प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो

प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो

प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो

जग भले विरुद्ध हो,
राह भी अवरुद्ध हो ।
सत्य पथ न छोड़िए
हृदय सदैव शुद्ध हो ।।

मूढ़ या प्रबुद्ध हो ,
मन कभी न क्रुद्ध हो ।
अप्प दीपो भव गहें ,
भावना विशुद्ध हो ।।

न हर्ष हो न क्षुब्ध हो,
न‌ द्वेष हो न युद्ध हो।
कामना हमारी है,
प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो ।।

रचनाकार…
अजय जायसवाल ‘अनहद’
श्री हनुमत इंटर कॉलेज
धम्मौर सुलतानपुर

अजय जायसवाल ‘अनहद’
श्री हनुमत इंटर कॉलेज धम्मौर
सुलतानपुर उत्तर प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • बचपना | बालगीत

    बचपना  ( Bachpana ) पुआल पर दौड़कर जीत जाते हैं, बारिश में भीगकर नाव चलाते हैं। बर्तनों से खेलकर खाना बनाते हैं-, चुपके से चलके याद, बचपन में चले जाते हैं । मुकुट मोर पंखों का लगाकर, कृष्ण बन जाते हैं, नीले आकाश को छूकर धरती पर इतराते हैं। कपड़ा ओढ़ मेढ़क बनकर, बारिश करवाते…

  • मतदान महोत्सव | Kavita Matdan Mahotsav

    मतदान महोत्सव ( Matdan Mahotsav )   लोकतंत्र का महान महोत्सव मतदान करना शक्ति भक्ति महान महोत्सव मतदान करना राष्ट्र भक्त का कर्त्तव्य मतदान करें देश हित्त में मिलजुल मतदान करें राजतंत्र में राज घरानों की परम्परा प्रजातंत्र में मतदान करने की परम्परा अपने राजा का ख़ुद चयन करो मत में शक्ति समाई चयन करो…

  • बिरजू महाराज | Birju Maharaj Par Kavita

    बिरजू महाराज ( Birju Maharaj )   घुंघरूओं की झनकार एवं मीठी आवाज़, काशी की शान और कथक की पहचान। नर्तक शास्त्रीय गायक प.बिरजू महाराज, 7 वर्ष में प्रथम गायन गाकर बना महान।। बाॅलीवुड‌ की दुनिया से जिनका था नाता, फिल्मों में गीत, नृत्य निर्देशन किया था। जैसे शतरंज के खिलाड़ी फिल्म देवदास, दिल तो…

  • हरि की माया | Poem hari ki maya

    हरि की माया ( Hari ki maya ) धुंध रहा ना बचा कोहरा,पर शक का साया गहरा है। अपनों पर विश्वास बचा ना,मन पे किसका पहरा हैं। बार बार उलझा रहता हैं, मन उसका हर आहट पे, जाने कब विश्वास को छल दे,संसय का पल गहरा है। मन स्थिर कैसे होगा जब, चौकन्ना हरदम रहते।…

  • माँ की उलाहने

    माँ की उलाहने बिटिया जब छोटी थीमॉं के लिए रोती धी,पल भर न बिसारती थीमाँ – माँ रटती रह जाती थी। थोड़ी सी जब आहट पायेचहुओर नजरे दौड़ाये,नयन मिले जब माँ सेदोंनो हृदय पुलकित हो जाये। अब तो बिटिया हुई सयानीआधुनिकता की चढ़ी रवानी,नये तेवर में रहती है अति बुद्धिमानी अपने को,माँ को बुद्धॣ कहती…

  • तुलसी | Tulsi par kavita

    तुलसी ( Tulsi )   हरी पूजन तुलसी बिना रहता सदा अधूरा हैl विष्णु आशीष से पूजित घर-घर तुलसी चौरा है l वृंदा के पतिव्रत के आगे नारायण भी हारे है l शालिग्राम से ब्याह रचाया तुलसी मान बढ़ाया हैl भोग बिना तुलसी के हरि को कब भाया हैंl नारी की सतीत्व ने हरि को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *