Aagon mein kavita

आगों में | Aagon mein kavita

आगों में

( Aagon mein )

 

कभी  तानों  में  कभी  रागों  में ।
हम तो उलझे ये गुना भागों में ।।
आँधियों से बुझे नहीं दीपक ।
तेल था ही नहीं चिरागों में ।।
वक़्त में सील नहीं पाया कपड़ा ।
लड़ाई  छिड़  रही  थी  धागें में ।।
तेज  जेहन  था  पर रहे पीछे ।
क्योंकि पैदा हुये अभागों में ।।
आह ठंडी भी हम रहे भरते ।
और कूदे बला की आगों में ।।

 

✍?

 

लेखक : : डॉ.कौशल किशोर श्रीवास्तव

171 नोनिया करबल, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

यह भी पढ़ें : –

मन का आंगन | Man ka Aagan Kavita

 

Similar Posts

  • हिन्दी हमारी मां | Hindi Hamari Maa

    हिन्दी हमारी मां ( Hindi tumhari maa )    हिन्दी हमारी मातृभाषा गर्व है मुझे, दिल को छू लेने वाली भाषा गर्व है मुझे। 14 सितम्बर का दिन हमेशा रहेगा याद, इस खास दिन के मौके पर गर्व है मुझे। हिन्दी को जैसे लिखे वैसे पढ़ें है यह खास, आम जनमानस की भाषा पर गर्व…

  • हमारी बेवकूफियां | Kavita

    हमारी बेवकूफियां ( Hamari Bewakoofiyaan )   सचमुच कितने मूर्ख हैं हम बन बेवकूफ हंसते हैं हम झांसा में झट आ जाते हैं नुकसान खुद का ही पहुंचाते हैं सर्वनाश देख पछताते हैं पहले आगाह करने वाले का ही मज़ाक हम उड़ाते हैं न जाने क्या क्या नाम उन्हें दे आते हैं शर्मिंदा हो आंख…

  • मां बाप बेवजह बदनाम होते है | Poem dedicated to parents in Hindi

    मां-बाप बेवजह बदनाम होते है ( Maa-baap bewajah badnaam hote hai )      शिक्षा संस्कार देते हमें अंगुली पकड़ सीखलाते हैं। लाड प्यार से पालन करते वो प्रेम सुधा बरसाते हैं। उन्नति मार्ग सदा दिखलाते बीज संस्कारी बोते हैं। भली सीख देते मां-बाप बेवजह बदनाम होते हैं।   संघर्षों से खुद भीड़ जाते शीतल…

  • 21 वीं सदी का यथार्थ

    21 वीं सदी का यथार्थ देव संस्कृति देव भाषा देव लोक की विदाई मानव का प्रौद्योगिकीकरण जड-चेतन का निशचेतन छायावाद का प्रचलन चार्वाक का अनुकरण कृत्रिम इच्छा का सृजन कृत्रिम मेधा का उत्पादन बाजारों के बंजारें आत्ममुग्धता की उपभोक्तायें मानवता का स्खलन सभ्यता का यांत्रिकरण बिलगेटस,मस्क का खगोलीकरण अंबानी,अडानी का आरोहण मूल्यों-नीतियों का मर्दन रक्तबीजों…

  • मधु | Madhu par kavita

     मधु  ( Madhu )    शहद बडी गुणकारी…..|| 1.शहद बडी गुणकारी, रहतीं दूर अनेक बिमारी | अमृत सा गाढा मीठा द्रव्य, कुदरत की कलाकारी | मधु की रचना मक्खी करती, फूलों से रस लेकर | फूलों को खुश कर देतीं हैं, मीठी सी बातें कहकर |  शहद बडी गुणकारी…..|| 2.शहद से निकले छत्ते को, मोम…

  • जलाओ न दुनिया को | Jalao na Duniya Ko

    जलाओ न दुनिया को ! ( Jalao na duniya ko )   मोहब्बत की दुनिया बसा करके देखो, हाथ से हाथ तू मिला करके देखो। सूखे पत्ते के जैसे न जलाओ जहां को, नफ़रत का परदा हटा करके देखो। गिराओ न मिसाइलें इस कदर गगन से, उजड़ते जहां को बसा करके देखो। अमन -शान्ति से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *