रिश्तो के बंधन से हारा फिरता जब तू मारा मारा देता एक ही साथ तुम्हारा औघड़ दानी बाबा प्यारा जिसने भवसागर को तारा मिले नदी को जैसे किनारा वह हरता है संकट सारा वह जाने कष्ट है हमारा करता जीवन में उजियारा जो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *