समृद्धि वाली गुल्लव्वा
समृद्धि वाली गुल्लव्वा*
ओ शांत है ओ सौम्य है
ओ सुन्दर है l धान का श्रृंगाहै
फिर भी सावन में ही आती है l
बताओ ओ कौन है ?
ओ धन है l ओ संपत्ति है l
ओ ऐश्वर्य का आभास है l
फिर भी सावन में आती है l
बताओ ओ कौन है ?
ओ सुख भी देती है l
ओ समृद्धि भी देती है l
और घर को अन्न का
भंडार बनाती है l
फिर भी सावन में आती है l
बताओ ओ कौन है ?
घर – घर विराज करती l
पल – पल राज़ करती l
बालिका -कन्या , स्त्रियों से पूज्नी है l
फिर भी सावन में आती है l
बताओ मैं कौन हो ?
ग्राम की शान है l
खेतों की हरियाली है l
ओ गीत है , ओ नृत्य है ,
वे लोक बोली है l
फिर भी सावन में आती है l
बताओ ओ कौन है ?
ओ गाँव , नगर , राज्य , देश में
पर्व लाती है l
1 2 3 4 सप्ताह लाती है l
ओ दिन है l ओ रात है l
फिर भी सावन में आती है l
बताओ ओ कौन है ?
*North कर्नाटक में बड़े उत्साह से मनाया जानेवाला ” उत्सव ” जो सावन के महीने में मनाया जाता है l

वाहिद खान पेंडारी
( हिंदी : प्राध्यापक ) उपनाम : जय हिंद
Tungal School of Basic & Applied Sciences , Jamkhandi
Karnataka
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