स्वस्थ जीवन
यह बात तो साधारण सी है पर स्वस्थ जीवन के लिए अपरिहार्य भी है। हम अपने जीवन में चाहते हैं कि अगर अच्छे काम करें वह अपने कुल का नाम करें आदि – आदि तो सर्वप्रथम अपनी आदतों पर सही से ध्यान दें। यह आदतें ही तो हमारे जीवन की दशा और दिशा सही से निर्धारित करती हैं तदर्थ हमे अपनी – अपनी दिनचर्या पर अच्छा-खासा ध्यान देना होगा।
घटना प्रसंग एक बार इंसान ने कोयल से कहा कि तू काली न होती तो कितना अच्छी होती , सागर से कहा तेरा पानी खारा न होता तो कितना अच्छा होता और गुलाब से कहा तुझमें कांटे न होते तो कितना अच्छा होता आदि – आदि । यह सुनकर तीनों एकसाथ बोले -हे इंसान !
अगर तुझमें दूसरों की कमियां देखने की आदत न होती तो तूं कितना अच्छा होता। अतः हम सबको उसी तराजू से तोले जिसमें हम खुद को तोलते है फिर देखने पर हम पायेंगे कि लोग उतने बुरे नहीं है जितना हम समझते है ।
यह सच है कि आदतें बदलना किसी के लियें भी आसान काम नहीं है पर जो आदत न बदल सके वो इंसान नहीं है ।हम अक्सर दूसरों में कमिया देखते रहतें हैं लेकिन जिसके काम में कुछ हमको गलत लगें तों हमें बिना प्रचारित किये स्वंय उन्हें जताना चाहिये और हमें अगर सभी में दोष लगें तो हमें दूसरों को गलत साबित करने की अपेक्षा अपने स्वयं में बदलाव लाने का प्रयत्न करना चाहिये क्योंकि अपने जीवन में सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को सही से समझकर उनका सुधार कर सकता हो ।
अतः हमारे जीवन का बदलाव ही सही से सार है। हम दूसरों के गुणों से तो कुछ सीखे । वह हम उनके गुणों को खोज-खोज कर अपनायें । हम किसी की कमियों से कभी सरोकार नही रखे तब हमारा जीवन सार्थक हो जाएगा व हमारे मन में आनंद का प्रादुर्भाव होने लगेगा। अतः हमको बुरी आदतों के दुष्परिणाम पर चिन्तन कर अच्छी आदतों को सही से अपनाना होगा।
वह शनैः-शनै: उन्हें हम अपनी दिनचर्या का अभिन्न आंतरिक हिस्सा बनाना होगा। यही सही तरीका अच्छी आदतें अपनाने का, जीवन स्वस्थ बनाने का है ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)
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