Adheer

अधीर | Adheer

अधीर

( Adheer )

 

बह जाने दो अश्रु को अपने
कुछ तो दिल के छालों को राहत मिलेगी
बातों के बोझ को भी क्या ढोना
कुछ तो सोचने की मोहलत मिलेगी

बांध रखा है फर्ज ने वजूद को
उसे खोकर भी जिंदा रहना नहीं है
अदायगी के कर्ज को चुकाना भी जरूरी है
पथ से तुझे आखिर तक भटकना नहीं है

माना के सब्र का बांध टूट ही जाता है
फिर भी रोक ले बहाव से खुद के घर को
बिखर जाएगा तेरे टूट जाने से
माली चमन से अलग नहीं होता कभी

लौट आते हैं परिंदों भी दूर गगन से
घोसले तो रहते हैं पेड़ पर ही
अभी नशा है दूर के नजारों का उन्हें
तेरी हर बात जाएगी सर स के ऊपर से ही

तेरी ही कलियां है महकने को आतुर हैं
कुछ देर ठहर धूप से कुछ तप जाने दे
आ जाएगी समझ भी उजाले के तपन की
हो न यूँ अधीर ,कुछ उन्हें भी उड़ जाने दे

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

तेवर | Tevar

Similar Posts

  • ईंट की दीवारें | Kavita Eent ki Deewaren

    ईंट की दीवारें ( Eent ki Deewaren ) जब तक है जीवन जगत में वक्त का दौर तो चलता रहेगा बंटी है रात और दिन में जिंदगी ये चक्र तो यूँ ही चलता रहेगा मिलेंगे रेत के टीले हर जगह कहीं पर्वतों का झुंड होगा होगी कहीं कहीं खाईं गहरी कहीं खौलता कुआं होगा कट…

  • गीतों को सौगात समझना | Poem geeton ko saugaat samajhna

    गीतों को सौगात समझना ( Geeton ko saugaat samajhna )   काव्य भावों को समझ सको तो हर बात समझना मैंने लिखे हैं गीत नए गीतों को सौगात समझना   दिल का दर्द बयां करते उर बहती भावधारा मधुर तराने प्यारे-प्यारे हर्षित हो सदन सारा   शब्द शब्द मोती से झरते बनकर चेहरे की मुस्कान…

  • बुजुर्ग | Atukant kavita

    बुजुर्ग ( Buzurg ) अतुकांत कविता   अधेड़ सी उम्र सफेद बालों वाले बुजुर्ग जीवन का अनुभव लिए हुए दुनिया का जाने क्या-क्या उतार-चढ़ाव देखे होंगे कितने आंधी और तूफान आए होंगे कितने सावन बरसे पुष्प खिले होंगे मन के किसी कोने में खुशियों की बहारों के कितनी मेहनत संघर्ष किया होगा जीवन में उम्र…

  • पिता – एक कल्पवृक्ष | Pita ek kalpavriksha

    पिता – एक कल्पवृक्ष ( Pita ek kalpavriksha )    अपनी कलम से छोटा सा साहस मैंने भी किया है, पिता पर कुछ लिखने का प्रयास मैंने भी किया है। घने वृक्ष के समान पिता होते हैं, जिनके साये में परिवार पलते है , सूरज का होते है वो ऐसा प्रकाश गम के काले बादलों…

  • फुर्सत के पल | Fursat ke Pal

    फुर्सत के पल ( Fursat ke pal )    फुर्सत के पल मिल जाए आओ मीठी बात करे। हंस-हंसकर हम बतलाए एक नई मुलाकात करें। लो आनंद हंसी पलों का उमंगों का संचार करो। फुर्सत के पल सुहाने खुशियों का सत्कार करो। याद कर लो जरा उनको वक्त पड़े जो काम आए। बुलंदियों को पहुंचाया…

  • तुम उस शर्वरी पढ़ते

    तुम उस शर्वरी पढ़ते खत मेरा अंततः तक,काश ! तुम उस शर्वरी पढ़ते,प्रेम का एक नव रूप,काश ! तुम विभावरी गढ़ते।तुम अगर पढ़ते तो शायद,फैसले आज कुछ और होते,देह से भले विलग रहते,किन्तु ह्रदय से एक रहते।प्रिय ! निर्णय तुम्हारा सहजरूपी,निर्मित ताज होता,शीश मैं झुकाती,पूर्ण सब अभिषेक होते।सोपान उस दिन प्रणय का,काश ! तुम दो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *