इस दिवाली हर दिल हो दीया

इस दिवाली हर दिल हो दीया | Diwali par kavita

इस दिवाली हर दिल हो दीया

( Is diwali har dil ho diya : Deepawali kavita )

 

 

इस

दिवाली

हर दिल हो

दीया

 

रूह उसकी

बाती

प्रेम, प्यार

महोब्बत भरे

जज्बातों के

तेल में जल कर

 

तेरे मेरे

हर इक की

अमावस की

रात भी

बने

 

पूनम सी

पूरनमासी

तभी

होगी

 

हम

सबकी

शुभ दीपावली…

?

Suneet Sood Grover

लेखिका :- Suneet Sood Grover

अमृतसर ( पंजाब )

यह भी पढ़ें :-

देखो आज राम बन कितने रावण निकलेंगे | Kavita

Similar Posts

  • बोतल | Kavita Botal

    बोतल ( Botal ) ता-ता थैया करती बोतल लाती है बाहर l उसकी ताकधीना-धिन पर नाच रहा संसार l बोतल में है समाया सारे जग का सार l करता है गुलामी बोतल की संसार l बिन बोतल के सूना है संसार बिना बोतल नहीं नहीं है मनुज का उद्धार। बोतल के दम पर आज बच्चा…

  • दबी कुचली हुई कलम | Dabi Kuchli hui Kalam

    दबी कुचली हुई कलम ( Dabi kuchli hui kalam )   दबी कुचली हुई कलम, कभी असर दिखा देगी। पीर गर बना सैलाब, सिंहासन सारा हिला देगी। कलम का काम चलना है, मशाल बनकर जलना है। दर्द दुनिया का स्याही, कागज पे शब्दों में ढलना है। आहत जो कलम हुई, कभी खड़ा तूफान हो जाता।…

  • प्रदूषण की समस्या | Poem on Pollution in Hindi

    प्रदूषण की समस्या ( Pradushan ki samasya )  हिन्दुस्तान में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली हैं प्रदूषण का आगाज़, मजहबी इमारतों में शोर गुल सूरज से पहले है प्रदूषण का आगाज़।। शादी-ब्याह हो या सियासतदानों की रैली जुलूस तो है प्रदूषण, कलश यात्रा, शोभायात्रा में बजते डीजे होती ऊंची आवाज़ तो प्रदूषण।। तीनों सूबों और नजदीक इलाकों…

  • बिन्दु | Kavita bindu

    बिन्दु ( Bindu )   ग्रह नक्षत्र योग कला विकला दिग्दिगन्त हैं। बिन्दु मे विलीन होते आदि और अंत हैं।। अण्डज पिण्डज स्वेदज उद्भिज्ज सृजाया है, बिंदु में नित रमण करें ब्रह्म जीव माया है। सकल महाद्वीप महासिंन्धु श्रृंग गर्त न्यारे, अपरिमित निराकार चिन्मय स्वरूप प्यारे।। त्रिगुणी प्रकृति ग्रीष्म शीत पावस बसंत हैं।। बिन्दु में०।।…

  • मानव तन पाकर भजा न प्रभु को

    मानव तन पाकर भजा न प्रभु को मानव तन पा करके, भजा न प्रभु को जो। यह अनमोल जीवन अपना, वृथा ही दिया उसने खो। मानव तन पा करके, भजा न प्रभु को जो। गया ठगा द्वारा ठगिनी माया के। झूठा रंग चढ़ाया अपनी काया पे। छोड़ फूल बीज कांटे का, लिया बो जो। यह…

  • भूख | Safalta ki Bhookh par Kavita

    भूख ( Bhookh )   चाहे हो दु:ख लाख पालो भूख आप बढ़ने की पढ़ने की आसमां छूने की। भूख बड़ी चीज़ है! भूख ही नाचीज़ को चीज बनाती है वरना यह दुनिया बहुत सताती है बहुत रूलाती है सच को भी झुठलाती है। अधिकारों से भी रखती हमें वंचित मस्तिष्क इनका बहुत ही है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *