एक गोली रोज
होली से एक दिन पहले की बात है। शाम के 6:00 बज रहे थे। प्रतिदिन की तरह आज भी महेश सर समय पर पूजा करने मंदिर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने मंदिर में कदम रखा, वैसे ही उनके फोन की रिंग बजी। कॉल घर से ही थी। उन्होंने फोन रिसीव किया। उधर से बिटिया मीनाक्षी की घबराई हुई आवाज आई-
“पापा घर जल्दी आओ। मम्मी बाथरूम में गिर गई हैं। वे गेट नहीं खोल पा रही हैं। दरवाजा अंदर से लॉक है। आप कहाँ हो? आप जल्दी से घर आ जाओ।”
“क्या हुआ निशा को? अभी तो बिल्कुल ठीक थी वो?”
“पता नहीं पापा, आप जल्दी से आ जाओ। मुझे डर लग रहा है।” बिटिया ने रोते हुए कहा।
“बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है बेटा। मैं आ रहा हूँ।”
दौड़ते-भागते महेश जल्दी से घर पहुंचे। दोनों बच्चे बहुत परेशान थे। रो-रोकर उनका बुरा हाल था। पापा के आने पर उन्हें कुछ हिम्मत आई। दरवाजा तोड़कर निशा को बाहर निकला गया।
निशा मरणासन्न अवस्था में बाथरूम में बेहोश पड़ी थी। देरी न करते हुए तुरंत एम्बुलेंस द्वारा निशा को वेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर्स ने बताया- “आपकी पत्नी को ब्रेन हेमरेज हुआ है। दिमाग की नस फट गई है। तुरंत सर्जरी करनी पड़ेगी। स्थिति गम्भीर है। कुछ कह नहीं सकते।”
“डॉक्टर्स, प्लीज मेरी पत्नी को बचा लीजिए। आप तुरंत इनकी सर्जरी कीजिए। आप जितने मांगोगे मैं रुपये जमा करने को तैयार हूँ।” महेश ने हाथ जोड़कर विनती करते हुए कहा।
“हमारी पूरी कोशिश रहेगी इनकी जान बचाने की।” डॉक्टर्स ने आश्वासन दिया।
प्राथमिक उपचार देने के बाद निशा की डॉक्टर्स की टीम द्वारा सर्जरी की गई। ऑपरेशन रूम से बाहर आकर डॉक्टर्स ने बताया-
“सर, आपकी पत्नी की जान तो बच गई। वे अब खतरे से बाहर हैं। लेकिन उनके बाएं हाथ और बाएं पैर में किसी तरह की कोई हलचल नहीं हो रही है। ब्रेन हेमरेज होने की वजह से उनके बाएं हिस्से ने काम करना बंद कर दिया है।”
“डॉक्टर साहब, मेरी पत्नी पहले की तरह ठीक तो हो जायेगी न?
महेश ने सवाल किया।
“बहुत मुश्किल है सर। आपको जानकारी के लिए बता दूं कि लकवा दो तरह का होता है। पहला लकवा नसों के चोक होने से होता है, जिसमें खून पतला करने की दवा दी जाती है। इसमें मरीज के ठीक होने के चांस ज्यादा होते हैं। दूसरा लकवा, नसों में लीक होने की वजह से होता है, जिसको ब्रेन हेमरेज कहते हैं।
इसमें मरीज के ठीक होने के चांस कम होते हैं। लेकिन मरीज की नियमित देखभाल व नियमित मालिस से अंगों के काम करने की स्थिति में सुधार किया जा सकता है। इसलिए दोनों तरह के लकवों के इलाज में अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं।” डॉक्टर साहब ने महेश को विस्तार से समझाते हुए आगे पूछा-
“सर, एक बात बताइए। इनको अचानक से तो ब्रेन हेमरेज हुआ न होगा। जरूर इनको लगातार भयंकर सरदर्द बना रहता होगा। क्या इन्होंने इस बारे में आपको नहीं बताया?” डॉक्टर साहब ने महेश से सवाल किया।
“डॉक्टर साहब, इनको हाई बीपी की समस्या शुरू से ही रही है। इसका पता हमें तब चला जब गर्भावस्था के दौरान हमारे लगातार दो बच्चे पैदा होने से पहले ही 8वें महीने में खत्म हो गए। हमने डॉक्टर से इनका इलाज़ करवाया। तब डॉक्टर ने बताया कि बीपी हाई होने की वजह से बच्चा पैदा होने में दिक्कत आ रही है।
8वें व 9वें महीने में इनका बीपी बहुत ज्यादा हाई हो जाता है। इससे बच्चों के साथ साथ इनकी जान को भी खतरा है। इनको अभी से ही नियमित बीपी नियंत्रित करने की दवा खानी होगी। बीपी कंट्रोल करने की एक गोली जिंदगी भर चलेगी। डॉक्टर साहब ने चेतावनी देते हुए कहा था- चाहे खाना न खाएं, लेकिन दवा नियमित लेनी पड़ेगी। इससे ये स्वस्थ रहेंगी।
डॉक्टर की सलाह पर इन्होंने दवा नियमित खाई और अगले 4 वर्षों में हमारे दो बच्चे ऑपरेशन से हुए। एक बेटी और एक बेटा। हमने पिछले हादसों से सबक लेते हुए बच्चों की डिलीवरी 8वें महीने में ही ऑपरेशन द्वारा करवाई। ये पिछले दस वर्षों से नियमित रूप से दवा लेती आ रही थी लेकिन अपनी सहेलियों के बहकावे में आकर इन्होंने अब से तीन वर्ष पहले आयुर्वेदिक दवाओं की तरफ रुख किया।
इनकी सहेलियों का तर्क था कि एलोपैथी दवाओं का लगातार नियमित सेवन शरीर के बाकी अंगों पर विपरीत प्रभाव डालता है। ये बहुत नुकसानदेह है। उनकी सलाह पर अमल करने के साथ इन्होंने योगा भी करना शुरू किया। इससे इन्हें काफी आराम मिला। शुरू-शुरू में मैंने दवा छोड़ने पर काफी गुस्सा व ऐतराज किया था।
बाद में, जब दवा छोड़ने के बावजूद आयुर्वेदिक दवाओं से इनको आराम मिला तो मैने चुप रहना बेहतर समझा। पिछले 6 महीने से इन्होंने आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन भी न किया। योगा भी नियमित नहीं कर रही थी। एक दो बार इन्होंने सिर में हल्का हल्का सा दर्द बताया था तो मैने दवा लेने की सलाह दी थी।
फिर से दवा लेने के सवाल पर इन्होंने दर्द बर्दाश्त करना पसंद किया। मुझे यही बताती रहीं कि मेरी तबियत ठीक है। दर्द नहीं है। हमें नहीं पता था कि हाई बीपी की समस्या एक दिन ब्रेन हेमरेज पड़ने का कारण बन सकती है। मात्र एक गोली न खाने की वजह से उनकी स्थिति कितनी विकट, गम्भीर हो गई है।
उनकी इस स्थिति में कहीं न कहीं मैं भी जिम्मेदार हूँ। मैंने भी उनको लेकर लापरवाही बरती।” यह बताते हुए महेश की आंखों से आंसू बहने लगे।
डॉक्टर साहब ने महेश को सांत्वना देते हुए कहा- आप खुशकिस्मत हो कि आपकी वाइफ बच गई हैं। इस तरह के मामलों में मरीज के बचने के चांस काफी कम होते हैं। आपको जानकरी के लिए बता दूँ कि ‘95%’ ब्रेन हेमरेज के मामले हाई ब्लड प्रेशर के कारण होते हैं।
इसलिए ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। कई बार हाई ब्लड प्रेशर बिना किसी संकेत के आता है, इसलिए समय-समय पर इसे मॉनिटर करना बहुत जरूरी है। खासकर 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अपने ब्लड प्रेशर पर निगरानी बनाए रखने की जरूरत है।
इतना ही नहीं ब्लड प्रेशर के साथ कोलेस्ट्रॉल लेवल और शुगर लेवल की भी समय-समय पर जांच करवानी चाहिए, क्योंकि ये चीजें ब्लड प्रेशर लेवल बढ़ने (High Blood Pressure) का कारण बन सकते हैं, जिससे ब्रेन हेमरेज का जोखिम बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर जिसे हाइपरटेंशन (Hypertension) के नाम से भी जाना जाता है, समय के साथ ब्लड वेसल्स की परत को कमजोर कर सकता है।
ऐसे में अगर आपका ब्लड प्रेशर लगातार हाई रहता है तो यह आपके ब्लड वेसल्स की परतों पर ज्यादा दबाव का कारण बन सकता है, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में दिमाग में बढ़ा हुआ यह दबाव छोटे ब्लड वेसल्स के फटने का कारण बन सकता है, जिससे दिमाग में ब्लीडिंग या ब्रेन हेमरेज हो सकता है, जिससे व्यक्ति की जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। आपकी पत्नी के साथ यही हुआ। आप परेशान मत होइए। ईश्वर ने चाहा तो आपकी पत्नी ठीक हो जायेंगी और उनके हाथ पैर भी ठीक से काम करने लगेंगे।”
अस्पताल में बैठे हुए महेश सोच रहे थे कि मात्र एक गोली की वजह से निशा की क्या हालत हो गई? उन्होंने अपनी पत्नी की गलती से सबक लेते हुए अखबार में एक इश्तिहार निकलवाया और लोगों से अपील की, उसमें लिखा था-
“जिंदगी अनमोल है, इसकी कद्र कीजिए। आप अपने लिए न सही पर अपने शुभचिंतकों, परिवार, दोस्तों, जीवनसाथी, बालक-बच्चों आदि के लिए अपनी सेहत का ध्यान रखिये। वे सब आपसे बेहद प्यार करते हैं। उनको आपकी जरूरत है।” इसके साथ-साथ आप अपने परिवार की खुशी और सेहत के लिए निम्न बिंदुओं को अपनाकर अपने चाहने वालों को खुशियां दे सकते हैं:-
1-अगर हाई बीपी के मरीज हैं, तो बीपी कंट्रोल में रखें।
2- सेहत संबंधी किसी समस्या के लिए दवाइयां ले रहे हैं, तो किसी भी हाल में उसे लेना मिस न करें। ज्यादातर समस्याओं जैसे बीपी, गैस, गठिया, थायराइड आदि में डॉक्टर नियमित रूप से सिर्फ एक गोली रोज खाने को बोलता है। उसको नियमित लेना न भूलें। एक बार की भी दवा छोड़ना घातक हो सकता है। अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के बहकावे में आकर तुरंत दवा न छोड़े, अपने डॉक्टर की सलाह से ही छोड़े।
3- बहुत ज्यादा तला-भुना खाने से बचें। जंक फूड न खाएं। कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले खानपान से दूर रहें।
4- घर पर नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
5- डाइट में फल और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं। संतुलित आहार लें।
6- ठंड में जल्दी उठकर वो भी ठंडे पानी से बिल्कुल भी न नहाएं।
7- सीनियर सिटीजन्स धूप निकलने पर ही नहाएं और वॉक करें। रोज कम से कम 5 किलोमीटर पैदल चलें।
8- ज्यादा न सोचें। परिजनों के साथ समय बिताएं। उनसे कोई बात न छुपाएं। बीमारी भी नहीं।
9- हर समस्या का समाधान है। ज़्यादा सोचकर खुद को दिक्कत में न डालें।
10- और सबसे महत्वपूर्ण बात हर हाल में खुश रहें, मस्त रहें। लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने की वजह बनें।
धन्यवाद!
आपका शुभचिंतक
महेश

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा
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