भगवान ऋषभ का दीक्षा कल्याणक दिवस

भगवान ऋषभ का दीक्षा कल्याणक दिवस


आदिनाथ भगवान का स्मरण कर ले ।
यह जीवन क्षण – क्षण बीत रहा हैं ।
इसका हम सही से ज्ञान कर लें ।
जन्म – मरण में भ्रमण कर रही नैया को ,
भव – सागर से तरने का प्रण लें ।
आदिनाथ भगवान का स्मरण कर ले ।
मेरा धन मेरा तन ही हैं ।
मेरा ही परिजन तन ही हैं ।
मोह के चक्कर में फँसकर ।
क्यों करते क्रंदन हैं ।
काया हैं आखिर नश्वर ।
यह प्रतिपल रंग बदलती ।
आदिनाथ भगवान का स्मरण कर ले ।
भौतिक जगत की बातों में रम जातें ।
इसको खोल – खोल कर जानते ।
मर्म धर्म का नहीं जानते ।
खुद को भी नहीं पहचानते ।
सद्ज्ञान की गंगा में रमकर ।
मन को पावन कर लें ।
आदिनाथ भगवान का स्मरण कर ले ।
मंदिर में प्रतिदिन जाते ।
झालर आदि बजाते ।
प्रभुवर के सामने तन्मय बनते ।
प्रभु का नाम व आरती गाते ।
चिकना घट साथ में भीतर रखते ।
ऋषभ प्रभु की सीख जीवन में वर ले ।
आदिनाथ भगवान का स्मरण कर ले ।
धर्म का सुनते सुनते बीत रही घड़ियाँ ।
जरा असर हुआ न पलभर भी घड़ियाँ ।
सदा रहे जीवन में नकली के नकली ।
संतों के कथन खरे – खरे कथनों में ।
मानव जीवन में सत्संगत से रमकर रहना ।
आत्मा का शुद्ध स्वरूप “प्रदीप “पाना ।
आदिनाथ भगवान का स्मरण कर ले ।
यह जीवन क्षण – क्षण बीत रहा हैं ।
आदिनाथ भगवान का स्मरण कर ले ।


प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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