अनानास

अनानास

दस साल का रामू बहुत भोला भाला और सीधा लड़का था। उसको कोई भी अपनी बातों में फंसाकर उल्लू बना देता था। वह बिना सोचे समझे काम करने लग जाता था परन्तु बाद में उसको बड़ा पछतावा होता था।

एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ स्कूल जा रहा था। रास्ते में उनको अनानास का ढेर रखा हुआ मिला। शायद किसी फल वाले के फल रखे हुए थे जो उसने बेचने के लिए खरीदे थे और किसी काम से या ठेला लेने वह गया हुआ था। अनानास को देख कर पवन के मुंह में पानी आ गया और उसने अनानास खाने की योजना बनाई।

वह रामू से बोला, “रामू तूने कभी अनानास खाया है?

“कभी नहीं खाया”

“फिर तूने कुछ भी नहीं खाया। ये बहुत मीठा होता हैं। एक बार खायेगा तो बार बार मांगेगा। बोल खायेगा???”

“अगर कोई खिलाएगा तो मैं क्यों ना खाऊंगा??”

“फिर ठीक है एक काम कर, सामने जो अनानास का ढेर पड़ा है, उसमें से एक उठा ले। स्कूल में चल कर मजे से खाएंगे।”

रामू आश्चर्य से बोला, – “मैं उठा लूँ??”

“हां, हां, तू ही उठा और जल्दी से उठा ले, आस पास कोई है भी नहीं। कोई नहीं देख रहा, जल्दी कर।”

भोले रामू ने बिना कुछ सोचे समझे एक अनानास उठा लिया और दोस्तों के साथ स्कूल चल दिया। वे कुछ दूर चले ही थे, तभी अचानक एक व्यक्ति पीछे से चिल्लाता हुआ, दौड़ता हुआ चला रहा था। शायद वह फल वाला ही था।

पवन बोला, –
“रामू भाग, रामू भाग। वह अनानास छीन लेगा।”

रामू ने भागने की कोशिश की, लेकिन पकड़ा गया। फल वाले ने रामू को पकड़ कर उसके गाल पर, कस कर दो झापड़ लगाएं और अनानास छीन लिया। रामू से बोला-

“यह मेरा अनानास तुमने क्यों उठाया??”

रामू ने रोनी शक्ल बनाकर मासूमियत से जवाब दिया-
“खाने के लिए.”

“खाने के लिए भला कोई चोरी करता है। मांग भी तो सकते थे। तुम्हें क्या लगा, तुम्हें कोई देख नहीं रहा?? मैं पड़ोस की दुकान पर कुछ सामान लेने गया था। वहीं से मैंने तुम्हें अनानास उठाते हुए देख लिया था।

इस तरह फल उठाना या चोरी करना गलत है। अगर मैं भी ना देखता तो भगवान जी तो हमें देख ही रहे हैं। वह हमारे गलत कामों की सजा जरूर देते हैं। तुम्हें भी सजा मिलेगी। तुमने चोरी का पाप किया है।”

यह सुनकर रामू जोर-जोर से रोने लगा। फल वाला बोला-
“अब रो मत, चुप हो जा। बस आगे से चोरी मत करना।”

बाद में फल वाले ने रामू का मुंह धुलाकर उसको अनानास खिलाया और स्कूल के लिए विदा किया।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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