दरकार

Romantic Kavita | दरकार

दरकार

( Darkar )

 

हमको  है  दरकार  तुम्हारी
हर  शर्त  स्वीकार  तुम्हारी
हमसफर हो जीवन पथ की
तुझ पर हम तो है बलिहारी

 

एक जरूरी किस्सा हो तुम
दिल की धड़कन हो प्यारी
मेरे  जीवन का हिस्सा हो
हमसफर  हो  तुम  हमारी

 

प्रेम   भरी   पुरवाई   हो
झोंका मस्त  बहार  का
सजा हुआ साज गीत का
वीणा   की   झंकार  का

 

इन सांसों की सरगम में
धुन  हो  मधुर तान  भी
शब्दों  के  मोती  दमके
कविता का गुणगान भी

 

महंकता चमन हो हमारा
खिला  रहा  जिंदगी सारी
सुंदर लगता संसार तुमसे
हमको है दरकार तुम्हारी

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

Romantic Kavita | तुझ संग जुड़े नेह के तार

 

Similar Posts

  • एक साथी | Kavita Ek Sathi

    एक साथी ( Ek Sathi ) किसी का किसी से इकरार होता है। समझ लो उससे ही उसे प्यार होता है। ये कब और कहा किससे हो जाये। ये न हम जानते और न ये वो जानते।। दिल हमारा डोलता और भटकता रहता है। कभी सपनों में खोता है तो कभी सपने दिखता है। इसलिए…

  • आवारा धूप | Awara Dhoop

    आवारा धूप ( Awara dhoop )   धूप तो धूप ही होती है इस कोहरे ठंड से ठिठुरते शहर में धूप का इंतजार रहता है सबको कहीं से थोड़ी सी धूप मिले, सूरज सो गया है कंबल में लिपटकर, धूप को सुला लेता है, आगोश में अपनी , धूप सो जाती है, सूरज की बाँहो…

  • मैं अक्सर

    मैं अक्सर   मैं अक्सर गली में बजती तुम्हारी पायल के घुँघरुओं की रुनझुन से समझ लेता हूँ तुम्हारा होना……   बजती है जब-जब सुबह-शाम या दोपहर जगाती है दिल की धड़कन और देखता हूँ झांक कर बार बार दरवाजे से बाहर…….   बहुत बेचैन करती है मुझे छनकती तुम्हारी पायल और खनकती पायल के…

  • अपना प्यारा गांव | Apna Pyara Gaon

    अपना प्यारा गांव ( Apna Pyara Gaon )   जिस माटी पर पड़ा कभी अपने पुरखों का पांव है। महानगर से लगता मुझको अपना प्यारा गांव है। घर चौबारा आंगन देहरी चौरा छप्पर छानी। जाने कितने सुखों दुखों की कहते नित्य कहानी। पर्वों त्योहारों पर कितनी हलचल हुई यहां पर, बचपन हुआ जवान यहां का…

  • Kavita main Faqeer | मैं फ़कीर वो बादशाह

    मैं फ़कीर वो बादशाह ( Main faqeer o baadshah )   दीन दुःखी के मालिक हो, हो करूणा अवतार मेरी  भव  बाधा  हरो, आन  पड़ी  हूं  द्वार।   तुम सम दानी नहीं,हम सम याचक और, मैं फ़कीर वंदन करुं, चरणों में मांगू ठौर।   तुम हो जग के बादशाह, मेरी क्या औकात। तुमने  दी  सांसें …

  • नाकाम | Kavita Nakaam

    नाकाम ( Nakaam ) दुनिया की उम्मीदों पर खरा ना उतर सका मैं। ज़िंदा रहते खुद को मरा ना समझ सका मैं। अपने कद का अंदाज़ा सदा रहा मुझे। अफसोस है कि खुद से बड़ा ना बन सका मैं। एक उनके लिए, और दूसरा अपने लिए ऐसे दोहरे चरित्र का प्रहसन ना पहन सका मैं।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *